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बदायूं के श्रवण कुमार: बेटों ने मां को कांवड़ में बैठाकर कराई चारधाम यात्रा, एक साल पैदल चले, अयोध्या भी गए

Mon, 03 Mar 2025 01:08 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 03 Mar 2025 01:08 PM IST
सार

बदायूं जिले में दो भाइयों ने अपनी मां को कांवड़ में बैठाकर 18 फरवरी 2024 में पैदल यात्रा शुरू की थी। उन्होंने एक साल में अपनी मां को चारधाम के दर्शन कराए। इसके अलावा हरिद्वार, अयोध्या और खाटूश्याम भी पैदल ही पहुंचे। 

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two brothers made their mother sit in Kanvar and did the Char Dham Yatra like Shravan Kumar
कांवड़ में मां को बैठाकर जाते दोनों भाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदायूं के बिसौली के नूरपुर गांव निवासी तेजपाल और धीरज दोनों भाई कलयुग में उन लोगों के लिए नजीर हैं जो बुढ़ापे में मां-बाप को उनके हाल में छोड़ देते हैं या फिर वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं। ये दोनों भाई एक साल 12 दिन पहले अपनी मां को कांवड़ में बैठाकर चारधाम यात्रा को निकले। न सिर्फ चारधाम यात्रा बल्कि हरिद्वार, नीलकंठ, अयोध्या, खाटूश्याम तक कांवड़ में बैठाकर पैदल गए और दर्शन कराए। दोनों भाई अब घर लौट रहे हैं। अभी घर पहुंचने में उन्हें तीन-चार दिन और लग जाएंगे।

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बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव नूरपुर निवासी तेजपाल और धीरज 18 फरवरी 2024 को श्रवण कुमार बनकर अपनी मां राजेश्वरी को कांवड में बैठाकर चारधाम यात्रा कराने निकले थे। दोनों भाइयों ने मां को पहले चारधाम की यात्रा कराई। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा कराई। इस दौरान दोनों भाइयों ने मां को हरिद्वार के मनसा देवी, नीलकंठ, वीरभद्र, सुरकंडा माता मंदिर समेत वहां के कई तीर्थस्थान के दर्शन कराए। 
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अयोध्या में रामलला के दर्शन कराए 
दोनों भाइयों की पदयात्रा यहीं नहीं रूकी। इसके बाद वह मां को लेकर अयोध्या रामलला के दर्शन कराने पहुंचे। इस बीच दोनों भाइयों का हौसला बढ़ता गया। उन्होंने पदयात्रा को नहीं थमने दिया। वह मां को लेकर हरियाणा के चुलकाना धाम पहुंचे। यहां खाटू श्याम के दर्शन कराए। इसके बाद उनकी यात्रा राजस्थान पहुंची। जहां गोगामेड़ी और खाटूश्याम के मां को दर्शन कराए। पैदल इतने लंबे सफर को तय करने में दोनों भाइयों कोएक साल का समय लग गया। इसके बाद अब दोनों भाई मां को कांवड़ में ही बैठाकर वापस घर आ रहे हैं। 
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एक साल 12 दिन बाद शनिवार को दोनों भाई जिले की सीमा में पहुंचे। यहां लोगों ने कांवड़ में बैठी मां को कंधे पर ले जा रहे दोनों बेटों को देखा तो उनका सत्कार किया। मुजरिया चौराहे पर रहने वाले सुमित साहू उन्हें चाय नाश्ता कराया। वहीं, उनके पिता रामौतार ने फल खिलाए।

माता-पिता की करनी चाहिए सेवा
तेजपाल और धीरज का कहना है कि मां को कांवड़ में बैठाकर चारधाम की यात्रा कराने के पीछे उनका उद्देश्य सिर्फ इतना है कि वह समाज को संदेश देना चाहते हैं कि बुजुर्ग मां-बाप बोझ नहीं होते, उनकी मरते दम तक सेवा करनी चाहिए। उन्हें वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ना चाहिए। लोग उनसे प्रेरित हो, इस उद्देश्य से उन्होंने पदयात्रा शुरू की थी। 

दोनों भाइयों ने बताया कि वह करीब 20 साल पहले हिमाचल प्रदेश की तहसील बद्दी के मंधाला गांव में रहते थे। जब वह छोटे थे। तब उनके पिता भगवान दास का बीमारी के कारण निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां बिसौली के गांव नूरपुर ले आई। यहां मां ने उनकी बड़े ही लाड़ प्यार से परवरिश की। तेजपाल ने बताया कि उनकी एक बहन पार्वती भी है। उसने भी उन्हें इस यात्रा के लिए प्रेरित किया था। उनकी मां राजेश्वरी ने बताया कि वह खुशकिस्मत है कि उनके श्रवण कुमार जैसे दोनों बेटे मिले हैं।

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