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शहर ढाई किमी दूर, लोग सात किमी घूमकर आने को मजबूर
सार
करीब दस गांवों से शहर की दूरी महज दो से ढाई किलोमीटर है।ऐसे में यहां से शहर की दूरी अधिकतम दो से ढाई किमी पड़ती है।कीचड़ से गुजरते हैं स्कूल के बच्चेइस रोड से ग्राम नगला घेर और मढैय्या के तमाम स्कूली बच्चे रोजाना गुजरते हैं।
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मीरा जी चौकी से बाईपास के कच्चे रास्ते पर इस तरह फैली रहती है कीचड़। संवाद
- फोटो : BADAUN
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विस्तार
बदायूं। करीब दस गांवों से शहर की दूरी महज दो से ढाई किलोमीटर है। लेकिन शहर जाने-जाने का रास्ता बेहद खराब होने के कारण इन गांवों के लोगों को तकरीबन सात किलोमीटर चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। बाईपास से जुड़ी होने के बावजूद इस सड़क का करीब डेढ़ किमी हिस्सा अभी तक कच्चा ही पड़ा है। बारिश के दिनों में यह रास्ता दलदल में बदल जाता है। इस कारण ग्रामीणों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
शहर में मीराजी चौकी-बाईपास रोड क्षेत्र के कई गांव को जोड़ता है। बुजुर्ग बताते हैं कि आजादी के बाद वर्ष 1990 तक तमाम गांवों के लोग इधर से आया-जाया करते थे। उस वक्त आने-जाने के संसाधन कम थे। लोगों का साइकिल और बैलगाड़ी आदि ही सहारा था। मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे से आना-जाना ग्रामीणों के लिए लंबा पड़ता है। यह रोड नगला घेर, भगवतीपुर, भजपुरा, दहेमी, सनाय, गुरुपुरी और बरातेगदार आदि गांवों को जाता है।
ग्रामीण गांव से निकलकर इस मार्ग से सीधे मीराजी चौकी होते हुए टिकटगंज चौराहे पर पहुंचते हैं। ऐसे में यहां से शहर की दूरी अधिकतम दो से ढाई किमी पड़ती है। पर, करीब डेढ़ किमी का हिस्सा बेहद खराब है। जहां-तहां पानी भरा हुआ है। गड्ढे हो चुके हैं। बरसात के दिनों में तो यहां दलदल बन जाती है। इसके बाद शहर तक पहुंचने के लिए करीब सात किमी का फेर लगाना पड़ता है।
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न अधिकारी सुनते हैं और न नेता
ग्रामीणों का कहना है कि इस कच्चे मार्ग को पक्का बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों और नेताओं से मांग की जा चुकी है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। जबकि इन दस गांवों की करीब 40 हजार जनता का इस रास्ते से आना-जाना रहता है।
कीचड़ से गुजरते हैं स्कूल के बच्चे
इस रोड से ग्राम नगला घेर और मढैय्या के तमाम स्कूली बच्चे रोजाना गुजरते हैं। उनके लिए किसी वाहन का इंतजार करना मुश्किल होता है। वह कुछ ही समय में अपने गांव से स्कूल और स्कूल से घर पहुंच जाते हैं, लेकिन इस रोड के खराब होने की वजह से उन्हें कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।
मुझे इस रोड के बारे में जानकारी नहीं है। मैं इस बारे में संबंधित खंड के अधिकारियों से बात करता हूं। टीम को भेजकर रोड को दिखवाया जाएगा। उसके बाद ही कुछ बताया जा सकता है। - मनीष कुमार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
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शहर में मीराजी चौकी-बाईपास रोड क्षेत्र के कई गांव को जोड़ता है। बुजुर्ग बताते हैं कि आजादी के बाद वर्ष 1990 तक तमाम गांवों के लोग इधर से आया-जाया करते थे। उस वक्त आने-जाने के संसाधन कम थे। लोगों का साइकिल और बैलगाड़ी आदि ही सहारा था। मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे से आना-जाना ग्रामीणों के लिए लंबा पड़ता है। यह रोड नगला घेर, भगवतीपुर, भजपुरा, दहेमी, सनाय, गुरुपुरी और बरातेगदार आदि गांवों को जाता है।
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ग्रामीण गांव से निकलकर इस मार्ग से सीधे मीराजी चौकी होते हुए टिकटगंज चौराहे पर पहुंचते हैं। ऐसे में यहां से शहर की दूरी अधिकतम दो से ढाई किमी पड़ती है। पर, करीब डेढ़ किमी का हिस्सा बेहद खराब है। जहां-तहां पानी भरा हुआ है। गड्ढे हो चुके हैं। बरसात के दिनों में तो यहां दलदल बन जाती है। इसके बाद शहर तक पहुंचने के लिए करीब सात किमी का फेर लगाना पड़ता है।
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न अधिकारी सुनते हैं और न नेता
ग्रामीणों का कहना है कि इस कच्चे मार्ग को पक्का बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों और नेताओं से मांग की जा चुकी है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। जबकि इन दस गांवों की करीब 40 हजार जनता का इस रास्ते से आना-जाना रहता है।
कीचड़ से गुजरते हैं स्कूल के बच्चे
इस रोड से ग्राम नगला घेर और मढैय्या के तमाम स्कूली बच्चे रोजाना गुजरते हैं। उनके लिए किसी वाहन का इंतजार करना मुश्किल होता है। वह कुछ ही समय में अपने गांव से स्कूल और स्कूल से घर पहुंच जाते हैं, लेकिन इस रोड के खराब होने की वजह से उन्हें कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।
मुझे इस रोड के बारे में जानकारी नहीं है। मैं इस बारे में संबंधित खंड के अधिकारियों से बात करता हूं। टीम को भेजकर रोड को दिखवाया जाएगा। उसके बाद ही कुछ बताया जा सकता है। - मनीष कुमार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी

बाईपास से मीरा जी चौकी जाने वाला कच्चा रास्ता। संवाद- फोटो : BADAUN