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‘सार्थक’ की पढ़ाई...बुजुर्गों की ‘नर्स’ बनेगी डिवाइस
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मी-बोट डिवाइस के साथ सार्थक। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। पढ़ाई पूरी करने के बाद हर युवा का एक ही सपना होता है कि उसे अच्छी नौकरी मिले लेकिन ऐसे युवा कम ही होते हैं जो पढ़ाई के बाद दूसरों की समस्याओं का निदान करने की सोचते हैं। ऐसे ही एक युवा हैं सार्थक, जिन्होंने अपनी तकनीकी सोच से सार्थक ने ऐसी डिवाइस बनाई हैं जो बुजुर्गों के लिए किसी ‘नर्स’ से कम नहीं होगी, जबकि दूसरी डिवाइस पेड़ पौधों में पानी देने के लिए मददगार साबित होगी।
शहर के सांई मंदिर खेड़ा नवादा निवासी सार्थक आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में बी वॉक (बैचलर ऑफ वोकेशनल) तृतीय वर्ष के छात्र हैं। वह उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जिनके लिए डिग्री का महत्व केवल एक अच्छी नौकरी पाना होता है। सार्थक की सोच इससे अलग है। उन्होंने अपनी इस पढ़ाई का उपयोग घरों में आने वाली छोटी-छोटी समस्याओं के निदान के लिए किया है। सार्थक ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जो पौधों को समय पर पानी देगी तो दूसरी डिवाइस घर में मरीज होने पर दवा लेने के लिए अलर्ट करेगी।
सार्थक बताते हैं कि उनकी नानी अक्सर बीमार रहती हैं और समय पर दवाएं लेना भूल जाती हैं। वह भी नानी की इस समस्या को देखते थे जिसके बाद उन्हें एक ऐसी डिवाइस बनाने का विचार आया जो रोगियों को समय पर दवा की न केवल याद दिला सके बल्कि उन्हें दवा दे भी सके। वह कहते हैं कि उनका लक्ष्य खुद के स्टार्टअप का है, हालांकि शुरुआत में नौकरी भी मिलेगी तो वह करेंगे लेकिन एक दिन अपनी कंपनी जरूर खड़ी करेंगे।
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ऐसे काम करेगी डिवाइस
- सार्थक बताते हैं कि मी-बोट उन बुजुर्ग रोगियों के लिए उपयोगी साबित होगी जो समय पर दवा लेना भूल जाते हैं। यह एक ऐसी डिवाइस है जिसमें रोगी के हिसाब से पूरे दिन की दवा और पानी निर्धारित समय सेट करके बनाए गए ब्लॉक्स में रख दी जाती है। समय आने पर यह डिवाइस अलार्म देती है और दवा-पानी स्वयं ही बाहर आ जाते हैं। यदि रोगी दवा नहीं उठाता है तो पांच मिनट के बाद अलार्म फिर बजने लगता है। सार्थक बताते हैं कि इसके लिए डिवाइस में टाइमिंग और वेट सेंसर फिट किए गए हैं। दवा का वजन यदि कम नहीं होता है तो डिवाइस बार-बार अलार्म देती रहेगी। सिरप और दवा के लिए अलग-अलग टाइम और मात्रा सेट करनी होगी।
वहीं दूसरी मशीन पौधों में पानी देने वाली है, जो सेंसर के आधार पर बनी है, जो पौधों के पास सेंसर के द्वारा नमी देखेगा और उसके मुताबिक पानी देगा। बताते हैं कि इन डिवाइस का प्रदर्शन या एप्रूवल कहीं नहीं है, क्योंकि अभी वह इसमें और अपडेट कर रहे हैं।
धार्मिक अनुष्ठान करके परिवार चलाते हैं सार्थक के पिता
सार्थक मिश्रा सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता पंडित मनोज मिश्रा मंदिर में सेवा करने के साथ धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। परिवार चलाने का पिता के पास यही जरिया है, लेकिन उन्होंने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना अपना लक्ष्य बना लिया। सार्थक भी अपने पिता के सपनों को पूरा करना चाहते हैं। सार्थक का कहना है कि वह कुछ ऐसा आविष्कार करना चाहते हैं जिसके लिए उनको जाना जाए। उनका आविष्कार समाज के काम आए और समाज को नई दिशा मिल सके।
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शहर के सांई मंदिर खेड़ा नवादा निवासी सार्थक आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में बी वॉक (बैचलर ऑफ वोकेशनल) तृतीय वर्ष के छात्र हैं। वह उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जिनके लिए डिग्री का महत्व केवल एक अच्छी नौकरी पाना होता है। सार्थक की सोच इससे अलग है। उन्होंने अपनी इस पढ़ाई का उपयोग घरों में आने वाली छोटी-छोटी समस्याओं के निदान के लिए किया है। सार्थक ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जो पौधों को समय पर पानी देगी तो दूसरी डिवाइस घर में मरीज होने पर दवा लेने के लिए अलर्ट करेगी।
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सार्थक बताते हैं कि उनकी नानी अक्सर बीमार रहती हैं और समय पर दवाएं लेना भूल जाती हैं। वह भी नानी की इस समस्या को देखते थे जिसके बाद उन्हें एक ऐसी डिवाइस बनाने का विचार आया जो रोगियों को समय पर दवा की न केवल याद दिला सके बल्कि उन्हें दवा दे भी सके। वह कहते हैं कि उनका लक्ष्य खुद के स्टार्टअप का है, हालांकि शुरुआत में नौकरी भी मिलेगी तो वह करेंगे लेकिन एक दिन अपनी कंपनी जरूर खड़ी करेंगे।
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ऐसे काम करेगी डिवाइस
- सार्थक बताते हैं कि मी-बोट उन बुजुर्ग रोगियों के लिए उपयोगी साबित होगी जो समय पर दवा लेना भूल जाते हैं। यह एक ऐसी डिवाइस है जिसमें रोगी के हिसाब से पूरे दिन की दवा और पानी निर्धारित समय सेट करके बनाए गए ब्लॉक्स में रख दी जाती है। समय आने पर यह डिवाइस अलार्म देती है और दवा-पानी स्वयं ही बाहर आ जाते हैं। यदि रोगी दवा नहीं उठाता है तो पांच मिनट के बाद अलार्म फिर बजने लगता है। सार्थक बताते हैं कि इसके लिए डिवाइस में टाइमिंग और वेट सेंसर फिट किए गए हैं। दवा का वजन यदि कम नहीं होता है तो डिवाइस बार-बार अलार्म देती रहेगी। सिरप और दवा के लिए अलग-अलग टाइम और मात्रा सेट करनी होगी।
वहीं दूसरी मशीन पौधों में पानी देने वाली है, जो सेंसर के आधार पर बनी है, जो पौधों के पास सेंसर के द्वारा नमी देखेगा और उसके मुताबिक पानी देगा। बताते हैं कि इन डिवाइस का प्रदर्शन या एप्रूवल कहीं नहीं है, क्योंकि अभी वह इसमें और अपडेट कर रहे हैं।
धार्मिक अनुष्ठान करके परिवार चलाते हैं सार्थक के पिता
सार्थक मिश्रा सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता पंडित मनोज मिश्रा मंदिर में सेवा करने के साथ धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। परिवार चलाने का पिता के पास यही जरिया है, लेकिन उन्होंने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना अपना लक्ष्य बना लिया। सार्थक भी अपने पिता के सपनों को पूरा करना चाहते हैं। सार्थक का कहना है कि वह कुछ ऐसा आविष्कार करना चाहते हैं जिसके लिए उनको जाना जाए। उनका आविष्कार समाज के काम आए और समाज को नई दिशा मिल सके।

सार्थक की यह डिवाइस करेगी पौधों में सिंचाई का काम। संवाद- फोटो : BADAUN