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Budaun News: नाव से पहुंच रहे शिक्षक, जहां मिल रही जगह वहीं करा रहे पढ़ाई
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सहसवान के प्राथमिक विद्यालय भमोरिया में भरा पानी। संवाद
बदायूं। गंगा और रामगंगा की बाढ़ से सहसवान क्षेत्र में जनजीवन के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित है। शिक्षक नाव से स्कूल पहुंच रहे हैं। ऐसे में गांव में जहां पर भी जगह मिल रही है। वहां पर शिक्षक कार्य कर रहे हैं।
सहसवान ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भमोरिया में सोमवार को तैनात शिक्षक प्रदीप चौहान नाव से स्कूल पहुंचे। स्कूल पानी में डूबा है। हालात देखकर उन्होंने गांव में बच्चों को पढ़ाने का प्रयास किया। बमुश्किल उनको एक जगह बैठने के लिए मिली। ग्रामीणों की मदद से गांव के बच्चों को उन्होंने वहां पर एकत्र किया। उसके बाद में बच्चों को पढ़ाया। साथ ही बाढ़ से बचाव के बारे में भी जानकारी दी। कहा कि जहां पर भी पानी भरा हो, उधर अकेले न जाए। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय सिठौलिया खाम में तैनात शिक्षक हरि कुमार भी नाव से स्कूल पहुंचे। वहां भी पानी भरा होने के कारण वे गंगा महावा तटबंध पर पहुंचे। यहां बाढ़ से विस्थापित ग्रामीणों ने शरण ले रखी है। हालांकि, वहां बच्चों को एकत्र किया और वहां पर पढ़ाया। इससे ग्रामीणों को भी राहत मिल गई।
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किताब-कॉपियां बह गई, जज्बा नहीं
-गांवों में पानी भरने से कई परिवार ऊंचे स्थानों, बांधों और अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। घरों में पानी घुसने से लोग अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। सत्यपाल, हरिकृष्ण का कहना है कि बाढ़ के चलते बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। कई बच्चों की किताब-कॉपियों भीग गई, तो कुछ की बाढ़ के पानी में बह गई। बावजूद इसके बच्चों में पढ़ने का जज्बा कम नहीं हुआ। वहीं शिक्षक इस हालात में लगातार गांव पहुंच रहे हैं और बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
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शिक्षकों के सामने चुनौती
-शिक्षक प्रदीप का कहना है नाव से स्कूल पहुंचना ही एक बड़ी चुनौती है। असली मुश्किल तब आती है, जब बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह ही नहीं मिलती। स्कूलों में कमर तक पानी है और गांव में हर तरफ पानी फैला हुआ है। ऐसे में बच्चों को एक साथ इकट्ठा करना और पढ़ाना मुश्किल हो गया है। हालांकि ग्रामीणों के सहयोग से बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
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इन स्कूलों में भरा बाढ़ का पानी
-प्राथमिक विद्यालय खिरकवारी मानपुर पुख्ता, मोहसमपुर, आनंदपुर नगरिया, जटा, रैपुरा, नवादा बदन, सिठौलिया खाम में पानी भर गया है।
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सहसवान ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भमोरिया में सोमवार को तैनात शिक्षक प्रदीप चौहान नाव से स्कूल पहुंचे। स्कूल पानी में डूबा है। हालात देखकर उन्होंने गांव में बच्चों को पढ़ाने का प्रयास किया। बमुश्किल उनको एक जगह बैठने के लिए मिली। ग्रामीणों की मदद से गांव के बच्चों को उन्होंने वहां पर एकत्र किया। उसके बाद में बच्चों को पढ़ाया। साथ ही बाढ़ से बचाव के बारे में भी जानकारी दी। कहा कि जहां पर भी पानी भरा हो, उधर अकेले न जाए। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय सिठौलिया खाम में तैनात शिक्षक हरि कुमार भी नाव से स्कूल पहुंचे। वहां भी पानी भरा होने के कारण वे गंगा महावा तटबंध पर पहुंचे। यहां बाढ़ से विस्थापित ग्रामीणों ने शरण ले रखी है। हालांकि, वहां बच्चों को एकत्र किया और वहां पर पढ़ाया। इससे ग्रामीणों को भी राहत मिल गई।
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किताब-कॉपियां बह गई, जज्बा नहीं
-गांवों में पानी भरने से कई परिवार ऊंचे स्थानों, बांधों और अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। घरों में पानी घुसने से लोग अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। सत्यपाल, हरिकृष्ण का कहना है कि बाढ़ के चलते बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। कई बच्चों की किताब-कॉपियों भीग गई, तो कुछ की बाढ़ के पानी में बह गई। बावजूद इसके बच्चों में पढ़ने का जज्बा कम नहीं हुआ। वहीं शिक्षक इस हालात में लगातार गांव पहुंच रहे हैं और बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
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शिक्षकों के सामने चुनौती
-शिक्षक प्रदीप का कहना है नाव से स्कूल पहुंचना ही एक बड़ी चुनौती है। असली मुश्किल तब आती है, जब बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह ही नहीं मिलती। स्कूलों में कमर तक पानी है और गांव में हर तरफ पानी फैला हुआ है। ऐसे में बच्चों को एक साथ इकट्ठा करना और पढ़ाना मुश्किल हो गया है। हालांकि ग्रामीणों के सहयोग से बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
इन स्कूलों में भरा बाढ़ का पानी
-प्राथमिक विद्यालय खिरकवारी मानपुर पुख्ता, मोहसमपुर, आनंदपुर नगरिया, जटा, रैपुरा, नवादा बदन, सिठौलिया खाम में पानी भर गया है।

सहसवान के प्राथमिक विद्यालय भमोरिया में भरा पानी। संवाद

सहसवान के प्राथमिक विद्यालय भमोरिया में भरा पानी। संवाद