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Budaun News: अचानक गंगा का जलस्तर बढ़ा, पालेज की फसल डूबी
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गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से डूबी फसल। संवाद
बदायूं। कछला के पास गंगा नदी के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि ने तटवर्ती किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। पिछले 24 घंटे में तेजी से बढ़े जलस्तर के कारण हुसैनपुर खेड़ा से लेकर नानाखेड़ा तक सैकड़ों बीघा में तैयार पालेज की फसल जलमग्न हो गई, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
बता दें कि गंगा किनारे बड़े पैमाने पर तरबूज, खरबूज, खीरा, लौकी, कद्दू और ककड़ी की खेती की जाती है। इस बार भी किसानों ने कर्ज लेकर पालेज की बोवाई की थी। कई किसानों की फसल पूरी तरह तैयार थी और दो-चार दिन में मंडी भेजने की तैयारी थी। अचानक बढ़े जलस्तर ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
कछला निवासी किसान मंजू ने बताया कि उन्होंने करीब 10 बीघा में पालेज की थी। खीरा और लौकी की फसल पूरी तरह तैयार थी, लेकिन जलभराव के कारण सब नष्ट हो गया। वहीं पिपरौल निवासी वीरेंद्र और राकेश ने बताया कि उन्होंने 20-25 बीघा में उधार लेकर खेती की थी, जो पूरी तरह डूब गई।
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खाजुरारा निवासी मोहन, सतीश, जसवीर और कृष्णपाल ने बताया कि उनकी लगभग 50 बीघा फसल जलमग्न हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि 24 घंटे के भीतर पानी कम हो जाता है तो कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल पूरी फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी है। किसानों ने बताया कि हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ता है, लेकिन तब तक फसल कट चुकी होती है। इस बार करीब दो महीने पहले ही जलस्तर बढ़ने से भारी नुकसान हुआ है।
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बता दें कि गंगा किनारे बड़े पैमाने पर तरबूज, खरबूज, खीरा, लौकी, कद्दू और ककड़ी की खेती की जाती है। इस बार भी किसानों ने कर्ज लेकर पालेज की बोवाई की थी। कई किसानों की फसल पूरी तरह तैयार थी और दो-चार दिन में मंडी भेजने की तैयारी थी। अचानक बढ़े जलस्तर ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
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कछला निवासी किसान मंजू ने बताया कि उन्होंने करीब 10 बीघा में पालेज की थी। खीरा और लौकी की फसल पूरी तरह तैयार थी, लेकिन जलभराव के कारण सब नष्ट हो गया। वहीं पिपरौल निवासी वीरेंद्र और राकेश ने बताया कि उन्होंने 20-25 बीघा में उधार लेकर खेती की थी, जो पूरी तरह डूब गई।
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खाजुरारा निवासी मोहन, सतीश, जसवीर और कृष्णपाल ने बताया कि उनकी लगभग 50 बीघा फसल जलमग्न हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि 24 घंटे के भीतर पानी कम हो जाता है तो कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल पूरी फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी है। किसानों ने बताया कि हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ता है, लेकिन तब तक फसल कट चुकी होती है। इस बार करीब दो महीने पहले ही जलस्तर बढ़ने से भारी नुकसान हुआ है।