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Budaun News: क्षय रोगियों को पांच दिन की दवा देकर बहला रहे जिम्मेदार

Tue, 31 Dec 2024 12:55 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Tue, 31 Dec 2024 12:55 AM IST
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Those responsible are trying to console the tuberculosis patients by giving them medicine for five days.
रूबीना। - फोटो : mathura
बदायूं। जिला अस्पताल में संचालित क्षय रोग अस्पताल में दवाओं का स्टॉक पूरा नहीं हो पा रहा है। जिले में सात हजार से अधिक मरीज उपचाररत हैं। बावजूद इसके दवा लेने आने वाले मरीजों को पांच दिन की ही दवा मिल पा रही है। नियमत: मरीज को 15 दिन से एक महीने की एक बार में दवा देने का प्रावधान है।
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क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन अभियान के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। दवाओं की कमी इसमें बाधा बन रही है। करीब चार महीने से टीबी रोगियों के लिए दवा की आपूर्ति भरपूर मात्रा में नहीं हुई है। जिला अस्पताल समेत जिले की सभी 17 सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग का दवा भंडार खाली होने के कगार पर है। फिलहाल, मरीजों को 15 दिन के बजाय चार से पांच दिन की खुराक देकर काम चलाया जा रहा है। यही नहीं, आपूर्ति न होने की स्थिति में डॉक्टर रोगियों के इलाज से हाथ खड़े कर रहे हैं। इससे दवा चक्र टूटने का खतरा बढ़ गया है। दवा लेने को हर रोज लंबी लाइन लग रही है।
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बीमारी पकड़ में आने पर मरीज को खानी होती है छह माह दवा
प्रारंभिक चरण में टीबी की बीमारी पकड़ में आने पर न्यूनतम छह माह तक निरंतर मरीज को दवा खिलाई जाती है। जिला अस्पताल 15 दिन से एक महीने तक की दवा की खुराक देकर ऐसे रोगियों पर निगरानी रखता है। वहीं, टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जिला स्तरीय टीम इन रोगियों को उनके घर पर ही दवाओं की सुविधा प्रदान करती है। इसके अलावा रोग से लड़ने के लिए मरीज को जागरूक किया जाता है। विडंबना यह है कि इस रोग से लड़ने में सबसे कारगर हथियार दवा ही आजकल उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
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मरीजों का कहना है कि बमुश्किल चार से पांच दिन की दवा दी जा रही है। यदि मरीज कहीं बाहर जाने की बात कहता है तो मजबूरी में उसे एक-दो दिन की दवा बढ़ाकर दे दी जाती है। अस्पतालों में यदि दवाओं की आपूर्ति में देरी हुई तो मरीज का दवा चक्र टूट सकता है। समस्या यह है कि किसी मरीज का दवा चक्र टूटता है तो उसे फिर नए सिरे से दवा खानी होती है।



मरीज बोले- महीने में छह से सात बार दवा लेने अस्पताल आना मजबूरी

शुरूआत के एक महीने तो दवा 15 से 20 दिन की मिली, लेकिन करीब चार महीने से हालत खराब है। महीने में छह से सात बार दवा लेने के लिए अस्पताल आना पड़ रहा है। ऐसे में डर लगा रहता है कि दवा टूटी तो दिक्कत हो जाएगी। यही वजह है कि दवा लेने के लिए पांच-पांच घंटे इंतजार करते हैं। - रूबीना बेगम, मोहल्ल सोथा शहर


करीब दो महीने से टीबी की दवा चल रही है। शुक्रवार तक की दवा थी तो दवा लेने अस्पताल आए हैं। दो घंटे हो गए, अब तक डॉक्टर को दिखाकर दवा नहीं मिल सकी है। दवा लेने वालों की लंबी भीड़ है। दवा खिड़की पर पहुंची तो तीन दिन की दवा दी गई है। कई बार तो दवा नहीं मिली तो बाहर मेडिकल से दवा ली, ताकि दवा का चक्र टूटने न पाए। -सोनकली, ललुआ नगला



शासन स्तर से दवा की आपूर्ति की जा रही है। मरीजों की संख्या सात हजार से अधिक है। ऐसे में जितनी आपूर्ति आ रही है उसमें संभव नहीं हो पा रहा है कि 15 या उससे अधिक दिनों की दवा मरीज को दी जा सके। जैसे ही आपूर्ति ठीक से मिलने लगेगी तो मरीजों को एक महीने तक की दवा दी जा सकेगी। - डॉ. विनेश कुमार, क्षयरोग अधिकारी

रूबीना।

रूबीना।- फोटो : mathura

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