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वेटलैंड का प्रस्ताव निरस्त.. अब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर विचार
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उझानी (बदायूं)। नरऊ वालों को तालाब के गंदे पानी से फिलहाल निजात मिलती नजर नहीं आ रही है। डेढ़ साल पहले नगर पालिका परिषद का तालाब के पास वेटलैंड निर्माण का प्रस्ताव शासन ने निरस्त कर दिया गया है। ऐसे में पालिका ने अब कम लागत के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर विचार शुरू कर दिया है।
नरऊ गांव के तालाब के पास वेटलैंड निर्माण के लिए डीएम के जरिए शासन को करीब डेढ़ साल पहले प्रस्ताव उस वक्त भेजा गया था जब संक्रमित पेयजल जनित बीमारियों से गांव में बीमारियां फैलीं थीं। इस दौरान दो महिलाओं समेत चार लोगों की मौत भी हो गई थी।
इस प्रस्ताव के बाद पालिका ने वेटलैंड निर्माण को जगह का चयन भी कर लिया। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब दो करोड़ रुपये की लागत आनी थी। तत्कालीन ईओ डॉ. डीके राय ने इसके लिए विशेष पैरोकारी भी की थी। पालिका सूत्र बताते हैं कि शासन ने विशेषज्ञों की टीम से वेटलैंड की डीपीआर का अवलोकन कराया तो खर्चा दो करोड़ रुपये से अधिक आया। ऐसे में यह प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है।
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ऐसे में अब पालिका प्रशासन ने कम खर्चे में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर विचार शुरू कर दिया है। इस प्लांट पर करीब 60 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है।
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भाजपा विधायक धर्मेंद्र शाक्य पहुंचे तो सामने आई हकीकत
शेखूपुर से भाजपा विधायक धर्मेंद्र शाक्य रविवार दोपहर नरऊ गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों ने गंदे पानी की समस्या बयां की तो उन्होंने ईओ जेपी यादव समेत ब्लॉक के अफसरों को बुलाकर बात की। उसी दौरान अफसरों की ओर से विधायक को बताया गया कि वेटलैंड निर्माण का प्रस्ताव निरस्त हो चुका है।
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वैकल्पिक रूप में खुदवाया गया नाला भी नहीं आया काम
करीब दो-ढाई साल पहले नरऊ के तालाब का जलस्तर बढ़ा तो आसपास सैकड़ों बीघा खेतों में सरसों और गेहूं की फसलें चौपट हो गई थीं। ग्रामीणों के विरोध पर जिले के अफसरों ने पालिका प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करने का आदेश दिया। पालिका ने नरऊ मोड़ से गांव फतेहपुर तक सड़क किनारे नाला खुदवा दिया था। फिर भी मोड़ से आगे नाले का पानी नहीं पहुंच पाया।
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नरऊ तालाब के पास वेटलैंड निर्माण का प्रस्ताव निरस्त हो गया है। वेटलैंड के निर्माण पर प्रस्ताव की धनराशि से अधिक लागत आने का अनुमान था। विशेषज्ञों की टीम ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर विचार किया है। पानी के सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद यह प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- जेपी यादव, ईओ
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नरऊ गांव के तालाब के पास वेटलैंड निर्माण के लिए डीएम के जरिए शासन को करीब डेढ़ साल पहले प्रस्ताव उस वक्त भेजा गया था जब संक्रमित पेयजल जनित बीमारियों से गांव में बीमारियां फैलीं थीं। इस दौरान दो महिलाओं समेत चार लोगों की मौत भी हो गई थी।
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इस प्रस्ताव के बाद पालिका ने वेटलैंड निर्माण को जगह का चयन भी कर लिया। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब दो करोड़ रुपये की लागत आनी थी। तत्कालीन ईओ डॉ. डीके राय ने इसके लिए विशेष पैरोकारी भी की थी। पालिका सूत्र बताते हैं कि शासन ने विशेषज्ञों की टीम से वेटलैंड की डीपीआर का अवलोकन कराया तो खर्चा दो करोड़ रुपये से अधिक आया। ऐसे में यह प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है।
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ऐसे में अब पालिका प्रशासन ने कम खर्चे में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर विचार शुरू कर दिया है। इस प्लांट पर करीब 60 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है।
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भाजपा विधायक धर्मेंद्र शाक्य पहुंचे तो सामने आई हकीकत
शेखूपुर से भाजपा विधायक धर्मेंद्र शाक्य रविवार दोपहर नरऊ गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों ने गंदे पानी की समस्या बयां की तो उन्होंने ईओ जेपी यादव समेत ब्लॉक के अफसरों को बुलाकर बात की। उसी दौरान अफसरों की ओर से विधायक को बताया गया कि वेटलैंड निर्माण का प्रस्ताव निरस्त हो चुका है।
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वैकल्पिक रूप में खुदवाया गया नाला भी नहीं आया काम
करीब दो-ढाई साल पहले नरऊ के तालाब का जलस्तर बढ़ा तो आसपास सैकड़ों बीघा खेतों में सरसों और गेहूं की फसलें चौपट हो गई थीं। ग्रामीणों के विरोध पर जिले के अफसरों ने पालिका प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करने का आदेश दिया। पालिका ने नरऊ मोड़ से गांव फतेहपुर तक सड़क किनारे नाला खुदवा दिया था। फिर भी मोड़ से आगे नाले का पानी नहीं पहुंच पाया।
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नरऊ तालाब के पास वेटलैंड निर्माण का प्रस्ताव निरस्त हो गया है। वेटलैंड के निर्माण पर प्रस्ताव की धनराशि से अधिक लागत आने का अनुमान था। विशेषज्ञों की टीम ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर विचार किया है। पानी के सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद यह प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- जेपी यादव, ईओ