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पीपीपी मॉडल का पहला  प्रोजेक्ट अधर में लटका 

Mon, 28 Mar 2016 12:27 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Mon, 28 Mar 2016 12:27 AM IST
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The first PPP model Project hangs in the balance
मशीन - फोटो : अमर उजाला

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चार साल में भी भी पूरा नहीं हुआ ड्रीम प्रोजेक्ट 
दिसंबर 2012 तक चालू होना था सॉलिडवेस्ट प्लांट

 सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का काम अधर में लटक गया है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित पहला प्रोजेक्ट अधर में लटक गया है। इसका काम दिसंबर 2012 में पूरा होना था। चार चाल बीत चुके हैं। खुले आसमान के नीचे मशीनें जंक खा रही हैं। 
पीपीपी मॉडल पर ग्राम पंचायत उतरना के मजरा सहपुरा में नवंबर 2011 में सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ था। इस ड्रीम प्रोजेक्ट का काम दिसंबर 2012 तक पूरा होना था। प्लांट चलाने के लिए कार्यदायी संस्था सीएंडडीसी का गुड़गांव की मैसर्स एटूजेड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से करार हुआ था। करीब 12.50 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में सरकार को भी 5.78 करोड़ देने थे। शासन स्तर से बजट का भुगतान फंस गया तो प्लांट का काम भी रुक गया। बाद में सरकार ने अगस्त में 2.87 और नवंबर 2013 में 2.91 करोड़ का भुगतान करके अपने हिस्से का 5.78 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया। इसके बाद प्लांट के काम ने कुछ जोर पकड़ा, लेकिन बाद में प्लांट चलाने के लिए अनुबंध करने वाली कंपनी एटूजेड और हाइड्रोएअर के बीच विवाद के चलते प्लांट का काम फिर से लटक गया। चार साल से करोड़ों रुपये की मशीनें धूल फांक रही हैं।
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कंपनियों ने लगाई छह करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी
बदायूं। प्लांट चलाने के लिए निजी कंपनियों को छह करोड़ की बैंक गारंटी देनी थी। एटूजेड और अकोर्ड हाइड्रोएअर ने अनुबंध के लिए ये बैंक गारंटी फर्जी लगा दी। फर्जीवाड़ा खुलने के बाद कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस के परियोजना प्रबंधक की ओर से 2014 में बरेली के प्रेम नगर थाने में एटूजेड, अकोर्ड हाइड्रोएअर के प्रबंध निदेशक और चार्टड बैंक के शाखा प्रबंधक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। अब मामला कोर्ट में होने की वजह से काम रुका हुआ है। 
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पालिका के करोड़ों रुपये पानी में गए 
बदायूं। सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए नगर पालिका ने करीब चार करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे थे। यह उपकरण प्लांट चालू होने से पहले ही 2012 में खरीद लिए गए थे। प्लांट चालू न होने की वजह से नगर पालिका के तमाम उपकरण भी कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। इस ओर भी किसी का ध्यान नहीं गया। 
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प्लांट का काम 85 फीसदी तक पूरा हो चुका है। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने की वजह से काम रुका हुआ है। उम्मीद है कि जल्द इसका निपटारा हो जाएगा।
-आरएन पांडेय, स्थानिक अभियंता सीएनडीएस
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