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नए स्वास्थ्य भवनों की खिड़की-दरवाजे गायब, थोपे जा रहे उपले

Sat, 02 Jan 2016 08:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं Updated Sat, 02 Jan 2016 08:32 PM IST
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the situation of newly constructed building of the hospital is worst
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डीएम के औचक निरीक्षण में देखीं नवीन स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली

शनिवार को आयोजित समाधान दिवस के बाद जिलाधिकारी शंभू नाथ और एसएसपी सौमित्र यादव ने बिसौली से बिल्सी रोड पर स्थित ग्राम परौली के नवीन स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2006 में शुरू हुआ और वर्ष 2009 में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद आज तक उसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल सका। यहां बता दें कि परौली चिकित्सालय की चहारदीवारी को तोड़कर ग्रामीण ईंटें तक ले गए और संबंधित अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे।
पहले आते थे डॉक्टर और कर्मचारी, अब नहीं
बदायूं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को बताया कि इस भवन के बनने से पूर्व यहां चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी आते थे, लेकिन नई बिल्डिंग बनने के बाद यहां कोई चिकित्सक नहीं आया। लाखों की रकम बर्बाद हो गई। गांव वाले बताते हैं कि उन्हें जानकारी मिली है कि कागजों में यहां चिकित्सक और स्टाफ की तैनाती है, लेकिन गांव में कई सालों से कोई नहीं आया। प्रधान के पुत्र तहजीब शहंशाह ने बताया कि पहले यह अस्पताल गांव के अंदर एक मकान में किराए पर चलता था। यह भवन वर्ष 2009 में बनकर तैयार हुआ है, तबसे कोई भी नहीं आता है। सीएमओ के अनुसार इस केंद्र पर एक स्टाफ नर्स तैनात थी, जो 31 दिसंबर यानि कल ही रिटायर हुई है।
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जिले में और भी हैं बदहाल चिकित्सालय
बदायूं। गांव के कुछ लोगों ने जिलाधिकारी को बताया कि इसी प्रकार ग्राम दबतोरी, न्यौली हरनाथपुर, रानेट, गोविंदपुर और नूरपुर पिनौनी में निर्मित भवनों की दुर्दशा है। कितनी भूमि में चिकित्सालय और आवासीय भवन बना है, जानने के लिए जिलाधिकारी ने मौके पर राजस्व अभिलेखों और भूमि के नक्शे का भी अवलोकन किया।
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तीन दिन में सीएमओ से मांगी गई रिपोर्ट
बदायूं। जिलाधिकारी शंभूनाथ ने सीएमओ डॉ. आरडी तिवारी को निर्देश दिए हैं कि तीन दिन के अंदर इस प्रकार के सभी भवनों का निरीक्षण कर उस पर व्यय धनराशि और किन कारणों से भवन क्षतिग्रस्त हुआ? इसकी विस्तृत रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराएं, अन्यथा उन्हें (सीएमओ) ही जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई तथा वसूली के लिए शासन को लिखा जाएगा। सीएमओ डॉ. आरडी तिवारी ने बताया कि जिले में 175 डॉक्टर्स की डिमांड है, उपलब्ध मात्र 70 हैं। उनमें भी छह प्रशासनिक अधिकारी हैं। जिले में 43 न्यू पीएचसी, 12 पीएचसी, पांच सीएचसी हैं। ये सब स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं।

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