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Budaun News: तापमान 27 डिग्री के पार, घट सकती है पछेती गेहूं की पैदावार
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उझानी में गेहूं की फसल। संवाद
- फोटो : संवाद
उझानी। दो-तीन दिन तक मौसम में नमी के बाद एक बार फिर धूप खिली तो तापमान 27 डिग्री के पार चला गया। ऐसा होलिका दहन से पहले कभी नहीं हुआ। तापमान में वृद्धि का सीधा असर पछेती गेहूं की फसल पर सर्वाधिक पड़ेगा। दाना पकने से पहले ही सिकुड़ने लगेगा। पैदावार 20 फीसदी तक घटने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम के मौजूदा मिजाज को लेकर जानकार बताते हैं कि होलिका दहन से पहले तापमान में तेजी से वृद्धि होना सामान्य नहीं है। गेहूं की फसल के लिहाज से फरवरी के अंतिम सप्ताह में तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। तेज धूप के साथ 30 डिग्री से ऊपर जब भी तापमान पहुंचा है, तब-तब गेहूं की पैदावार पर असर पड़ा है।
गेहूं की बालियों में दाना पड़ने के बाद बढ़वार के लिए उसे 18 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। महाशिवरात्रि के बाद धूप फिर से प्रभावित करेगी। बालियों में दाना सिकुड़ने लगेगा। उसका वजन भी कम होगा। इसके चलते पैदावार में करीब 20 फीसदी तक गिरावट का अंदेशा रहेगा।
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किसानों के मुताबिक, नवंबर में बोआई के बाद तैयार फसल मार्च के अंतिम सप्ताह में पक जानी चाहिए। इसके बाद दिसंबर में भी गेहूं की बोआई हुई है। तापमान में वृद्धि के बाद दिसंबर की बोआई वाला गेहूं भी मार्च महीना में ही पक जाएगा, जबकि गेहूं करीब 140 दिन में ठीक से पक पाता है। पिछेती गेहूं ज्यादा प्रभावित होगा।
बदायूं के किसानों में हरियाणा और पंजाब की प्रजातियों का क्रेज
बदायूं जिले के किसान गेहूं की जिन प्रजातियों की बोआई करते हैं, उनमें देसी प्रजाति की बोआई का रकबा महज 20 फीसदी के करीब ही बताया जा रहा है। इसके विपरीत पंजाब में विकसित गेहूं की प्रजातियों में पीबीडब्ल्यू- 343, 502 और 540 तो हरियाणा की एचडी प्रजाति के गेहूं की रकबा काफी अधिक रहा है। दोनों प्रदेश की प्रजातियों के बीज की बोआई करने पर प्रति बीघा चार क्विंटल से अधिक की पैदावार होती रही है। देसी प्रजाति में आरआर- 21 खाने में जायकेदार माना जाता है, लेकिन पैदावार प्रति बीघा 3.5 क्विंटल से अधिक नहीं होती।
महंगाई की मार से बिगड़ेगा घरेलू रसोई का बजट
आंकड़ों पर गौर करें तो कृषि विभाग ने गेहूं की बोआई के लिए 2.34 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा हुआ है। इसके मुकाबले करीब 96 हजार हेक्टेयर रकबा में ही बोआई हुई है। पिछले साल गेहूं की आवक के दिनों में थोक बाजार में प्रति क्विंटल करीब 22 सौ रुपये का भाव रहा। इन दिनों हालांकि थोक भाव तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल पार कर गया, लेकिन रकबा में आधे से अधिक की कमी के साथ आने वाले दिनों में पैदावार कम हुई तो थोक बाजार का भाव बढ़ने से महंगाई की मार पड़ेगा। इससे सबसे ज्यादा घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होगा।
किसान बोले- कोहरा कम पड़ने से भी फसल हुई प्रभावित
होली से पहले ही गर्मी का अहसास होने से गेहूं की फसल समय से पहले पक जाएगी। दाना भी छोटा रहेगा। इस बार तो कोहरा भी कम पड़ा था। कोहरा कम पड़ने से फसल प्रभावित हुई है।- चंद्रपाल यादव
मौसम का मिजाज कब बिगड़ जाए, यह तो कुदरत जाने, लेकिन इस बार गेहूं की फसल को उसके हिसाब से मौसम नहीं रहा। एक तो ठंड कम पड़ी, अब तापमान में वृद्धि फसल को नुकसान पहुंचा रही है।- गिरीश कुमार
तापमान बढ़ने से गेहूं का दाना बढ़वार पकड़ने के बजाय सिकुड़ जाता है। खेतों में नमी कम होने से फसल जल्दी पक जाती है। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ने की आशंका बनी हुई है। - डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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मौसम के मौजूदा मिजाज को लेकर जानकार बताते हैं कि होलिका दहन से पहले तापमान में तेजी से वृद्धि होना सामान्य नहीं है। गेहूं की फसल के लिहाज से फरवरी के अंतिम सप्ताह में तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। तेज धूप के साथ 30 डिग्री से ऊपर जब भी तापमान पहुंचा है, तब-तब गेहूं की पैदावार पर असर पड़ा है।
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गेहूं की बालियों में दाना पड़ने के बाद बढ़वार के लिए उसे 18 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। महाशिवरात्रि के बाद धूप फिर से प्रभावित करेगी। बालियों में दाना सिकुड़ने लगेगा। उसका वजन भी कम होगा। इसके चलते पैदावार में करीब 20 फीसदी तक गिरावट का अंदेशा रहेगा।
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किसानों के मुताबिक, नवंबर में बोआई के बाद तैयार फसल मार्च के अंतिम सप्ताह में पक जानी चाहिए। इसके बाद दिसंबर में भी गेहूं की बोआई हुई है। तापमान में वृद्धि के बाद दिसंबर की बोआई वाला गेहूं भी मार्च महीना में ही पक जाएगा, जबकि गेहूं करीब 140 दिन में ठीक से पक पाता है। पिछेती गेहूं ज्यादा प्रभावित होगा।
बदायूं के किसानों में हरियाणा और पंजाब की प्रजातियों का क्रेज
बदायूं जिले के किसान गेहूं की जिन प्रजातियों की बोआई करते हैं, उनमें देसी प्रजाति की बोआई का रकबा महज 20 फीसदी के करीब ही बताया जा रहा है। इसके विपरीत पंजाब में विकसित गेहूं की प्रजातियों में पीबीडब्ल्यू- 343, 502 और 540 तो हरियाणा की एचडी प्रजाति के गेहूं की रकबा काफी अधिक रहा है। दोनों प्रदेश की प्रजातियों के बीज की बोआई करने पर प्रति बीघा चार क्विंटल से अधिक की पैदावार होती रही है। देसी प्रजाति में आरआर- 21 खाने में जायकेदार माना जाता है, लेकिन पैदावार प्रति बीघा 3.5 क्विंटल से अधिक नहीं होती।
महंगाई की मार से बिगड़ेगा घरेलू रसोई का बजट
आंकड़ों पर गौर करें तो कृषि विभाग ने गेहूं की बोआई के लिए 2.34 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा हुआ है। इसके मुकाबले करीब 96 हजार हेक्टेयर रकबा में ही बोआई हुई है। पिछले साल गेहूं की आवक के दिनों में थोक बाजार में प्रति क्विंटल करीब 22 सौ रुपये का भाव रहा। इन दिनों हालांकि थोक भाव तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल पार कर गया, लेकिन रकबा में आधे से अधिक की कमी के साथ आने वाले दिनों में पैदावार कम हुई तो थोक बाजार का भाव बढ़ने से महंगाई की मार पड़ेगा। इससे सबसे ज्यादा घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होगा।
किसान बोले- कोहरा कम पड़ने से भी फसल हुई प्रभावित
होली से पहले ही गर्मी का अहसास होने से गेहूं की फसल समय से पहले पक जाएगी। दाना भी छोटा रहेगा। इस बार तो कोहरा भी कम पड़ा था। कोहरा कम पड़ने से फसल प्रभावित हुई है।- चंद्रपाल यादव
मौसम का मिजाज कब बिगड़ जाए, यह तो कुदरत जाने, लेकिन इस बार गेहूं की फसल को उसके हिसाब से मौसम नहीं रहा। एक तो ठंड कम पड़ी, अब तापमान में वृद्धि फसल को नुकसान पहुंचा रही है।- गिरीश कुमार
तापमान बढ़ने से गेहूं का दाना बढ़वार पकड़ने के बजाय सिकुड़ जाता है। खेतों में नमी कम होने से फसल जल्दी पक जाती है। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ने की आशंका बनी हुई है। - डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

उझानी में गेहूं की फसल। संवाद- फोटो : संवाद

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उझानी में गेहूं की फसल। संवाद- फोटो : संवाद