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तालिब हुसैन सुल्तानी ने कव्वाली में बढ़ाया बदायूं का मान
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तालिब हुसैन सुल्तानी का फाइल फोटो।संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। बदायूं संगीत घराने से जुड़े कव्वाली व गजल के मशहूर गायक तालिब हुसैन सुल्तानी अपने वक्त के बेमिसाल कव्वाल रहे। उनकी पुण्यतिथि शनिवार को है। उन्होंने व उनके परिवार के लोगों ने संगीत के क्षेत्र में बदायूं का नाम रोशन किया है। संगीत प्रेमी व उनका परिवार शनिवार को उनकी याद में संगीत की महफिल सजाएगा।
बदायूं हमेशा संगीत के क्षेत्र में प्रसिद्ध रहा है। चाहे वह शास्त्रीय संगीत हो या सूफी संगीत। यहां का सहसवान घराना संगीत के क्षेत्र में देश भर में मशहूर है। सहसवान घराने का सिलसिला ही बदायूं संगीत घराने से जुड़ा है। बदायूं घराने के बड़े कव्वाल तालिब हुसैन सुल्तानी चार दिसंबर को दुनिया से रुखसत हो गए थे। वेदो टोला मोहल्ले में 1954 में जन्मे तालिब हुसैन सुल्तानी को बचपन से ही हो कव्वाली एवं ग़जल गायन का शौक था। प्रारंभिक शिक्षा पिता मतलूब हुसैन से ली जो फारसी कलाम के अनोखे गायक थे।
छोटी सी उम्र में ही तालिब हुसैन ने अपना नाम पूरे देश में रोशन किया। लगभग दो दर्जन देशों में अपनी कला का परचम लहराया। लंदन, जापान, जर्मन, पेरिस, युगांडा, जद्दा, केनिया व ट्यूनीशिया प्रमुख हैं। कव्वाली को जीवित रखने के लिए उन्होंने बहुत से विभागों में भी कार्यक्रम किए और कई सम्मान से उन्हें नवाजा गया। सूफी संगीत एवं शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ाने की परंपरा को उनका परिवार संभाल रहा है। आज उनकी पुण्यतिथि है। शहर के एक लॉन में उनके बेटे आमिर सुल्तानी एक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसमें उस्ताद सखावत हुसैन रामपुर, सूफी सिंगर जुनेद सुल्तानी, सूफी सिंगर दानिश हुसैन बदायूंनी अपने कलाम पेश करेंगे।
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बदायूं हमेशा संगीत के क्षेत्र में प्रसिद्ध रहा है। चाहे वह शास्त्रीय संगीत हो या सूफी संगीत। यहां का सहसवान घराना संगीत के क्षेत्र में देश भर में मशहूर है। सहसवान घराने का सिलसिला ही बदायूं संगीत घराने से जुड़ा है। बदायूं घराने के बड़े कव्वाल तालिब हुसैन सुल्तानी चार दिसंबर को दुनिया से रुखसत हो गए थे। वेदो टोला मोहल्ले में 1954 में जन्मे तालिब हुसैन सुल्तानी को बचपन से ही हो कव्वाली एवं ग़जल गायन का शौक था। प्रारंभिक शिक्षा पिता मतलूब हुसैन से ली जो फारसी कलाम के अनोखे गायक थे।
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छोटी सी उम्र में ही तालिब हुसैन ने अपना नाम पूरे देश में रोशन किया। लगभग दो दर्जन देशों में अपनी कला का परचम लहराया। लंदन, जापान, जर्मन, पेरिस, युगांडा, जद्दा, केनिया व ट्यूनीशिया प्रमुख हैं। कव्वाली को जीवित रखने के लिए उन्होंने बहुत से विभागों में भी कार्यक्रम किए और कई सम्मान से उन्हें नवाजा गया। सूफी संगीत एवं शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ाने की परंपरा को उनका परिवार संभाल रहा है। आज उनकी पुण्यतिथि है। शहर के एक लॉन में उनके बेटे आमिर सुल्तानी एक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसमें उस्ताद सखावत हुसैन रामपुर, सूफी सिंगर जुनेद सुल्तानी, सूफी सिंगर दानिश हुसैन बदायूंनी अपने कलाम पेश करेंगे।
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