Budaun: आत्महत्या प्रकरण में तीन आरोपी दोषमुक्त, झूठे साक्ष्य देने पर मृतका के मां-बाप और भाई पर दर्ज होगा वाद
बदायूं में कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में मृतका के पति, सास और देवर को दोषमुक्त किया। कोर्ट ने झूठे साक्ष्य देने के आरोप में मृतका के पिता, मां और भाई पर वाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
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बदायूं के अपर सत्र न्यायाधीश ऋषि कुमार की कोर्ट ने महिला की मौत होने के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने और उत्पीड़न करने के केस में सुनवाई करते हुए मृतका के पति वीरेंद्र, सास विद्या और देवर भूरे को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने जानबूझकर झूठे साक्ष्य देने के आरोप में मृतका के मां-बाप और भाई के विरुद्ध वाद दर्ज कर समन जारी करने का आदेश दिया है।
थाना बिल्सी के ग्राम सिरसौल पट्टी सीताराम निवासी विचित्र पाल ने 26 नवंबर 2024 को थाना उझानी में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि 12 वर्ष पहले पुत्री रिंकी का विवाह वीरेंद्र निवासी ग्राम रनऊ, थाना उझानी के साथ किया था। शादी के कई वर्ष बाद भी रिंकी के कोई संतान नहीं हुई, जिसके कारण ससुरालीजन उसके साथ मारपीट और उत्पीड़न किया करते थे।
24 नवंबर 2024 की रात आठ बजे रिंकी ने फोन कर बताया था कि उसका पति वीरेंद्र, सास, देवर उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। रात में उसकी हत्या भी कर सकते हैं। 25 नवंबर की सुबह 6:30 बजे उसके पुत्र गौतम के मोबाइल पर वीरेंद्र ने फोन कर सूचना दी कि रिंकी की मौत हो गई है।
सूचना पर वह रिंकी की ससुराल पहुंचे तो वहां पर कोई नहीं मिला। मालूम हुआ कि रिंकी को बदायूं में जिला अस्पताल लेकर गए हैं। वह अस्पताल पहुंचे तो वहां रिंकी का शव मिला। रिपोर्ट में कहा गया था कि आरोपियों के उत्पीड़न से परेशान होकर रिंकी आत्महत्या करने के लिए विवश हो गई।
पुलिस ने रिंकी के पति वीरेंद्र सहित अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित अन्य आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस ने विवेचना कर कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। आरोपपत्र के मुताबिक, रिंकी के पिता विचित्र पाल, मां शांति देवी और भाई गौतम ने अपने बयान में कहा था कि रिंकी की मौत की सूचना मिलने पर जब वह ससुराल पहुंचे तो वहां रिंकी को मृत अवस्था में देखा। रिंकी के पति वीरेंद्र सहित अन्य ससुरालीजन वहां उपस्थित मिले।
रिश्तेदारों के कहने पर दर्ज कराई थी रिपोर्ट
इन लोगों ने बताया कि रिंकी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। रिंकी को कोई संतान नहीं थी। इस कारण वह मानसिक रूप से अवसाद में रहती थी। रिंकी की मृत्यु या फंदा लगाने की घटना में ससुराल पक्ष का कोई हाथ नहीं था। रिश्तेदारों और ग्रामीणों के कहने पर रिंकी के पति वीरेंद्र और अन्य ससुराल वालों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। रिंकी ने कभी यह नहीं बताया था कि ससुराल वाले दहेज मांगते थे। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना।
कोर्ट ने दिया ये आदेश
कोर्ट ने कहा कि साक्षियों ने पूर्व बयान से भिन्न एवं अभियोजन के प्रतिकूल साक्ष्य दिए हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि साक्षियों ने जानबूझकर झूठे साक्ष्य दिए। इस पर कोर्ट ने आरोपी वीरेंद्र, विद्या और भूरे को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही कोर्ट ने वादी मुकदमा रिंकी के पिता विचित्र पाल, मां शांति देवी और भाई गौतम के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 379 के अंतर्गत अलग से वाद दर्ज करने और साक्षीगणों के विरुद्ध हाजिरी के लिए समन जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अलग की गई पत्रावली को 29 जुलाई को पेश करने का भी आदेश दिया है।