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उसहैत में बुखार का कहर, दो लोग और मरे
बदायूं, ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2016 11:53 PM IST
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गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
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कोनका नगला में तीसरी मौत, चेतराम नगला में भी एक मरा
एक सप्ताह में तीन मौतों के बाद भी नहीं चेता सेहत विभाग
इलाके में बुखार से मौत का सिलसिला थमने आ नाम नहीं ले रहा। एक सप्ताह में बुखार से चार लोगों की मौत के बाद भी सेहत महकमा नहीं जागा है। गुरुवार को भी कोनका नगला और चेतराम नगला में दो लोगों की बुखार से मौत हो गई। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की टीम रस्म अदायगी के लिए गांव पहुंची।
कोनका नगला निवासी जगदीश चंद्र की पत्नी हर प्यारी, जुड़वां बेटे गौरव (5), सौरभ (5) और ब्रजमोहन की चार दिन पहले बुखार से हालत बिगड़ गई थी। सभी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां गौरव की मौत हो गई। बुधवार को गौरव के बाबा केवलराम (65) ने भी बुखार से दम तोड़ दिया। गुरुवार को केवलराम के रिश्तेदार गांव के ही बुधपाल (62) की मौत हो गई। बुधवार को भी कई दिनों से बुखार आ रहा था। वह गांव में ही इलाज करा रहे थे। इधर, पड़ोसी गांव चेतराम नगला में भी बुखार ने दस्तक दे दी है। यहां गुरुवार को रामस्वरूप (66) ने बुखार के चलते दम तोड़ दिया। इस बुखार को लेकर गांव के लोगों में खौफ है।
गुरुवार को डॉ. कैलाश के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक टीम रस्म अदायगी के लिए कोनका नगला पहुंची। टीम का दावा है कि गांव में 21 महिलाओं का टीकाकरण किया गया। इसके साथ करीब 60 लोगों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बुखार और खांसी की दवाएं दी गई हैं। एमओआईसी डॉ. सीपी आर्या का कहना है कि गांव में रोज टीम जा रही है। संक्रामक रोग जैसी कोई स्थिति नहीं है।
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गंदगी से बिगड़ रहे हालात
उसहैत। गांव कोनका नगला समेत आस-पास के गांवों में भयंकर गंदगी व्याप्त है। तमाम स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है। इससे संक्रामक रोग फैल रहे हैं। बता दें कि पिछले साल अलापुर थाने के गांव उपरैला में संक्रामक रोगों ने 100 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी।
एक सप्ताह में तीन मौतों के बाद भी नहीं चेता सेहत विभाग
इलाके में बुखार से मौत का सिलसिला थमने आ नाम नहीं ले रहा। एक सप्ताह में बुखार से चार लोगों की मौत के बाद भी सेहत महकमा नहीं जागा है। गुरुवार को भी कोनका नगला और चेतराम नगला में दो लोगों की बुखार से मौत हो गई। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की टीम रस्म अदायगी के लिए गांव पहुंची।
कोनका नगला निवासी जगदीश चंद्र की पत्नी हर प्यारी, जुड़वां बेटे गौरव (5), सौरभ (5) और ब्रजमोहन की चार दिन पहले बुखार से हालत बिगड़ गई थी। सभी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां गौरव की मौत हो गई। बुधवार को गौरव के बाबा केवलराम (65) ने भी बुखार से दम तोड़ दिया। गुरुवार को केवलराम के रिश्तेदार गांव के ही बुधपाल (62) की मौत हो गई। बुधवार को भी कई दिनों से बुखार आ रहा था। वह गांव में ही इलाज करा रहे थे। इधर, पड़ोसी गांव चेतराम नगला में भी बुखार ने दस्तक दे दी है। यहां गुरुवार को रामस्वरूप (66) ने बुखार के चलते दम तोड़ दिया। इस बुखार को लेकर गांव के लोगों में खौफ है।
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गुरुवार को डॉ. कैलाश के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक टीम रस्म अदायगी के लिए कोनका नगला पहुंची। टीम का दावा है कि गांव में 21 महिलाओं का टीकाकरण किया गया। इसके साथ करीब 60 लोगों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बुखार और खांसी की दवाएं दी गई हैं। एमओआईसी डॉ. सीपी आर्या का कहना है कि गांव में रोज टीम जा रही है। संक्रामक रोग जैसी कोई स्थिति नहीं है।
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गंदगी से बिगड़ रहे हालात
उसहैत। गांव कोनका नगला समेत आस-पास के गांवों में भयंकर गंदगी व्याप्त है। तमाम स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है। इससे संक्रामक रोग फैल रहे हैं। बता दें कि पिछले साल अलापुर थाने के गांव उपरैला में संक्रामक रोगों ने 100 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी।