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आसफपुर के बसोमी में बच्ची जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में आई
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बसोमी में फॉगिंग करता मलेरिया विभाग का कर्मचारी। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। मलेरिया और डेंगू के बीच मच्छरजनित एक अन्य बीमारी जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का दो महीने बाद जिले में एक और मामला सामने आया है। आसफपुर ब्लॉक के गांव बसोमी में छह वर्ष की बच्ची को जेई की पुष्टि हुई है। बच्ची को मुरादाबाद के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। जेई का मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमों ने गांव में कैंप शुरू कर दिया है।
आमतौर पर पूर्वांचल के जिलों में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान लेने वाला जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का वायरस दो महीने पहले बदायूं पहुंच गया था। दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली के छह माह के बच्चे को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जेई की पुष्टि हुई थी। बाद में इलाज के दौरान बच्चे की अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में ही मौत हो गई। अब जिले में जेई का दूसरा मामला सामने आया है। दो महीने के बाद आसफपुर ब्लॉक के गांव बसोमी में छह वर्ष की बच्ची को जेई की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जेई के एक-दो मामले मिलना आम बात है। गौर करने की बात यह है कि बदायूं मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में आता है।
जापानी इंसेफेलाइटिस भी मच्छरजनित जानलेवा बीमारी है। लेकिन यह आमतौर पर ऐसे इलाकों में ज्यादा होता है, जहां सुअर पालन होता हो। सुअर को काटने के बाद अगर मच्छर इंसान को काटता है तो इंसान में संक्रमण फैल जाता है। बसोमी में सुअर पालन नहीं होता है। संक्रमण का शिकार बच्ची की अब तक कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी नहीं मिली है। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें वायरस के बसोमी पहुंचने के कारणों की जांच कर रही हैं।
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शनिवार को जिले में डेंगू के 26 मरीज मिले हैं। इनमें 10 मरीज ननाखेड़ा और 16 उनौला गांव में निकले हैं। आसफपुर ब्लॉक के गांव बसोमी में बच्ची को जेई की भी पुष्टि हुई है। बच्ची का इलाज मुरादाबाद में चल रहा है। उसकी हालत सामान्य है। इन दिनों मच्छरजनित बीमारियों का सीजन चल रहा है। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें लगातार जुटी हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच कराई जा रही है। -डॉ. कौशल गुप्ता, प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण सेल
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आमतौर पर पूर्वांचल के जिलों में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान लेने वाला जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का वायरस दो महीने पहले बदायूं पहुंच गया था। दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली के छह माह के बच्चे को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जेई की पुष्टि हुई थी। बाद में इलाज के दौरान बच्चे की अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में ही मौत हो गई। अब जिले में जेई का दूसरा मामला सामने आया है। दो महीने के बाद आसफपुर ब्लॉक के गांव बसोमी में छह वर्ष की बच्ची को जेई की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जेई के एक-दो मामले मिलना आम बात है। गौर करने की बात यह है कि बदायूं मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में आता है।
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जापानी इंसेफेलाइटिस भी मच्छरजनित जानलेवा बीमारी है। लेकिन यह आमतौर पर ऐसे इलाकों में ज्यादा होता है, जहां सुअर पालन होता हो। सुअर को काटने के बाद अगर मच्छर इंसान को काटता है तो इंसान में संक्रमण फैल जाता है। बसोमी में सुअर पालन नहीं होता है। संक्रमण का शिकार बच्ची की अब तक कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी नहीं मिली है। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें वायरस के बसोमी पहुंचने के कारणों की जांच कर रही हैं।
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शनिवार को जिले में डेंगू के 26 मरीज मिले हैं। इनमें 10 मरीज ननाखेड़ा और 16 उनौला गांव में निकले हैं। आसफपुर ब्लॉक के गांव बसोमी में बच्ची को जेई की भी पुष्टि हुई है। बच्ची का इलाज मुरादाबाद में चल रहा है। उसकी हालत सामान्य है। इन दिनों मच्छरजनित बीमारियों का सीजन चल रहा है। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें लगातार जुटी हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच कराई जा रही है। -डॉ. कौशल गुप्ता, प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण सेल