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Budaun News: छह अर्थियों की यात्रा ने तोड़ा गांव का सन्नाटा
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अल्लापुर चमारी गांव में शव पहुंचने पर प्रेम सिंह के घर के बाहर जुटे लोग। संवाद
बदायूं। उझानी क्षेत्र के गांव अल्लापुर चमारी में मंगलवार को एक साथ छह अर्थियां उठीं तो पूरा गांव गम में डूब गया। कुछ देर के लिए मानों गांव का हर रास्ता श्मशान की ओर जाता दिखाई दे रहा था। अपनों को अंतिम विदाई देने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें नम थीं। कोई पिता की अर्थी को कंधा दे रहा था तो कोई परिवार के दूसरे सदस्य को अंतिम यात्रा पर ले जा रहा था। हर तरफ सिसकियां, विलाप और अपनों को खोने का दर्द था। बड़े मासूमों को संभालने नजर आए।
गांव से मंगलवार सुबह करीब 9 बजे एक-एक कर अर्थियां निकलनी शुरु हुईं। उनके पीछे चल रहीं महिलाओं की चीख-पुकार ने माहौल को और भी भारी कर दिया। अपने प्रियजनों को आखिरी बार देखने के बाद महिलाएं खुद को संभाल नहीं पा रही थीं। उनकी करुण पुकार गांव के सन्नाटे को चीरती हुई दूर तक सुनाई दे रही थी।
अंतिम यात्रा में शामिल लोग एक-दूसरे को ढांढस देने का प्रयास करते रहे, लेकिन छह परिवारों पर एक साथ टूटे इस दुख के आगे हर शब्द छोटा पड़ गया। मृतक प्रेम सिंह के परिवार की एक बेटी अपने पिता की अर्थी देखकर बदहवास हो गई। वह बार-बार पापा कहकर चीखती रही। उसकी आवाज में ऐसा दर्द था कि वहां मौजूद लोग अपनी आंखों के आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे।
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गांव व रिश्तेदार कुछ महिलाएं उसे संभालने का प्रयास करते रहे, लेकिन पिता को खोने का सदमा उसे बार-बार तोड़ रहा था। वह उनकी अर्थी के पीछे-पीछे गांव के बाहर तक आ गई। वहीं, पास ही भगवती के परिवार में भी मातम का मंजर था। उनकी बेटी रोते हुए बार-बार कह रही थी कि मम्मी, अब किसे कहूंगी... उसकी यह पुकार सुनकर आसपास खड़े लोगों का कलेजा भी भर आया। वह खुद आंसुओं में डूबी थी और अपने करीब दो साल के छोटे बच्चे को गोद में लेकर उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी।
अल्लापुर चमारी में उठीं छह अर्थियों ने पूरे गांव को झकझोर दिया। अंतिम यात्रा में शामिल हर शख्स की आंखों में नमी और चेहरे पर गहरी उदासी थी। गांव में एक साथ इतने घरों का उजड़ना सिर्फ उनके परिवारों का दर्द नहीं रहा, बल्कि पूरे गांव ने उस त्रासदी को अपना दुख मानकर महसूस किया। अंतिम संस्कार के बाद भी गांव की गलियों में पसरा सन्नाटा और घरों से आती सिसकियां उस भयावह दिन की कहानी बयां करती रही।
विलाप के बीच मासूमों को गोद में लेकर चुप कराते रहे बड़े
अंतिम यात्रा के दौरान घरों में महिलाओं के विलाप के बीच छोटे बच्चे सहमे हुए दिखाई दिए। उन्हें शायद यह अहसास भी नहीं था कि उनके आसपास इतना बड़ा दुख क्यों पसरा है। कोई बच्चा रोने लगा तो बड़े भाई-बहन उसे गोद में लेकर चुप कराने लगे। परिवार के पुरुष भी मासूमों को अपने सीने से लगाए रहे, ताकि वे इस गमगीन माहौल से कुछ देर दूर रह सकें। कुछ बच्चों को बहलाने के लिए पुरुष उन्हें लेकर अंतिम यात्रा से किनारे खड़े हो गए। अपनों के बिछड़ने के इस दुख में मासूमों की खामोशी और उनकी सहमी निगाहें भी लोगों को भावुक कर रही थी।
पांच चिताएं एक कतार में और छठी कुछ दूरी पर जली
- अंतिम यात्रा में उमड़े रिश्तेदार और ग्रामीण, दसवां संस्कार भी हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी। मंगलवार को कछला गंगा घाट पर एक साथ छह चिताएं जलने का दृश्य बेहद भारी और भावुक कर देने वाला रहा। पांच चिताएं एक कतार में सजाई गई थीं, जबकि छठी चिता उनसे कुछ ही दूरी पर थी। छहों मृतकों का दसवां संस्कार भी मंगलवार को ही घाट पर किया गया।
गांव निवासी संजीव यादव ने बताया कि प्रेम सिंह की चिता को बेटे धीरेंद्र, साधू यादव उर्फ जय सिंह की चिता को बड़े बेटे प्रमोद, मुन्नी देवी की चिता को छोटे बेटे विनोद, भगवती की चिता को बेटे हुकुम सिंह, मूर्ति देवी की चिता को पति थान सिंह और रामेश्वर की चिता को बेटे धर्मपाल ने मुखाग्नि दी।
छह शवों के अंतिम संस्कार की सूचना पर नगर पंचायत ने सुबह ही कछला घाट की सफाई कराकर स्थान तैयार करा दिया था। अंतिम संस्कार के दौरान शेखूपुर के विधायक हिमांशु यादव भी घाट पर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। अंतिम संस्कार के बाद परिजनों ने परंपरा के अनुसार उसी दिन दसवां संस्कार भी कछला घाट पर पूरा किया।
अवनेश के शव का भी कछला घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
उझानी। बागपत हादसे में जान गंवाने वाले सात मृतकों में से अवनेश का शव मंगलवार शाम अल्लापुर चमारी गांव पहुंचा। शव पहुंचते ही गांव का माहौल एक बार फिर गमगीन हो गया। कुछ देर बाद परिजन और ग्रामीण अवनेश के शव को अंतिम संस्कार के लिए कछला गंगा घाट लेकर रवाना हो गए। संवाद
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गांव से मंगलवार सुबह करीब 9 बजे एक-एक कर अर्थियां निकलनी शुरु हुईं। उनके पीछे चल रहीं महिलाओं की चीख-पुकार ने माहौल को और भी भारी कर दिया। अपने प्रियजनों को आखिरी बार देखने के बाद महिलाएं खुद को संभाल नहीं पा रही थीं। उनकी करुण पुकार गांव के सन्नाटे को चीरती हुई दूर तक सुनाई दे रही थी।
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अंतिम यात्रा में शामिल लोग एक-दूसरे को ढांढस देने का प्रयास करते रहे, लेकिन छह परिवारों पर एक साथ टूटे इस दुख के आगे हर शब्द छोटा पड़ गया। मृतक प्रेम सिंह के परिवार की एक बेटी अपने पिता की अर्थी देखकर बदहवास हो गई। वह बार-बार पापा कहकर चीखती रही। उसकी आवाज में ऐसा दर्द था कि वहां मौजूद लोग अपनी आंखों के आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे।
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गांव व रिश्तेदार कुछ महिलाएं उसे संभालने का प्रयास करते रहे, लेकिन पिता को खोने का सदमा उसे बार-बार तोड़ रहा था। वह उनकी अर्थी के पीछे-पीछे गांव के बाहर तक आ गई। वहीं, पास ही भगवती के परिवार में भी मातम का मंजर था। उनकी बेटी रोते हुए बार-बार कह रही थी कि मम्मी, अब किसे कहूंगी... उसकी यह पुकार सुनकर आसपास खड़े लोगों का कलेजा भी भर आया। वह खुद आंसुओं में डूबी थी और अपने करीब दो साल के छोटे बच्चे को गोद में लेकर उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी।
अल्लापुर चमारी में उठीं छह अर्थियों ने पूरे गांव को झकझोर दिया। अंतिम यात्रा में शामिल हर शख्स की आंखों में नमी और चेहरे पर गहरी उदासी थी। गांव में एक साथ इतने घरों का उजड़ना सिर्फ उनके परिवारों का दर्द नहीं रहा, बल्कि पूरे गांव ने उस त्रासदी को अपना दुख मानकर महसूस किया। अंतिम संस्कार के बाद भी गांव की गलियों में पसरा सन्नाटा और घरों से आती सिसकियां उस भयावह दिन की कहानी बयां करती रही।
विलाप के बीच मासूमों को गोद में लेकर चुप कराते रहे बड़े
अंतिम यात्रा के दौरान घरों में महिलाओं के विलाप के बीच छोटे बच्चे सहमे हुए दिखाई दिए। उन्हें शायद यह अहसास भी नहीं था कि उनके आसपास इतना बड़ा दुख क्यों पसरा है। कोई बच्चा रोने लगा तो बड़े भाई-बहन उसे गोद में लेकर चुप कराने लगे। परिवार के पुरुष भी मासूमों को अपने सीने से लगाए रहे, ताकि वे इस गमगीन माहौल से कुछ देर दूर रह सकें। कुछ बच्चों को बहलाने के लिए पुरुष उन्हें लेकर अंतिम यात्रा से किनारे खड़े हो गए। अपनों के बिछड़ने के इस दुख में मासूमों की खामोशी और उनकी सहमी निगाहें भी लोगों को भावुक कर रही थी।
पांच चिताएं एक कतार में और छठी कुछ दूरी पर जली
- अंतिम यात्रा में उमड़े रिश्तेदार और ग्रामीण, दसवां संस्कार भी हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी। मंगलवार को कछला गंगा घाट पर एक साथ छह चिताएं जलने का दृश्य बेहद भारी और भावुक कर देने वाला रहा। पांच चिताएं एक कतार में सजाई गई थीं, जबकि छठी चिता उनसे कुछ ही दूरी पर थी। छहों मृतकों का दसवां संस्कार भी मंगलवार को ही घाट पर किया गया।
गांव निवासी संजीव यादव ने बताया कि प्रेम सिंह की चिता को बेटे धीरेंद्र, साधू यादव उर्फ जय सिंह की चिता को बड़े बेटे प्रमोद, मुन्नी देवी की चिता को छोटे बेटे विनोद, भगवती की चिता को बेटे हुकुम सिंह, मूर्ति देवी की चिता को पति थान सिंह और रामेश्वर की चिता को बेटे धर्मपाल ने मुखाग्नि दी।
छह शवों के अंतिम संस्कार की सूचना पर नगर पंचायत ने सुबह ही कछला घाट की सफाई कराकर स्थान तैयार करा दिया था। अंतिम संस्कार के दौरान शेखूपुर के विधायक हिमांशु यादव भी घाट पर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। अंतिम संस्कार के बाद परिजनों ने परंपरा के अनुसार उसी दिन दसवां संस्कार भी कछला घाट पर पूरा किया।
अवनेश के शव का भी कछला घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
उझानी। बागपत हादसे में जान गंवाने वाले सात मृतकों में से अवनेश का शव मंगलवार शाम अल्लापुर चमारी गांव पहुंचा। शव पहुंचते ही गांव का माहौल एक बार फिर गमगीन हो गया। कुछ देर बाद परिजन और ग्रामीण अवनेश के शव को अंतिम संस्कार के लिए कछला गंगा घाट लेकर रवाना हो गए। संवाद

अल्लापुर चमारी गांव में शव पहुंचने पर प्रेम सिंह के घर के बाहर जुटे लोग। संवाद

अल्लापुर चमारी गांव में शव पहुंचने पर प्रेम सिंह के घर के बाहर जुटे लोग। संवाद