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Budaun News: महिला अस्पताल में दोपहर तक नहीं पहुंचीं डॉक्टर, दर्द से छटपटाती रहीं गर्भवती

Tue, 19 Mar 2024 12:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2024 12:23 AM IST
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The doctor did not reach the woman's hospital till noon, the pregnant woman kept writhing in pain.
जिला महिला अस्पताल में खाली पड़ी डाॅक्टर की कुर्सी। संवाद
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में न स्टाफ की मनमानी खत्म हो पा रही है और न ही अव्यवस्थाएं दूर हो रही हैं। यहां प्रसव कक्ष में डॉक्टर के आने का कोई समय तय नहीं है। ओपीडी में दो डॉक्टरों के कक्ष भी सोमवार को 11.30 बजे तक खाली पड़े रहे। प्रसव कक्ष में 12 बजे तक डॉक्टर नहीं पहुंचीं। गर्भवती महिलाएं चार घंंटे तक डॉक्टर के इंतजार में दर्द से छटपटाती रहीं। इस दौरान पांच माह का गर्भ गिरने से गंभीर हालत में लाई गई महिला को भी चार घंटे तक इलाज नहीं मिल सका।
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महिला अस्पताल में सारी व्यवस्थाएं ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं। प्रसव के नाम पर रुपये लेने और आशाओं के बहला-फुसला कर गर्भवतियों को निजी अस्पतालों में ले जाने के मामले कई बार सामने आ चुके हैं। एक प्रकरण में तीन कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त की जा चुकी हैं लेकिन इसके बाद भी सुधार नहीं दिख रहा है।
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सोमवार को ओपीडी में चार में से दो चिकित्सकों के कक्ष खाली दोपहर तक खाली पड़े रहे। महिला रोगी डॉक्टरों के आने का इंतजार करती रहीं। गांव इमलिया निवासी वीरेश ने बताया कि उनकी पांच माह की गर्भवती पत्नी ममता की रविवार रात अचानक हालत खराब हो गई। उन्हें तेजी से रक्तस्राव होने लगा। ब्लीडिंग न रुकने पर सोमवार नौ बजे उन्हें महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। 12 बजे तक इंतजार करने के बाद भी डॉक्टर डयूटी पर नहीं आईं। कई बार फोन भी कराया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। चार घंटे परेशान होने के बाद पत्नी को निजी अस्पताल ले जाने को मजबूर हो गए।
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तीन दिन पहले स्टाफ और तीमारदार में हुआ था विवाद
तीन दिन पहले अलापुर की रहने वाली खुशबू को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने उन्हें महिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। यहां तैनात स्टाफ ने प्रसव कराने के लिए छह हजार रुपये मांगे तो परिजनों ने जमकर हंगामा किया। इस बीच उनकी स्टाफ से तीखी नोकझोंक भी हुई। बाद में जैसे-तैसे मामला शांत हुआ।

गर्भवती को भर्ती न करने पर तीन कर्मचारियों सेवा हो चुकी है समाप्त
कबूलपुरा निवासी रवि अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर महिला अस्पताल में 29 दिसंबर को लेकर आए थे। अस्पताल के कर्मचारी और महिला डॉक्टर ने देखा और हालत गंभीर बताई, लेकिन महिला को भर्ती नहीं किया। थक हारकर परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले जाने लगे तो महिला अस्पताल के गेट पर प्रसव हो गया। महिला के पति रवि का आरोप था कि महिला अस्पताल के स्टाफ ने छह हजार रुपये न देने पर भर्ती नहीं किया। इस मामले में तीन संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई।


डॉक्टरों समेत समस्त स्टाफ को समय से डयूटी करने के कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद भी अगर डॉक्टर प्रसव केंद्र में नहीं पहुंची है तो यह बेहद लापरवाही है। इस मामले की जांच कराने के बाद कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस

जिला महिला अस्पताल में खाली पड़ी डाॅक्टर की कुर्सी। संवाद

जिला महिला अस्पताल में खाली पड़ी डाॅक्टर की कुर्सी। संवाद

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