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फौजी पिता का सुझाव माना... 46 छात्रों संग यूक्रेन से निकला दानिश
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सादिक (दानिश के पिता)
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। रिटायर्ड फौजी सादिक ने यूक्रेन में फंसे अपने बेटे दानिश को मोबाइल पर जो सुझाव दिया, दानिश उसे आजमाकर सकुशल यूक्रेन से निकल आया, बल्कि अपने 46 साथियों को भी निकाल लाया। परिवार अब उसके घर लौटने का इंतजार कर रहा है।
भारतीय सेना से 2017 में अवकाश प्राप्त सादिक की लगातार 12 साल तक जम्मू-कश्मीर में तैनाती रही। सादिक का बेटा दानिश यूक्रेन की खारकीव स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस का छात्र है। रूसी सेना ने यूक्रेन के बड़े शहर खारकीव पर हमले तेज किए तो सादिक को बेटे की सलामती की चिंता सताने लगी।
सोमवार को उन्होंने दानिश को फोन पर कुछ सुझाव दिए। बताया कि युद्ध के बीच कैसे निकला जा सकता है। कई दिन से बंकर में शरण लिए दानिश ने अपने भारतीय साथियों से अपने पिता के सुझावों को साझा किया।
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सादिक ने दानिश से कहा था कि जब दो देशों के बीच युद्ध होता है, तो सुबह और शाम का वक्त आम नागरिकों के निकलने के लिए सुरक्षित रहता है। सुबह और शाम के वक्त सेनाएं आगे की तैयारी करने के साथ अन्य दिनचर्या के कामों को भी पूरा करती हैं। ऐसे में इस समय बमबारी भी कम होती है। पिता के कहने पर दानिश ने 46 अन्य भारतीय छात्रों का ग्रुप बनाया और मंगलवार शाम इस ग्रुप का नेतृत्व करते हुए खारकीव के बंकर से रेलवे स्टेशन के लिए निकला। करीब 10 किमी का सफर तय करके यह लोग शाम सात बजे स्टेशन पहुुंच गए। यहां ट्रेन भी मिल गई।
दानिश के साथ 46 अन्य भारतीय छात्र भी युद्धग्रस्त खारकीव से सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गए। बृहस्पतिवार को सादिक ने अमर उजाला से बात की तो बताया कि उन्होंने जब बेटे को सुझाव दिया था तो मन में सोच लिया था कि दानिश फौजी का बेटा है वह उनके सुझाव का पूरी तरह अनुपालन करेगा। बृहस्पतिवार को जब दानिश ने पिता को बताया कि वह 46 अन्य छात्रों के साथ यूक्रेन से निकल कर रोमानिया पहुंच गया था तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। संवाद
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भारतीय सेना से 2017 में अवकाश प्राप्त सादिक की लगातार 12 साल तक जम्मू-कश्मीर में तैनाती रही। सादिक का बेटा दानिश यूक्रेन की खारकीव स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस का छात्र है। रूसी सेना ने यूक्रेन के बड़े शहर खारकीव पर हमले तेज किए तो सादिक को बेटे की सलामती की चिंता सताने लगी।
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सोमवार को उन्होंने दानिश को फोन पर कुछ सुझाव दिए। बताया कि युद्ध के बीच कैसे निकला जा सकता है। कई दिन से बंकर में शरण लिए दानिश ने अपने भारतीय साथियों से अपने पिता के सुझावों को साझा किया।
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सादिक ने दानिश से कहा था कि जब दो देशों के बीच युद्ध होता है, तो सुबह और शाम का वक्त आम नागरिकों के निकलने के लिए सुरक्षित रहता है। सुबह और शाम के वक्त सेनाएं आगे की तैयारी करने के साथ अन्य दिनचर्या के कामों को भी पूरा करती हैं। ऐसे में इस समय बमबारी भी कम होती है। पिता के कहने पर दानिश ने 46 अन्य भारतीय छात्रों का ग्रुप बनाया और मंगलवार शाम इस ग्रुप का नेतृत्व करते हुए खारकीव के बंकर से रेलवे स्टेशन के लिए निकला। करीब 10 किमी का सफर तय करके यह लोग शाम सात बजे स्टेशन पहुुंच गए। यहां ट्रेन भी मिल गई।
दानिश के साथ 46 अन्य भारतीय छात्र भी युद्धग्रस्त खारकीव से सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गए। बृहस्पतिवार को सादिक ने अमर उजाला से बात की तो बताया कि उन्होंने जब बेटे को सुझाव दिया था तो मन में सोच लिया था कि दानिश फौजी का बेटा है वह उनके सुझाव का पूरी तरह अनुपालन करेगा। बृहस्पतिवार को जब दानिश ने पिता को बताया कि वह 46 अन्य छात्रों के साथ यूक्रेन से निकल कर रोमानिया पहुंच गया था तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। संवाद