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Budaun News: उद्घाटन तो हुआ मगर 4 महीने बाद भी नहीं शुरू हो सकीं ब्रोंकोस्कोपी मशीन से जांचें
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मेडिकल कॉलेज में मशीन का उद्घाटन करते प्राचार्य डॉ.अरुण कुमार।फाइल फोटो
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग में चार महीने पहले ब्रोंकोस्कोपी मशीन का उद्घाटन किया गया, लेकिन आज तक इसका संचालन नहीं किया गया है। मशीन के लिए टेक्नीशियन की भी अब तक भर्ती नहीं हुई और कई उपकरण भी नहीं है। इसलिए इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। इस जांच के लिए टीबी के मरीजों को गैरजनपद जाना पड़ रहा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के क्षय रोग विभाग में 26 मार्च 2025 को वीडियो ब्रोंकोस्कोपी मशीन का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार ने किया था। इस मशीन के लगने के बाद प्राचार्य ने दावा किया कि मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा। टीबी, अस्थमा और श्वास नली से जुड़े मरीजों की इससे जांच होगी और फिर उनका बेहतर इलाज होगा लेकिन उम्मीद के मुताबिक कुछ नहीं हुआ। उद्घाटन के बाद से मशीन बंद है। कक्ष में ताला लगा है। इसके लिए टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। इसलिए मरीजों को यहां से रेफर किया जा रहा है।
टीबी एंड चेस्ट रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. कोमल लोहचब ने बताया कि वह अवकाश पर हैं। ब्रोंकोस्कोपी मशीन से फेफड़ों की जांच की जा सकेगी। इसके माध्यम से टीबी (क्षय रोग), फेफड़ों के कैंसर, मिट्टी के कण निकालने, फेफड़ों की सफाई व अन्य श्वसन संबंधी रोगों की सटीक जांच हो सकेगी। अभी टेक्नीशियन नहीं है। मिलने के बाद मशीन को चालू कराया जाएगा।
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ऐसे काम करती है मशीन
ब्रोंकोस्कोपी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एक पतली रोशनी वाली ट्यूब का उपयोग करके फेफड़ों के वायुमार्ग को देखा जाता है। ब्रोंकोस्कोप को नाक या मुंह में डाला जाता है। इसे गले और श्वास नली (ट्रेकिया) से होते हुए वायुमार्ग में ले जाया जाता है। वायुमार्ग में फंसी किसी वस्तु को भी इससे निकाला जा सकता है।
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कोट
- मशीन कार्य कर रही है। अगर कक्ष में ताला लगा है तो गंभीर है, इसको दिखवाता हूं। टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। इसके बाद भी अन्य कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। मरीजों को सुविधा मिल रही है। - डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के क्षय रोग विभाग में 26 मार्च 2025 को वीडियो ब्रोंकोस्कोपी मशीन का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार ने किया था। इस मशीन के लगने के बाद प्राचार्य ने दावा किया कि मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा। टीबी, अस्थमा और श्वास नली से जुड़े मरीजों की इससे जांच होगी और फिर उनका बेहतर इलाज होगा लेकिन उम्मीद के मुताबिक कुछ नहीं हुआ। उद्घाटन के बाद से मशीन बंद है। कक्ष में ताला लगा है। इसके लिए टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। इसलिए मरीजों को यहां से रेफर किया जा रहा है।
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टीबी एंड चेस्ट रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. कोमल लोहचब ने बताया कि वह अवकाश पर हैं। ब्रोंकोस्कोपी मशीन से फेफड़ों की जांच की जा सकेगी। इसके माध्यम से टीबी (क्षय रोग), फेफड़ों के कैंसर, मिट्टी के कण निकालने, फेफड़ों की सफाई व अन्य श्वसन संबंधी रोगों की सटीक जांच हो सकेगी। अभी टेक्नीशियन नहीं है। मिलने के बाद मशीन को चालू कराया जाएगा।
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ऐसे काम करती है मशीन
ब्रोंकोस्कोपी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एक पतली रोशनी वाली ट्यूब का उपयोग करके फेफड़ों के वायुमार्ग को देखा जाता है। ब्रोंकोस्कोप को नाक या मुंह में डाला जाता है। इसे गले और श्वास नली (ट्रेकिया) से होते हुए वायुमार्ग में ले जाया जाता है। वायुमार्ग में फंसी किसी वस्तु को भी इससे निकाला जा सकता है।
कोट
- मशीन कार्य कर रही है। अगर कक्ष में ताला लगा है तो गंभीर है, इसको दिखवाता हूं। टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। इसके बाद भी अन्य कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। मरीजों को सुविधा मिल रही है। - डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज

मेडिकल कॉलेज में मशीन का उद्घाटन करते प्राचार्य डॉ.अरुण कुमार।फाइल फोटो