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Budaun News: संभल कर चलें रात में... सड़कों पर छुट्टा पशुओं का राज
Fri, 08 Sep 2023 01:53 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Fri, 08 Sep 2023 01:53 AM IST
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उझानी में कृषि विज्ञान केंद्र के सामने सड़क पर छुट्टा पशुओं का झुंड। संवाद
उझानी (बदायूं)। दिन ढलने के बाद किसी काम से बाइपास या आबादी क्षेत्र के मुख्य मार्गों से होकर आना-पड़े तो जरा संभलकर चलें। रास्ते में कहीं पर भी छुट्टा पशुओं के झुंड में आपको मिल जाएंगे। ये किसी के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं।
छुट्टा पशुओं की चपेट में आने से हादसों की संख्या में इजाफा के बीच कस्बे में इन दोनों कृषि उत्पादन मंडी समिति के आसपास और बरेली-मथुरा हाईवे से जुड़ा बाइपास सबसे ज्यादा प्रभावित है। मंडी और कृषि विज्ञान केंद्र के बीच सड़क पर शाम से ही छुट्टा पशुओं का झुंड निकल पड़ता है। बाइक सवारों का पशुओं के झुंड से बचकर निकलना मुश्किल हो जाता है।
मंडी के पास पिछले दिनों कांवड़ यात्रा के दौरान बदायूं में शिवपुरम निवासी बाइक सवार नरेंद्र कुमार घायल हो गए थे। यही नहीं, बाइपास पर आंबेडकर चौराहे और बरामालदेव गांव के मोड़ के पास सड़क के डिवाइडर को पशुओं के झुंड अपना आरामगाह बना लेते हैं। वाहनों की रोशनी पड़ने पर पशुओं बेतरतीब होकर दौड़ने पर वाहन चपेट में आ जाते हैं। बदायूं रोड नौशेरा के पास भी सड़क पर छुट्टा पशुओं की वजह से हादसे हो चुके हैं।
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400 पशुओं की क्षमता की दो गोशाला, वो भी फुल
श्री कामधेनु गोशाला काफी पुरानी है। गोशाला प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष रतन जिंदल कहते हैं कि गोशाला परिसर की क्षमता 350 पशुओं की है। गल्ला व्यापारियों और जन सहयोग से पशुओं को चारा समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। केयरटेकर भी हैं। इस वक्त क्षमता से अधिक पशु हैं। नगर पालिका परिषद प्रशासन की देखरेख वाली सरकारी गोशाला में करीब 40 पशु हैं। पालिका की गोशाला की क्षमता 33 पशुओं की है। देहात क्षेत्र में भी गोशालाएं हैं, लेकिन देहात में छुट्टा पशुओं को खदेड़े जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कछला, मलिकपुर, ननाखेड़ा और अचौरा में छुट्टा पशुओं से फसलों को नुकसान को लेकर पिछले साल हंगामा भी हो चुका है।
कस्बे में छुट्टा पशुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। कुछ पशुपालक तो खासकर गायों के दूध नहीं देने की स्थिति में उन्हें छोड़ देते हैं। इससे दिक्कत ज्यादा हो रही है। - हरीश कुमार त्यागी, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका परिषद
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छुट्टा पशुओं की चपेट में आने से हादसों की संख्या में इजाफा के बीच कस्बे में इन दोनों कृषि उत्पादन मंडी समिति के आसपास और बरेली-मथुरा हाईवे से जुड़ा बाइपास सबसे ज्यादा प्रभावित है। मंडी और कृषि विज्ञान केंद्र के बीच सड़क पर शाम से ही छुट्टा पशुओं का झुंड निकल पड़ता है। बाइक सवारों का पशुओं के झुंड से बचकर निकलना मुश्किल हो जाता है।
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मंडी के पास पिछले दिनों कांवड़ यात्रा के दौरान बदायूं में शिवपुरम निवासी बाइक सवार नरेंद्र कुमार घायल हो गए थे। यही नहीं, बाइपास पर आंबेडकर चौराहे और बरामालदेव गांव के मोड़ के पास सड़क के डिवाइडर को पशुओं के झुंड अपना आरामगाह बना लेते हैं। वाहनों की रोशनी पड़ने पर पशुओं बेतरतीब होकर दौड़ने पर वाहन चपेट में आ जाते हैं। बदायूं रोड नौशेरा के पास भी सड़क पर छुट्टा पशुओं की वजह से हादसे हो चुके हैं।
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400 पशुओं की क्षमता की दो गोशाला, वो भी फुल
श्री कामधेनु गोशाला काफी पुरानी है। गोशाला प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष रतन जिंदल कहते हैं कि गोशाला परिसर की क्षमता 350 पशुओं की है। गल्ला व्यापारियों और जन सहयोग से पशुओं को चारा समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। केयरटेकर भी हैं। इस वक्त क्षमता से अधिक पशु हैं। नगर पालिका परिषद प्रशासन की देखरेख वाली सरकारी गोशाला में करीब 40 पशु हैं। पालिका की गोशाला की क्षमता 33 पशुओं की है। देहात क्षेत्र में भी गोशालाएं हैं, लेकिन देहात में छुट्टा पशुओं को खदेड़े जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कछला, मलिकपुर, ननाखेड़ा और अचौरा में छुट्टा पशुओं से फसलों को नुकसान को लेकर पिछले साल हंगामा भी हो चुका है।
कस्बे में छुट्टा पशुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। कुछ पशुपालक तो खासकर गायों के दूध नहीं देने की स्थिति में उन्हें छोड़ देते हैं। इससे दिक्कत ज्यादा हो रही है। - हरीश कुमार त्यागी, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका परिषद