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Budaun News: परिवहन निगम की लाचारी... खटारा बसें यात्रियों पर पड़ रहीं भारी
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रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी बसें। संवाद
बदायूं। वर्कशॉप में समय से काम न होने के कारण बदायूं डिपो की बसों के हालत खराब है। डिपो की 50 बसें 10 साल की उम्र पूरी कर चुकी हैं। इन बसों से डिपो की कमाई भी प्रभावित हो रही है और यात्रियों को परेशानी भी हो रही है।
बदायूं डिपो के बेड़े में निगम की 143 और अनुबंधित 38 बसें हैं। निगम की 143 में से 50 बसें ऐसी हैं जो 10 वर्ष से ज्यादा पुरानी हैं। इनके दिल्ली में प्रवेश पर पाबंदी है। 45 बसें ऐसी हैं जो नीलामी की लाइन में हैं। अब तक 13 बसों की ही नीलामी हो सकी है। शेष बसों में से भी करीब 20 की स्थिति अच्छी नहीं है। कई नई बसें भी इंजन और पंप की खराबी के कारण दौड़ने में हांफती हैं। इनमें ऐसी बसें भी शामिल हैं जो प्रतिदिन 25 हजार रुपये तक की कमाई करती हैं। कई बार तो डिपो की बसें रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। वर्कशॉप में 15 बसें खड़ी हैं, जिनकी मरम्मत होनी है। इस कारण फर्रुखाबाद, कासगंज, दातागंज, चंदौसी रूटों पर यात्रियों को समस्या होती है।
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यात्री बोले- घंटों करना पड़ता है इंतजार
इन दिनों गर्मी का कहर है। ऐसे में यात्रियों का दबाव कम है। कई रूटों पर बसों की कमी के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना होता है। सबसे ज्यादा समस्या फर्रुखाबाद रोड पर है। फर्रुखाबाद के राजकुमार ने बताया कि दो घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं। कलान निवासी मनोज का कहना है कि बरेली के लिए हर 30 मिनट में बस मिलने का अधिकारी दावा करते हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। बदायूं से बरेली जा रहे आवास विकास के वीरेश का कहना है कि एक घंटे से उनको बस नहीं मिली। एटा जिले के अमापुर निवासी राजू का कहना है कि उनके रूट पर बस कभी समय से नहीं चलतीं।
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एक महीने से खराब खड़ी हैं बसें
शासन का आदेश है कि खराबी के कारण 21 दिनों के बाद बस खड़ी नहीं रहनी चाहिए लेकिन यहां तो एक महीने से कई बसें मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। इससे यात्रियों को परेशान हो रही हैं।
कोट,
- कल ही यहां आया हूं। कुछ बसें मरम्मत के लिए खड़ी हैं। ठेकेदार से इनको जल्द मरम्मत करने को कहा है। 13 बसें अब तक नीलाम हो चुकी हैं। शेष खटारा बसों को आदेश के बाद नीलाम कराया जाएगा। - प्रदीप कुमार, प्रभारी एआरएम
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बदायूं डिपो के बेड़े में निगम की 143 और अनुबंधित 38 बसें हैं। निगम की 143 में से 50 बसें ऐसी हैं जो 10 वर्ष से ज्यादा पुरानी हैं। इनके दिल्ली में प्रवेश पर पाबंदी है। 45 बसें ऐसी हैं जो नीलामी की लाइन में हैं। अब तक 13 बसों की ही नीलामी हो सकी है। शेष बसों में से भी करीब 20 की स्थिति अच्छी नहीं है। कई नई बसें भी इंजन और पंप की खराबी के कारण दौड़ने में हांफती हैं। इनमें ऐसी बसें भी शामिल हैं जो प्रतिदिन 25 हजार रुपये तक की कमाई करती हैं। कई बार तो डिपो की बसें रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। वर्कशॉप में 15 बसें खड़ी हैं, जिनकी मरम्मत होनी है। इस कारण फर्रुखाबाद, कासगंज, दातागंज, चंदौसी रूटों पर यात्रियों को समस्या होती है।
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यात्री बोले- घंटों करना पड़ता है इंतजार
इन दिनों गर्मी का कहर है। ऐसे में यात्रियों का दबाव कम है। कई रूटों पर बसों की कमी के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना होता है। सबसे ज्यादा समस्या फर्रुखाबाद रोड पर है। फर्रुखाबाद के राजकुमार ने बताया कि दो घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं। कलान निवासी मनोज का कहना है कि बरेली के लिए हर 30 मिनट में बस मिलने का अधिकारी दावा करते हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। बदायूं से बरेली जा रहे आवास विकास के वीरेश का कहना है कि एक घंटे से उनको बस नहीं मिली। एटा जिले के अमापुर निवासी राजू का कहना है कि उनके रूट पर बस कभी समय से नहीं चलतीं।
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एक महीने से खराब खड़ी हैं बसें
शासन का आदेश है कि खराबी के कारण 21 दिनों के बाद बस खड़ी नहीं रहनी चाहिए लेकिन यहां तो एक महीने से कई बसें मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। इससे यात्रियों को परेशान हो रही हैं।
कोट,
- कल ही यहां आया हूं। कुछ बसें मरम्मत के लिए खड़ी हैं। ठेकेदार से इनको जल्द मरम्मत करने को कहा है। 13 बसें अब तक नीलाम हो चुकी हैं। शेष खटारा बसों को आदेश के बाद नीलाम कराया जाएगा। - प्रदीप कुमार, प्रभारी एआरएम