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Budaun News: महिला अस्पताल के एसएनसीयू में जुड़वा समेत चार नवजातों की मौत, वेंटीलेटर के अभाव से गई जान

Sat, 07 Jun 2025 05:05 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 07 Jun 2025 05:05 PM IST
सार

बदायूं के महिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू में वेंटीलेटर नहीं है, जिससे नवजातों के इलाज में बाधा आ रही है। शनिवार को चार नवजातों की मौत हो गई। इनमें दो जुड़वा बच्चे थे। 

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three newborns died in the SNCU of the women hospital in Budaun
महिला अस्पताल, बदायूं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदायूं के महिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में वेंटीलेटर न होने से शनिवार को चार नवजात बच्चों की मौत हो गई। यहां इलाज की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाने से आठ से दस बच्चों को हर रोज अलीगढ़ व सैफई के लिए रेफर किया जा रहा है।

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दातागंज के मोहल्ला परा निवासी धर्मपाल ने पत्नी प्रेमलता को पांच जून के लिए महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। देर शाम उसने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का वजन 780 ग्राम था। बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। दूसरे दिन छह जून को डॉक्टर ने वेंटीलेटर की आवश्यकता बताकर बच्चे को रेफर करने की बात परिजनों से कही, लेकिन परिजन रेफर कराने को तैयार नहीं हुए। शनिवार सुबह बच्चे की मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। वहां मौजूद स्टाफ के भी हाथ पांव फूल गए। वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने बच्चे को परिजनों को सौंपकर घर भेज दिया।
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जुड़वा बच्चों ने तोड़ा दम 
कस्बा समरेर निवासी विपिन ने अपनी पत्नी रेनू चार जून को महिला अस्पताल में भर्ती कराया। उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। पांच जून को दोनों बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती करा दिया। दोनों बच्चों का वजन कम था। दोनों को वेंटीलेटर की आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल में न तो वेंटीलेटर है और न ही सीपैप की व्यवस्था है। शनिवार सुबह दोनों नवजातों की मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने स्टाफ पर इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाकर हंगामा किया। वहां तैनात सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत किया। बच्चों के शव परिजनों को सौंप कर घर भेज दिया।
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दोपहर में बच्ची की मौत
कादरचौक थाना व कस्बा के रहने वाले इंत्याज ने अपनी पत्नी तरन्नुम को तीन जून को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। चार जून को उसको सात माह की बच्ची पैदा हुई। पांच जून को उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया। डॉक्टर ने रेफर कर दिया, लेकिन परिवार के लोग उसको नहीं ले गए। शनिवार को दोपहर करीब दो बजे बच्ची की मौत हो गई। परिजन बच्ची को लेकर घर चले गए।

 

महिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू में ऐसे नवजात भर्ती किए जाते हैं जो नौ महीने से कम अवधि में पैदा हुए हैं या फिर वजन औसत से कम है। हर रोज ऐसे 10 से 15 बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। अधिकांश बच्चों को वेंटिलेटर की जरूरत रहती है, लेकिन यहां वेंटीलेटर के अभाव में नवजात दम तोड़ दे रहे हैं।

तीन-तीन घंटे वार्मर का करना पड़ता है इंतजार
महिला अस्पताल में 12 वार्मरों की क्षमता है, लेकिन यहां 17 से 18 नवजात हर समय भर्ती रहते हैं। नवजात को भर्ती कराने में तीन-तीन घंटे इंतजार करना पड़ता है। आरोप यह भी लगते आ रहे हैं कि कर्मचारी अवैध रूप से रुपये वसूलकर वार्मर जल्दी दे देते हैं। जो रुपये नहीं दे पाते हैं, टरका दिया जाता है। शनिवार को 14 बच्चे भर्ती थे। शहर के एक मोहल्ले से महिला बच्चे को भर्ती कराने यहां पहुंची तो वार्मर खाली नहीं था। महिला ने बच्चे को गोद में लेकर तीन घंटे तक इलाज कराया। हालत ठीक न होने पर परिजन बच्चे को निजी अस्पताल लेकर चले गए।

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सीएमएस बोलीं- वजन बहुत कम था
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा ने बताया कि एसएनसीयू में जिन नवजातों की मौत हुई है उनको वजन बहुत कम था। डॉक्टरों ने प्रयास किया लेकिन बच्चों की जान बच सकी। वेंटीलेटर की सुविधा नहीं हैं। डॉक्टर रेफर करने को कहते हैं तो परिजन कहीं ले जाने को तैयार नहीं होते। शासन को कई बार पत्राचार किया है लेकिन वेंटीलेटर नहीं लग सके हैं। 

डीएम अवनीश कुमार राय ने बताया कि एसएनसीयू में चार बच्चों की मौत की शिकायत मिली थी। इस पर अधिकारियों से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि सभी प्रीमेच्योर थे। इलाज के लिए उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया था, लेकिन परिवार के लोग नहीं ले गए। वेंटीलेटर की कमी के बारे में जानकारी नहीं है। इसे भी दिखवाया जाएगा।

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