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‘...हम तो अली के साथ हैं तुम किसके साथ हो’
Jrifnagr
Updated Sat, 16 May 2015 07:41 PM IST
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गांव कादराबाद में हजरत कादिर शाह वली की दरगाह पर उर्स मनाया गया। दूसरे दिन महफिल-ए-कव्वाली हुई। अमरोहा से आये कव्वाल इफ्तखार अहमद ने नाते रसूल पढ़ी। इसके बाद सुनाया-
ताज दारे हरम हो निगाहे कर
हम गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे।
अलीगढ़ से आए कव्वाल शमीम अनवर झनकार ने कलाम पेश किए। उन्होंने सुनाया-
मसलक पता चले तो फिर खुलकर बात हो,
हम तो अली के साथ हैं तुम किसके साथ हो।
बोलो हैदर कलंदर अली-अली, मौला अली-अली।
इस कलाम पर कमेटी के सदर मौलाना शुजा कादरी एवं वहां मौजूद लोग झूम उठे। प्रोग्राम के बाद दरगाह के साहिबे सज्जादा ख्वाजा हमीदउद्दीन कादिरी ने मुल्क में अमन के साथ नेपाल में भूकंप पीड़ितों के लिए दुआएं कीं। इस मौके पर अजीमुल हसन, आरयू खान, भूरे, इमामी, मुबारिक, दानिश, नासिर, सरताज, अजीम कुरेशी, वसीम आदि मौजूद रहे।
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ताज दारे हरम हो निगाहे कर
हम गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे।
अलीगढ़ से आए कव्वाल शमीम अनवर झनकार ने कलाम पेश किए। उन्होंने सुनाया-
मसलक पता चले तो फिर खुलकर बात हो,
हम तो अली के साथ हैं तुम किसके साथ हो।
बोलो हैदर कलंदर अली-अली, मौला अली-अली।
इस कलाम पर कमेटी के सदर मौलाना शुजा कादरी एवं वहां मौजूद लोग झूम उठे। प्रोग्राम के बाद दरगाह के साहिबे सज्जादा ख्वाजा हमीदउद्दीन कादिरी ने मुल्क में अमन के साथ नेपाल में भूकंप पीड़ितों के लिए दुआएं कीं। इस मौके पर अजीमुल हसन, आरयू खान, भूरे, इमामी, मुबारिक, दानिश, नासिर, सरताज, अजीम कुरेशी, वसीम आदि मौजूद रहे।
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