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Budaun News: साठगांठ के चलते खोली गई थी अवैध नर्सिंग होम की सील
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बदायूं/ उझानी। उझानी में अवैध रूप से चल रहे आशा नर्सिंग होम के दोबारा सील खुलने के मामले में कुछ अफसरों और बाबुओं की भूमिका संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि सब कुछ तय होने के बाद ही अवैध नर्सिंग होम खुलवाया गया था। चूंकि मामला सुर्खियों में आ गया था, इसलिए उसे दोबारा सील करना मजबूरी बन गया।
बताया जा रहा है कि उझानी में बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित प्राइवेट नर्सिंग होम को लेकर शिकायतें दो-तीन महीने से अफसरों तक पहुंच रहीं थीं। अवैध तरीके से चल रहे आशा नर्सिंग होम समेत तीन नर्सिंग होम को एसीएमओ मोहन झा ने पिछले महीने नोटिस दिए थे। नोटिस देने के बाद एसीएमओ ने चुप्पी साध ली।
25 दिसंबर को गर्भवती महिला की मौत का मामला सामने आया तो अगले दिन ही डीएम के आदेश पर आशा नर्सिंग होम सील कर दिया गया। दो-तीन दिन बाद ही सील तोड़ दी गई। इसके पीछे भी विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है। साठगांठ के बाद ही सील खोलकर अस्पताल शुरू किया गया। मामला सुर्खियों में आते ही अधिकारियों पर सवाल खड़े होने लगे तो शुक्रवार को टीम भेजकर फिर उसे सील करा दिया गया।
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महीनों से चल रहा है नोटिस-नोटिस का खेल
उझानी ब्लॉक क्षेत्र में कस्बे के अलावा देहात में भी कई प्राइवेट क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालित हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है। मुजरिया और कछला में पिछले साल कई प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए थे। मुजरिया के प्राइवेट अस्पताल की जांच सहसवान के तत्कालीन चिकित्साधीक्षक ने की थी। हालांकि जांच के बाद क्लीनचिट दे दी गई थी। कस्बे में दो अन्य अवैध नर्सिंग होम को दो बार नोटिस दिया जा चुका है।
बिनावर में भी खोल दिया गया सील अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने उझानी ही नहीं, बल्कि कई और इलाकों में बिना पंजीकरण चल रहे अस्पतालों की ओर से मुंह मोड़ रखा है। बिनावर में भी दो महीने पहले एक नर्सिंग होम सील किया गया था। करीब 15 दिन पूर्व इसे फिर से खोल दिया गया। सभी अधिकारियों को इसकी जानकारी है। सबकुछ जानते हुए भी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उझानी मामले की जांच कराई जा रही है कि किसके कहने पर सील खोली गई थी। हालांकि अब यह पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग की नई टीम देखेगी। -डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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बताया जा रहा है कि उझानी में बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित प्राइवेट नर्सिंग होम को लेकर शिकायतें दो-तीन महीने से अफसरों तक पहुंच रहीं थीं। अवैध तरीके से चल रहे आशा नर्सिंग होम समेत तीन नर्सिंग होम को एसीएमओ मोहन झा ने पिछले महीने नोटिस दिए थे। नोटिस देने के बाद एसीएमओ ने चुप्पी साध ली।
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25 दिसंबर को गर्भवती महिला की मौत का मामला सामने आया तो अगले दिन ही डीएम के आदेश पर आशा नर्सिंग होम सील कर दिया गया। दो-तीन दिन बाद ही सील तोड़ दी गई। इसके पीछे भी विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है। साठगांठ के बाद ही सील खोलकर अस्पताल शुरू किया गया। मामला सुर्खियों में आते ही अधिकारियों पर सवाल खड़े होने लगे तो शुक्रवार को टीम भेजकर फिर उसे सील करा दिया गया।
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महीनों से चल रहा है नोटिस-नोटिस का खेल
उझानी ब्लॉक क्षेत्र में कस्बे के अलावा देहात में भी कई प्राइवेट क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालित हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है। मुजरिया और कछला में पिछले साल कई प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए थे। मुजरिया के प्राइवेट अस्पताल की जांच सहसवान के तत्कालीन चिकित्साधीक्षक ने की थी। हालांकि जांच के बाद क्लीनचिट दे दी गई थी। कस्बे में दो अन्य अवैध नर्सिंग होम को दो बार नोटिस दिया जा चुका है।
बिनावर में भी खोल दिया गया सील अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने उझानी ही नहीं, बल्कि कई और इलाकों में बिना पंजीकरण चल रहे अस्पतालों की ओर से मुंह मोड़ रखा है। बिनावर में भी दो महीने पहले एक नर्सिंग होम सील किया गया था। करीब 15 दिन पूर्व इसे फिर से खोल दिया गया। सभी अधिकारियों को इसकी जानकारी है। सबकुछ जानते हुए भी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उझानी मामले की जांच कराई जा रही है कि किसके कहने पर सील खोली गई थी। हालांकि अब यह पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग की नई टीम देखेगी। -डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ