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Budaun News: गर्भवतियों में बढ़ रही एनीमिया की समस्या, मां और शिशु को खतरा

Tue, 17 Feb 2026 01:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 17 Feb 2026 01:41 AM IST
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The problem of anemia is increasing in pregnant women, putting mother and child at risk.
बदायूं। जिले में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) की समस्या बढ़ रही है, जो न केवल गर्भवतियों, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशुओं के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। जिला महिला अस्पताल समेत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कराई जा रही नियमित जांच में महिलाएं एनीमिया से पीड़ित पाई जा रहीं हैं।
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जिले में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी देखी जा रही है, जबकि गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की मात्रा बढ़ने की आवश्यकता होती है, लेकिन पोषण की कमी, समय पर जांच न होना और आयरन युक्त आहार का अभाव इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। कई मामलों में महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर सामान्य से काफी कम पाया गया है। इससे प्रसव के दौरान जटिलताएं बढ़ने की आशंका रहती है।
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महिला डॉक्टरों का कहना है कि एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव, कम वजन के शिशु का जन्म, अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर स्थिति में मां और शिशु दोनों की जान को खतरा हो सकता है।
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जिला महिला अस्पताल की डॉ. रुचि गुप्ता ने बताया कि अधिकतर महिलाएं नियमित जांच के लिए नहीं आतीं। गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में जरूरी परीक्षण नहीं करातीं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी भी एक बड़ी वजह है। कई महिलाएं आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से नहीं लेतीं, जिससे खून की कमी बढ़ती चली जाती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए आयरन-फोलिक एसिड टैबलेट, पोषण आहार और नियमित जांच की व्यवस्था की जा रही है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं की पहचान करें। उन्हें समय पर जांच व दवा लेने के लिए प्रेरित करें।

क्या करें
डॉक्टरों के अनुसार, गर्भावस्था में नियमित जांच कराना सबसे जरूरी है। समय-समय पर हीमोग्लोबिन की जांच कराएं और आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां नियमित लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चुकंदर, अनार, गुड़ और दूध को आहार में शामिल करें। पर्याप्त आराम करें, साफ पानी पीयें। कमजोरी या चक्कर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


क्या न करें
डॉक्टरों की सलाह है कि गर्भावस्था में जांच को टालना नहीं चाहिए। बिना सलाह के दवा लेना या आयरन की गोलियां छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। खाली पेट चाय-कॉफी पीने से बचें, इससे आयरन का अवशोषण कम होता है। अत्यधिक मेहनत, अनियमित खानपान और घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना भी एनीमिया को बढ़ा सकता है।



डॉक्टर की राय
एनीमिया गर्भवती महिलाओं में एक गंभीर, लेकिन रोकी जा सकने वाली समस्या है। यदि समय रहते जांच और सही पोषण मिल जाए तो मां और शिशु दोनों सुरक्षित रह सकते हैं। गर्भावस्था के हर चरण में आयरन की जरूरत बढ़ती है, इसलिए लापरवाही न करें। नियमित जांच, संतुलित आहार और दवाइयों का पालन बेहद जरूरी है। - डॉ. रुचि गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला महिला अस्पताल
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