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वेदराम हत्याकांड : दोषी को आजीवन कारावास
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बदायूं। हत्या के छह साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सुनीत चन्द्रा ने आरोपी को दोषी करार दिया है। उन्होंने आजीवन कारावास के साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
उघैती थाना क्षेत्र के गांव हमूपुर निवासी सर्वेश पत्नी धर्म पाल ने पुलिस को 10 जनवरी 2018 को तहरीर दी थी। आरोप था कि 9 जनवरी 2018 की रात में करीब 9:00 बजे उसके ददिया ससुर वेदराम पुत्र हरदयाल ट्रैक्टर के पास बरामदे में सो रहे थे। ट्रैक्टर की लाइट जल रही थी। तभी पुरानी रंजिश को लेकर गांव के ही सत्यवीर पुत्र होरीलाल, जितेंद्र पुत्र राजवीर, नेम कुमार पुत्र प्रकाश, हरपाल पुत्र तोताराम, सचिन पुत्र सतीश चंद्र निवासी शिकारपुर थाना सहसवान हाथों में अवैध असलहा लेकर आ गए।
सोते समय ददिया ससुर वेदराम को सत्यवीर ने राइफल से गोली मार दी। फायर की आवाज पर उसने टार्च जलाकर देखा तो सत्यवीर के हाथ में राइफल और नेमचंद व जितेंद्र, हरपाल पर तमंचे थे, वहीं सचिन पर धारदार हथियार था। जैसे ही उसने शोर मचाया तो पड़ोस के रामवीर, हरेश दौड़कर आए और टॉर्च की रोशनी में सभी लोगों को भागते हुए देखा। गोली वेदराम के सीधे कान पर लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसकी विवेचना निरीक्षक राकेश सिंह ने की।
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विवेचना के दौरान जितेंद्र, नेम कुमार, हरपाल और सचिन की नामजदगी झूठी पाई गई। विवेचक ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए हत्या के आरोप में सत्यवीर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। तब से मामला न्यायालय में लंबित था। न्यायाधीश ने एडीजीसी संजीव कुमार गुप्ता व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद सजा सुनाई है।
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उघैती थाना क्षेत्र के गांव हमूपुर निवासी सर्वेश पत्नी धर्म पाल ने पुलिस को 10 जनवरी 2018 को तहरीर दी थी। आरोप था कि 9 जनवरी 2018 की रात में करीब 9:00 बजे उसके ददिया ससुर वेदराम पुत्र हरदयाल ट्रैक्टर के पास बरामदे में सो रहे थे। ट्रैक्टर की लाइट जल रही थी। तभी पुरानी रंजिश को लेकर गांव के ही सत्यवीर पुत्र होरीलाल, जितेंद्र पुत्र राजवीर, नेम कुमार पुत्र प्रकाश, हरपाल पुत्र तोताराम, सचिन पुत्र सतीश चंद्र निवासी शिकारपुर थाना सहसवान हाथों में अवैध असलहा लेकर आ गए।
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सोते समय ददिया ससुर वेदराम को सत्यवीर ने राइफल से गोली मार दी। फायर की आवाज पर उसने टार्च जलाकर देखा तो सत्यवीर के हाथ में राइफल और नेमचंद व जितेंद्र, हरपाल पर तमंचे थे, वहीं सचिन पर धारदार हथियार था। जैसे ही उसने शोर मचाया तो पड़ोस के रामवीर, हरेश दौड़कर आए और टॉर्च की रोशनी में सभी लोगों को भागते हुए देखा। गोली वेदराम के सीधे कान पर लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसकी विवेचना निरीक्षक राकेश सिंह ने की।
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विवेचना के दौरान जितेंद्र, नेम कुमार, हरपाल और सचिन की नामजदगी झूठी पाई गई। विवेचक ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए हत्या के आरोप में सत्यवीर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। तब से मामला न्यायालय में लंबित था। न्यायाधीश ने एडीजीसी संजीव कुमार गुप्ता व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद सजा सुनाई है।