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Budaun News: 1978 में हुई मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिस कर्मियों को दी श्रद्धांजलि
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शहीदों को सलामी देते पुलिस कर्मी व मौजूद ग्रामीण व अधिकारी। संवाद
कादरचौक। 47 साल पहले मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए सीओ समेत तीन पुलिस कर्मियों के शहीद स्मारक पर शुक्रवार को एसपी सिटी विजयेंद्र द्विवेदी व सीओ उझानी डॉ. देवेंद्र कुमार ने पुष्पचक्र अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर परिजनों की आंखें नम हो गईं।
डाकुओं के साथ सन 1978 में हुई 24 घंटे की मुठभेड़ में गंगा की तराई में शहीद हुए सीओ रामेंद्र पांडेय, हेड कांस्टेबल मोहन लाल गौतम और कांस्टेबल रामदास की शहादत को ग्रामीण हर वर्ष नौ जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं। शुक्रवार को तीनों की शहादत में शहीद स्मारक पर पुलिस के अधिकारी पहुंचे।
शहीद स्मारक पर गार्द ने परेड कर सलामी दी। एसपी सिटी ने कहा कि हम पुलिस वालों को उन जवानों की शहादत हमेशा कर्तव्य के प्रति याद दिलाती है। गांव के लोगों को भी प्रशंसनीय योगदान के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने पुलिस के जवानों की शहादत को अपना परिवार मानकर शहीदों के सम्मान में स्थल का निर्माण कराया।
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इस दौरान कादरचौक एसओ विक्रम सिंह, चौकी इंचार्ज संजीव कुमार के अलावा इलाके के लोग मौजूद थे। संचालन सतीश शर्मा ने किया। इस अवसर पर गणेश शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र राजपूत, परमजीत राजपूत प्रधान, राजू कश्यप व महेंद्र सिंह पूर्व प्रधान आदि रहे।
1978 में काछी गिरोह से हुई थी पुलिस की मुठभेड़
नौ जनवरी 1978 की बात है। सोमवती अमावस्या के दिन गंगा किनारे लगे मेला में दस्यु सरगना भगवान दास काछी गिरोह को एटा जिले के तत्कालीन सीओ रामेंद्र नारायण पांडेय खदेड़कर ला रहे थे। गिरोह के डाकू गंगा में कूद गए, फिर भी उन्होंने पीछा नहीं छोड़ा। 24 घंटे चली मुठभेड़ में बदायूं पुलिस के जवान रामदास और मोहनलाल गौतम के शहीद होने के बाद सीओ रामेंद्र नारायण पांडेय ने गन्ने के खेत में घुसकर डाकू को गोली मार दी। खेत में घायल पड़े डाकू ने सीओ के सीने में गोली मार दी। बावजूद इसके उन्होंने डाकू को मार डाला। गांव भदरौल के लोगों ने चंदा कर शहीद स्मारक बनवाया। स्मारक के नाम गांव की भूमि भी दान की गई। हर वर्ष नौ जनवरी को स्मारक पर मेला के आयोजन होता है।
शहीद रामदास की बेटी ने किया नमन
कादरचौक। शहीद रामदास मूलरूप से बरेली के बल्लिया गांव के रहने वाले थे। शादी के कुछ समय बाद ही वह शहीद हो गए थे। उस समय पत्नी गर्भ से थी। कुछ महीने बाद उनकी पत्नी के एक बेटी को जन्म दिया। बेटी नीलम मां के साथ शहीद स्मारक पर आती रही। अब मां बीमार और बूढ़ी हो चुकी हैं तो अब वह पति विपिन के साथ लखीमपुर से प्रति वर्ष यहां आती है। बेटी नीलम को शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। वहीं मोहनलाल गौतम, मथुरा के रहने वाले थे। सीओ आरएन पांडेय कानपुर के रहने वाले थे।
कासगंज पुलिस को नहीं आती अपने शहीदों की याद
कादरचौक। उन दिनों एटा और बदायूं जिले की कटरी में भगवान सिंह कांछी गिरोह का आतंक था। गिरोह का पीछा करते हुए कासगंज के पुलिस उपाधीक्षक आरएन पांडेय, उनके हमराह हेड कांस्टेबल मोहनलाल गौतम और रामदास भदरौल की कटरी तक आ गए थे। जहां स्मारक बना है, उसी के पास गिरोह से मुठभेड़ के दौरान सीओ समेत तीन पुलिसकर्मियों ने हिम्मत का परिचय दिया, लेकिन वह खुद की जान नहीं बचा सके। बावजूद इसके कासगंज पुलिस शहीद पुलिस कर्मियों की शहादत को भुला चुकी है। यही वजह है कि स्मारक पर शहीद सीओ समेत मोहनलाल के परिजन भी नहीं पहुंचते। बताते हैं कि शहीद सीओ पांडेय का बेटा अनिल पांडेय भी पुलिस में ही था। बाद में वह भी पिता की तरह जांबाजी का परिचय देते हुए कानपुर में शहीद हो गया था।
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डाकुओं के साथ सन 1978 में हुई 24 घंटे की मुठभेड़ में गंगा की तराई में शहीद हुए सीओ रामेंद्र पांडेय, हेड कांस्टेबल मोहन लाल गौतम और कांस्टेबल रामदास की शहादत को ग्रामीण हर वर्ष नौ जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं। शुक्रवार को तीनों की शहादत में शहीद स्मारक पर पुलिस के अधिकारी पहुंचे।
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शहीद स्मारक पर गार्द ने परेड कर सलामी दी। एसपी सिटी ने कहा कि हम पुलिस वालों को उन जवानों की शहादत हमेशा कर्तव्य के प्रति याद दिलाती है। गांव के लोगों को भी प्रशंसनीय योगदान के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने पुलिस के जवानों की शहादत को अपना परिवार मानकर शहीदों के सम्मान में स्थल का निर्माण कराया।
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इस दौरान कादरचौक एसओ विक्रम सिंह, चौकी इंचार्ज संजीव कुमार के अलावा इलाके के लोग मौजूद थे। संचालन सतीश शर्मा ने किया। इस अवसर पर गणेश शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र राजपूत, परमजीत राजपूत प्रधान, राजू कश्यप व महेंद्र सिंह पूर्व प्रधान आदि रहे।
1978 में काछी गिरोह से हुई थी पुलिस की मुठभेड़
नौ जनवरी 1978 की बात है। सोमवती अमावस्या के दिन गंगा किनारे लगे मेला में दस्यु सरगना भगवान दास काछी गिरोह को एटा जिले के तत्कालीन सीओ रामेंद्र नारायण पांडेय खदेड़कर ला रहे थे। गिरोह के डाकू गंगा में कूद गए, फिर भी उन्होंने पीछा नहीं छोड़ा। 24 घंटे चली मुठभेड़ में बदायूं पुलिस के जवान रामदास और मोहनलाल गौतम के शहीद होने के बाद सीओ रामेंद्र नारायण पांडेय ने गन्ने के खेत में घुसकर डाकू को गोली मार दी। खेत में घायल पड़े डाकू ने सीओ के सीने में गोली मार दी। बावजूद इसके उन्होंने डाकू को मार डाला। गांव भदरौल के लोगों ने चंदा कर शहीद स्मारक बनवाया। स्मारक के नाम गांव की भूमि भी दान की गई। हर वर्ष नौ जनवरी को स्मारक पर मेला के आयोजन होता है।
शहीद रामदास की बेटी ने किया नमन
कादरचौक। शहीद रामदास मूलरूप से बरेली के बल्लिया गांव के रहने वाले थे। शादी के कुछ समय बाद ही वह शहीद हो गए थे। उस समय पत्नी गर्भ से थी। कुछ महीने बाद उनकी पत्नी के एक बेटी को जन्म दिया। बेटी नीलम मां के साथ शहीद स्मारक पर आती रही। अब मां बीमार और बूढ़ी हो चुकी हैं तो अब वह पति विपिन के साथ लखीमपुर से प्रति वर्ष यहां आती है। बेटी नीलम को शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। वहीं मोहनलाल गौतम, मथुरा के रहने वाले थे। सीओ आरएन पांडेय कानपुर के रहने वाले थे।
कासगंज पुलिस को नहीं आती अपने शहीदों की याद
कादरचौक। उन दिनों एटा और बदायूं जिले की कटरी में भगवान सिंह कांछी गिरोह का आतंक था। गिरोह का पीछा करते हुए कासगंज के पुलिस उपाधीक्षक आरएन पांडेय, उनके हमराह हेड कांस्टेबल मोहनलाल गौतम और रामदास भदरौल की कटरी तक आ गए थे। जहां स्मारक बना है, उसी के पास गिरोह से मुठभेड़ के दौरान सीओ समेत तीन पुलिसकर्मियों ने हिम्मत का परिचय दिया, लेकिन वह खुद की जान नहीं बचा सके। बावजूद इसके कासगंज पुलिस शहीद पुलिस कर्मियों की शहादत को भुला चुकी है। यही वजह है कि स्मारक पर शहीद सीओ समेत मोहनलाल के परिजन भी नहीं पहुंचते। बताते हैं कि शहीद सीओ पांडेय का बेटा अनिल पांडेय भी पुलिस में ही था। बाद में वह भी पिता की तरह जांबाजी का परिचय देते हुए कानपुर में शहीद हो गया था।

शहीदों को सलामी देते पुलिस कर्मी व मौजूद ग्रामीण व अधिकारी। संवाद

शहीदों को सलामी देते पुलिस कर्मी व मौजूद ग्रामीण व अधिकारी। संवाद