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पानी बचाने को मुहिम चला रहे शिक्षक, क्लर्क और बैंक प्रबंधक

Wed, 21 Jul 2021 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jul 2021 12:57 AM IST
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Teachers, clerks and bank managers campaigning to save water
बदायूं। सूखते तालाब, सिकुड़तीं नदियां और लगातार गिर रहा भूगर्भ जलस्तर भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है। भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन और वर्षा जल संचयन न होने से संकट और बढ़ रहा है। इसी संकट के प्रति कुछ प्रबुद्ध जन लोगों को जागरूक करने में लगे हैं। वे गांव में जाते हैं और पानी बचाने का संदेश देते हैं। इनमें शिक्षक, क्लर्क और बैंक प्रबंधक जैसे लोग शामिल हैं।
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किसी को जागरूक करने के पहले खुद जागरूक होना पड़ता है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय उनौला के विज्ञान शिक्षक आयुष भारद्वाज ने अपने खर्चे से विद्यालय में वर्षा जल संचयन के लिए सोक पिट और मिनी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण करा दिया है। बेसिक शिक्षा विभाग में क्लर्क आदर्श नगर निवासी दिनेश शर्मा ने अपने घर में सोक पिट बनवाया है। आवास विकास के बैंक प्रबंधक रवेंद्र उपाध्याय और बेसिक शिक्षा विभाग के रिटायर्ड सह समन्यवक सुभाष चंद्र जल संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। रवेंद्र बताते हैं कि वह किसी काम से गांव जाते हैं तो वहां पानी के महत्व को लेकर पर्चे बांटते हैं। उनका कहना है कि लोग इससे जुड़ रहे हैं। इनका कहना है कि अगर जल संरक्षण को लेकर अभी से नहीं चेते तो भविष्य में बड़ा संकट होगा। लोगों को जागरूक करने के लिए इन लोगों ने सोशल मीडिया को भी माध्यम बनाया है।
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जल का कोई विकल्प नहीं हो सकता। जीवन के लिए जिस तरह ऑक्सीजन जरूरी है उसी तरह से जल भी जरूरी है। भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है। भविष्य के संभावित खतरे से बचने के लिए जरूरी है कि अभी से जल संरक्षण किया जाए। -आयुष भारद्वाज, विज्ञान शिक्षक
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जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन हर किसी की जिम्मेदारी है। जिस तेजी से भूगर्भ जल स्तर गिर रहा है वह बड़ी चिंता का विषय है। पानी की बर्बादी रोकने और जल संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा। बिना जल के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। - दिनेश कुमार शर्मा, क्लर्क
गांवों से ज्यादा शहर में पानी की बर्बादी होती है। गांवों में तो तालाब भी हैं जहां वर्षा जल का संचयन हो जाता है लेकिन शहरों में ऐसा नहीं है। लोगों को चाहिए कि नए भवन बनवाएं तो उनमें सोक पिट या मिनी हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूर लगवाएं। - सुभाष चंद्र, रिटायर्ड एबीआरसी

जल है तो जीवन है, जल है तो कल है इस तरह के स्लोगन कई जगहों पर लिखे दिख जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी लोग जल संरक्षण को लेकर जागरूक नहीं हो रहे हैं। भविष्य में आने वाले संकट को देखते हुए जल संरक्षण को लेकर जागरूक होना होगा। - रवेंद्र उपाध्याय, बैंक प्रबंधक
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