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Budaun News: छेड़खानी के दोषी काे तीन साल की कैद
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बदायूं। छेड़खानी के आरोपी को पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश दिनेश तिवारी ने दोषी करार देते हुए उसे तीन साल की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। धनराशि पीड़ित परिवार को देने का आदेश भी दिया है।
जरीफनगर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 26 मई 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसकी नाबालिग बेटी घर की छत पर सो रही थी। मोहल्ले के ही एक बालक ने छत पर पहुंचकर किशोरी के साथ छेड़खानी की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार किया और किशोर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया।
विवेचना निरीक्षक अवधेश कुमार ने शुरू की। 28 मई को किशोरी ने शर्म की वजह से पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद आत्महत्या को उकसाने की धारा में बढ़ोतरी की गई। विवेचक ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। तब से मामला कोर्ट में चल रहा था।
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मंगलवार को न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने बाल अपचारी को छेड़खानी के मामले में तीन साल की सजा सुनाई है, जबकि आत्महत्या को उकसाने के मामले में उसको दोष मुक्त किया गया है।
गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी को सात साल की कैद
- दस हजार रुपये का लगाया जुर्माना, आठ साल बाद आया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। आठ साल पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपी को अपर सत्र न्यायालय कक्ष संख्या दस के न्यायाधीश सौरभ सक्सेना ने दोषी करार दिया है। दोषी को सात साल कैद के साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
बिनावर थाना क्षेत्र के गांव चंदौरा निवासी सत्यवीर ने बताया कि वह मजदूरी करने अलीगढ़ गया था। उसका भाई कालीचरन घर पर रहकर खेती संभाल रहा था। कालीचरण के बच्चे व पत्नी दिल्ली में मजदूरी करने गई थी। 24 नवंबर 2017 को गांव निवासी महावीर पुत्र रामसहाय पूर्वाह्न 11:00 बजे भाई कालीचरन के पास घर आया। किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा होने लगा।
शोर सुनकर गांव के ही किसवर, महेश, नाथूलाल व हरदयाल ने कालीचरण को बचाया। महावीर की पिटाई से भाई को गंभीर चोट आई। देखते ही देखते उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
इसके बाद विवेचना उपनिरीक्षक संजय राम ने शुरू की। विवेचक ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। तब से मामला न्यायालय में चल रहा था।
मंगलवार को न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। अपर शासकीय अधिवक्ता सुधीर कुमार मिश्रा व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद महावीर को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई है।
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जरीफनगर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 26 मई 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसकी नाबालिग बेटी घर की छत पर सो रही थी। मोहल्ले के ही एक बालक ने छत पर पहुंचकर किशोरी के साथ छेड़खानी की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार किया और किशोर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया।
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विवेचना निरीक्षक अवधेश कुमार ने शुरू की। 28 मई को किशोरी ने शर्म की वजह से पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद आत्महत्या को उकसाने की धारा में बढ़ोतरी की गई। विवेचक ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। तब से मामला कोर्ट में चल रहा था।
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मंगलवार को न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने बाल अपचारी को छेड़खानी के मामले में तीन साल की सजा सुनाई है, जबकि आत्महत्या को उकसाने के मामले में उसको दोष मुक्त किया गया है।
गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी को सात साल की कैद
- दस हजार रुपये का लगाया जुर्माना, आठ साल बाद आया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। आठ साल पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपी को अपर सत्र न्यायालय कक्ष संख्या दस के न्यायाधीश सौरभ सक्सेना ने दोषी करार दिया है। दोषी को सात साल कैद के साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
बिनावर थाना क्षेत्र के गांव चंदौरा निवासी सत्यवीर ने बताया कि वह मजदूरी करने अलीगढ़ गया था। उसका भाई कालीचरन घर पर रहकर खेती संभाल रहा था। कालीचरण के बच्चे व पत्नी दिल्ली में मजदूरी करने गई थी। 24 नवंबर 2017 को गांव निवासी महावीर पुत्र रामसहाय पूर्वाह्न 11:00 बजे भाई कालीचरन के पास घर आया। किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा होने लगा।
शोर सुनकर गांव के ही किसवर, महेश, नाथूलाल व हरदयाल ने कालीचरण को बचाया। महावीर की पिटाई से भाई को गंभीर चोट आई। देखते ही देखते उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
इसके बाद विवेचना उपनिरीक्षक संजय राम ने शुरू की। विवेचक ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। तब से मामला न्यायालय में चल रहा था।
मंगलवार को न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। अपर शासकीय अधिवक्ता सुधीर कुमार मिश्रा व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद महावीर को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई है।