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अटूट बंधन: दो बहनों ने लिवर देकर बचाई भाई की जान, राखी बांधकर दिया रक्षा का वचन

Mon, 23 Aug 2021 06:59 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Mon, 23 Aug 2021 06:59 PM IST
सार

बदायूं के जवाहरपुरी निवासी व बिल्सी के नन्नूमल जैन इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य राजेश गुप्ता के परिवार में इस बार रक्षाबंधन बेहद खास है। 

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Two sisters saved brother life by donate liver pledged to protect by tying rakhi on Rakshabandhan 
दो बहनों ने लिवर देकर बचाई भाई की जान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर के जवाहरपुरी निवासी प्रधानाचार्य राजेश गुप्ता के परिवार में इस बार रक्षाबंधन बेहद खास है। राजेश गुप्ता के 14 साल के बेटे अक्षत उर्फ कृष्णा को नया जीवन मिला है। उनका लिवर डैमेज हो गया था। दिल्ली के मेदांता अस्पताल में पिछले महीने अक्षत की दोनों बहनों नेहा और प्रेरणा ने अपने लिवर का हिस्सा भाई को दे दिया।

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एक बहन के लिवर का दायां और दूसरे के लिवर का बांया हिस्सा जोड़कर अक्षत का नया लिवर बनाया गया और 18 घंटे चले ऑपरेशन में सफलता से उसे ट्रांसप्लांट कर दिया गया। दिल्ली से कुछ दिन पहले ही घर आए अक्षत और दोनों बहनें स्वस्थ हैं। बहनों ने राखी बांधकर अक्षत को ही उनकी रक्षा का वचन दिया है।
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शहर निवासी राजेश कुमार गुप्ता बिल्सी के नन्हूमल जैन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हैं। कुछ महीनों से बेहद तनाव से जूझ रहा उनका परिवार आज खुशहाल है। राजेश गुप्ता बताते हैं कि 14 साल का पुत्र अक्षत दसवीं का छात्र है। कुछ महीने पहले उसे एक दिन अचानक पेट में थोड़ा सा दर्द उठा। शहर से बरेली तक दिखाया पर न तो फायदा हुआ और न ही असल वजह समझ आ सकी। किसी की सलाह पर दिल्ली के मेदांता अस्पताल गए तो जांच में पता लगा कि अक्षत का लीवर पूरी तरह से डैमेज हो चुका है, ट्रांसप्लांट के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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शुरू में तय हुआ कि किसी के लीवर का पार्ट मिलने से काम चल सकता है पर बाद में पता लगा कि अक्षत का वजन ज्यादा है और कम से कम दो लोगों के लीवर से ही ट्रांसप्लांट प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। परिवार में अचानक आई परेशानी से सभी लोग परेशान थे। अक्षत से बड़ी तीन बहनें हैं। इनमें से छोटी बहन प्रेरणा ने भाई को अपना लीवर देने की इच्छा जताई। दो डोनर की बात हुई तो इटली में पढ़ाई कर रही बड़ी बहन नेहा भी अपना लीवर डोनेट करने को तैयार हो गईं। वह फ्लाइट पकड़कर भारत आ गईं।

12 जुलाई को करीब 18 घंटे तक अक्षत का ऑपरेशन चला। दोनों बहनों नेहा और प्रेरणा को सात दिन तक अस्पताल में रहना पड़ा। करीब 21 दिन बाद अक्षत अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ तो बिल्कुल ठीक होकर घर आ गया। इस बार परिवार में रक्षाबंधन का त्योहार काफी हंसी खुशी के बीच गुजरा। अक्षत की समझ नहीं आ रहा था कि वह बहनों को क्या गिफ्ट दे, जबकि वह दोनों अपने लिवर का हिस्सा देकर उसकी जान बचा चुकी हैं। तब बहनों ने ही कहा कि उन्हें उससे कुछ नहीं चाहिए। वह चाहती हैं कि उनका प्यारा भाई हमेशा स्वस्थ और खुश रहे। उसे जब जरूरत पड़े तो वह उसकी रक्षा को खड़ी होंगी।

गुप्ता बोले: बेटियों ने कायम की मिसाल
प्रधानाचार्य पिता राजेश गुप्ता का कहना है कि वह अपनी तीन बेटियों को भी बेटे से कम नहीं मानते। उन्हें अच्छी शिक्षा दे रहे हैं ताकि वह खुद पैरों पर खड़ी होकर समाज को कुछ दे सकें। हालांकि इस घटनाक्रम के बाद उनके पास बेटियों के लिए शब्द नहीं बचे हैं। उन्होंने जो काम किया है जो एक मिसाल है। कुछ दिन पहले उनके बेटे और बेटियां अस्पताल में बेड पर पड़े थे। उन पर और पत्नी पर क्या बीत रही थी, बता नहीं सकते पर अब वह बेहद खुश हैं। इस रक्षाबंधन पर वह कामना करते हैं कि सभी परिवारों में भाई बहन का प्यार ऐसे ही बना रहे और वह एकदूसरे के सुखदुख में काम आएं।

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