कछला घाट पर हादसा: कलश विसर्जन के दौरान गंगा में डूबने से दो बच्चों की मौत, चार की गोताखोरों ने बचाई जान
उझानी में कछला घाट पर रविवार को हादसा हो गया। कलश विसर्जन के दौरान छह बच्चे गंगा में बह गए। बच्ची समेत दो की मौत हो गई। चार को गोताखोरों ने बचा लिया। हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया।
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बदायूं के उझानी में कछला घाट पर रविवार को कलश विसर्जन के दौरान दो किशोरी और तीन किशोर गंगा नदी में बह गए। चीख पुकार के बाद जुटे गोताखोरों ने चार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन दो की डूबकर मौत हो गई। उनकी मौत से परिवारों में कोहराम मच गया। दोनों के परिजनों ने शवों का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। हादसा रविवार सुबह करीब 11 बजे हुआ।
हाथरस के हसायन थाना क्षेत्र के गांव रति का नगला में ग्रामीणों ने श्रीमद भागवत कथा कराई थी। कथा के बाद कलश विसर्जन को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से कछला गंगा घाट पर आए। परिवार के बच्चों की मौजूदगी में महिलाओं समेत लोगों ने कलश विसर्जन शुरू किया। उसी दौरान डुबकी लगाते समय प्रियांशु (16) पुत्र वीरपाल सिंह बहने लगा।
गोताखोरों ने बचाई चार की जान
बच्चों को लगा कि प्रियांशु तैर रहा है। उसे देख शिवानी (12) पुत्री मोहन लाल, पूनम (13) पुत्री ब्रजेश, विकास (15) पुत्र वकील और पवन (16) पुत्र पीतांबर भी आगे बढ़ गए। पांचों बहने लगे तो उनके परिजनों ने मदद के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर गोताखोर फजले, गोविंद और जीतू मौके पर पहुंच गए। गोताखोरों ने पवन, पूनम और विकास को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
मृतक प्रियांशु और शिवानी के फाइल फोटो
काफी देर बाद गोताखोरों को प्रियांशु मिला। उस वक्त प्रियांशु की सांसें चल रही थीं। परिजन इलाज के लिए उसे लेकर कासगंज को चले गए, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। शिवानी का शव करीब डेढ़ बजे मिला। कछला चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार ने बताया कि तेज बहाव की वजह से शिवानी करीब आधा किलोमीटर दूर तक बहता चला गया था। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई से भी इनकार कर दिया था। दोनों के शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया।
कछला में पक्के घाट की दरकार
उझानी के कछला घाट पर पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्व ही नहीं, बल्कि प्रत्येक रविवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। अव्यवस्थित घाट और जलस्तर में गहराई वाले स्थानों पर पुख्ता संकेतक न होने से श्रद्धालु नहाते नहाते गहरे पानी में चले जाते हैं। पक्के घाट बन जाने से श्रद्धालुओं की जान पर जोखिम काफी कम हो जाएगा।
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दशहरा के अलावा पूर्णिमा वाले दिन तो कछला घाट श्रद्धालुओं की संख्या काफी नजर आती है। बताते हैं कि गंगाघाट पर श्रद्धालुओं के अनुरूप व्यवस्था नहीं की जाती। नगर पंचायत के कुछेक कर्मचारी और चौकी के पुलिस कर्मी ही घाट पर नजर आते हैं। गोताखोर आसपास इलाके के हैं। उन्हीं के रहमोकरम हादसों के दौरान कुद हद तक श्रद्धालुओं को बचाने में सफलता प्राप्त कर ली जाती है।