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Budaun News: रैक प्वाइंट पर रखे यूरिया के हजारों बोरे बारिश में भीगे
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उझानी रैक प्वाइंट पर बारिश में भीगे यूरिया के बोरे। स्रोत: जागरुक नागरिक
उझानी। सहकारी समितियों के लिए आई इफ्को यूरिया की रैक के हजारों बोरे शनिवार रात बारिश भीग गए। ठेकेदार समेत मजदूर बोरों की ढांग के ऊपर तिरपाल भी नहीं डाल पाए। बोरे भीग जाने से गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। वहीं एआर कोऑपरेटिव ने बोरों के न भीगने का दावा किया है।
रेलवे के रैक प्वाइंट पर इफ्को यूरिया की रैक शनिवार सुबह करीब छह बजे आई थी। ठेकेदार ने मजदूरों के जरिये रैक प्वाइंट पर बोगियों को अनलोड करा लिया। यूरिया के बोरों को सहकारी समितियों को शाम तक आवंटित किया जाता रहा। चूंकि, सभी समितियों तक देर रात तक यूरिया नहीं पहुंच पाई, इसलिए बोगियों को अनलोड कर पैक प्वाइंट पर ही ढांग लगा दी गई। आधी रात के बाद तेज बारिश और आंधी के दौरान ढांग में लगे यूरिया के हजारों बोरे भीग गए। जानकारों ने बताया कि 50 हजार से अधिक बोरे भीग गए हैं, जबकि रैक में कुल 75 हजार ही बोरे आए थे।
बोरे भीग जाने से यूरिया की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बोरे भीग जाने से नाइट्रोजन की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
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इस संबंध में एआर कोऑपरेटिव ब्रजेश सिंह परिहार ने बताया कि रेलवे के रैक प्वाइंट पर यूरिया के जो बोरे समितियों तक नहीं पहुंच पाए थे, उनके ऊपर ठेकेदार ने तिरपाल डलवा दिया था। उन्होंने यूरिया के बोरे भीगने से इन्कार किया है। इसके विपरीत रेलवे के वाणिज्य अधीक्षक ने बताया कि रैक प्वाइंट को 12 घंटे के दौरान खाली किया जाना होता है। ठेकेदार ऐसा नहीं कर पाया। उससे जुर्माना भी वसूल किया जाएगा।
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रेलवे के रैक प्वाइंट पर इफ्को यूरिया की रैक शनिवार सुबह करीब छह बजे आई थी। ठेकेदार ने मजदूरों के जरिये रैक प्वाइंट पर बोगियों को अनलोड करा लिया। यूरिया के बोरों को सहकारी समितियों को शाम तक आवंटित किया जाता रहा। चूंकि, सभी समितियों तक देर रात तक यूरिया नहीं पहुंच पाई, इसलिए बोगियों को अनलोड कर पैक प्वाइंट पर ही ढांग लगा दी गई। आधी रात के बाद तेज बारिश और आंधी के दौरान ढांग में लगे यूरिया के हजारों बोरे भीग गए। जानकारों ने बताया कि 50 हजार से अधिक बोरे भीग गए हैं, जबकि रैक में कुल 75 हजार ही बोरे आए थे।
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बोरे भीग जाने से यूरिया की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बोरे भीग जाने से नाइट्रोजन की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
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इस संबंध में एआर कोऑपरेटिव ब्रजेश सिंह परिहार ने बताया कि रेलवे के रैक प्वाइंट पर यूरिया के जो बोरे समितियों तक नहीं पहुंच पाए थे, उनके ऊपर ठेकेदार ने तिरपाल डलवा दिया था। उन्होंने यूरिया के बोरे भीगने से इन्कार किया है। इसके विपरीत रेलवे के वाणिज्य अधीक्षक ने बताया कि रैक प्वाइंट को 12 घंटे के दौरान खाली किया जाना होता है। ठेकेदार ऐसा नहीं कर पाया। उससे जुर्माना भी वसूल किया जाएगा।