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Budaun News: रील्स देखते-देखते बिगड़ रही है गर्दन की सेहत
Tue, 24 Feb 2026 01:41 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 24 Feb 2026 01:41 AM IST
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जिला अस्पताल में मरीजों की लगी लाइन। संवाद
- फोटो : samvad
बदायूं। मोबाइल फोन का बढ़ता उपयोग अब बच्चों और युवाओं की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई, रील्स देखने, मोबाइल गेम खेलने और कार्टून देखने की बढ़ती आदत के कारण कम उम्र में ही सर्वाइकल की समस्या सामने आने लगी है। डाॅक्टरों के अनुसार 10 से 12 वर्ष के बच्चे भी अब गर्दन दर्द, जकड़न और कंधों में खिंचाव जैसी समस्याओं की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में बच्चों की ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक बच्चे आ रहे हैं। इनमें गर्दन दर्द जैसी समस्याओं के पांच से दस बच्चे शामिल हैं।
बच्चे अक्सर लेटकर, पेट के बल या आड़े-तिरछे होकर मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में गर्दन झुकाकर स्क्रीन देखने से गर्दन की हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न होती है।
इसके अलावा शारीरिक गतिविधियों की कमी और आउटडोर खेलों से दूरी भी स्थिति को और गंभीर बना रही है। युवाओं में भी सर्वाइकल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लगातार वाहन चलाना, ऑफिस या दुकान पर घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना और खाली समय में मोबाइल स्क्रॉल करते रहना गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर असर डाल रहा है।
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कई युवाओं को सिर दर्द, चक्कर आना, हाथों में झनझनाहट और गर्दन मोड़ने में दिक्कत जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी न बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है। बच्चों और युवाओं दोनों को मोबाइल का सीमित उपयोग करना चाहिए।
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30 से 40 मिनट पर ब्रेक जरूरी
-मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय सही बैठने की मुद्रा अपनाना जरूरी है। हर 30 से 40 मिनट पर ब्रेक लेकर गर्दन और कंधों की हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है। बच्चों को मोबाइल की बजाय खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। वहीं, डॉक्टरों ने सलाह दी है कि गर्दन में लगातार दर्द या जकड़न महसूस होने पर लापरवाही न करें। तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें, ताकि सर्वाइकल की समस्या से बचाव किया जा सके।
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वर्जन-
-लगातार मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर का उपयोग नहीं करना चाहिए, बीच-बीच में ब्रेक लेना चाहिए। इस ब्रेक की अवधि में गर्दन, कंधों के हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। वहीं, ब्रेक से आंखों को भी राहत मिलती है।
-डॉ. अमित वार्ष्णेय, सीएमओ
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बच्चे अक्सर लेटकर, पेट के बल या आड़े-तिरछे होकर मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में गर्दन झुकाकर स्क्रीन देखने से गर्दन की हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न होती है।
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इसके अलावा शारीरिक गतिविधियों की कमी और आउटडोर खेलों से दूरी भी स्थिति को और गंभीर बना रही है। युवाओं में भी सर्वाइकल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लगातार वाहन चलाना, ऑफिस या दुकान पर घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना और खाली समय में मोबाइल स्क्रॉल करते रहना गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर असर डाल रहा है।
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कई युवाओं को सिर दर्द, चक्कर आना, हाथों में झनझनाहट और गर्दन मोड़ने में दिक्कत जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी न बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है। बच्चों और युवाओं दोनों को मोबाइल का सीमित उपयोग करना चाहिए।
30 से 40 मिनट पर ब्रेक जरूरी
-मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय सही बैठने की मुद्रा अपनाना जरूरी है। हर 30 से 40 मिनट पर ब्रेक लेकर गर्दन और कंधों की हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है। बच्चों को मोबाइल की बजाय खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। वहीं, डॉक्टरों ने सलाह दी है कि गर्दन में लगातार दर्द या जकड़न महसूस होने पर लापरवाही न करें। तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें, ताकि सर्वाइकल की समस्या से बचाव किया जा सके।
वर्जन-
-लगातार मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर का उपयोग नहीं करना चाहिए, बीच-बीच में ब्रेक लेना चाहिए। इस ब्रेक की अवधि में गर्दन, कंधों के हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। वहीं, ब्रेक से आंखों को भी राहत मिलती है।
-डॉ. अमित वार्ष्णेय, सीएमओ