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Budaun News: इसी साल के अंत तक तैयार होंगे तीन आयुर्वेदिक अस्पताल, लोगों को मिलेगी सुविधा
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जरीफनगर का निर्माणाधीन अस्पताल। संवाद
बदायूं। जिले में तीन आयुर्वेद अस्पताल का निर्माण अंतिम चरण में है। इस साल के अंत तक लोगों को इन अस्पतालों में सुविधा मिलनी शुरू हो सकती है। ऐसे में मरीजों को दूर जाने की जरूरत कम पड़ेगी।
सतैती गांव में आयुर्वेद अस्पताल का ओपीडी, दवा वितरण कक्ष, लैब, वार्ड के अलावा शौचालय का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मौजूदा समय में बिजली संबंधी काम चल रहा है। इसी तरह जरीफनगर में भी भवन का काम पूरा हो चुका है। यहां पर पुताई का काम चल रहा है। यही हाल कुंवरगांव का है। इन तीनों जगहों पर अभी आयुर्वेद का अस्पताल न होने की वजह से लोगों को कई किमी दूर जाना पड़ता है। इससे लोगों को समय लगता है। गांव में अस्पताल खुल जाने से ग्रामीणों को राहत मिलेगी। आयुर्वेद विभाग के अधिकारियों के अनुसार इसी साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा। हर भवन का निर्माण 40 लाख रुपये से कराया जा रहा है। तीनों अस्पताल चार-चार बेड के होंगे।
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यह स्टाफ होगा तैनात
आयुर्वेद डॉक्टर, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन, वार्ड ब्वॉय।
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घुटनों में दर्द के लिए दी जाएगी थेरेपी
तीनों अस्पतालों में घुटने के लिए दर्द के लिए थेरेपी दी जाएगी। इससे मरीजों को दर्द में राहत मिलेगी। ज्यादा गंभीर होने की स्थिति में भर्ती भी किया जाएगा।
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50 बेड अस्पताल के लिए नहीं मिल रही जगह
शासन की ओर से 50 बेड का अस्पताल बनाने के लिए साल भर पहले प्रस्ताव आया था। क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी ने जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन से पत्राचार किया, लेकिन अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। इस वजह से अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।
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तीनों अस्पतालों का भवन लगभग पूरा हो चुका है। बिजली व अन्य काम किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि इसी साल के अंत तक तीनों अस्पतालों का संचालन होगा। - योगेंद्र सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी
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सतैती गांव में आयुर्वेद अस्पताल का ओपीडी, दवा वितरण कक्ष, लैब, वार्ड के अलावा शौचालय का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मौजूदा समय में बिजली संबंधी काम चल रहा है। इसी तरह जरीफनगर में भी भवन का काम पूरा हो चुका है। यहां पर पुताई का काम चल रहा है। यही हाल कुंवरगांव का है। इन तीनों जगहों पर अभी आयुर्वेद का अस्पताल न होने की वजह से लोगों को कई किमी दूर जाना पड़ता है। इससे लोगों को समय लगता है। गांव में अस्पताल खुल जाने से ग्रामीणों को राहत मिलेगी। आयुर्वेद विभाग के अधिकारियों के अनुसार इसी साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा। हर भवन का निर्माण 40 लाख रुपये से कराया जा रहा है। तीनों अस्पताल चार-चार बेड के होंगे।
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यह स्टाफ होगा तैनात
आयुर्वेद डॉक्टर, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन, वार्ड ब्वॉय।
घुटनों में दर्द के लिए दी जाएगी थेरेपी
तीनों अस्पतालों में घुटने के लिए दर्द के लिए थेरेपी दी जाएगी। इससे मरीजों को दर्द में राहत मिलेगी। ज्यादा गंभीर होने की स्थिति में भर्ती भी किया जाएगा।
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50 बेड अस्पताल के लिए नहीं मिल रही जगह
शासन की ओर से 50 बेड का अस्पताल बनाने के लिए साल भर पहले प्रस्ताव आया था। क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी ने जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन से पत्राचार किया, लेकिन अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। इस वजह से अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।
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तीनों अस्पतालों का भवन लगभग पूरा हो चुका है। बिजली व अन्य काम किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि इसी साल के अंत तक तीनों अस्पतालों का संचालन होगा। - योगेंद्र सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी