फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Sukha

सूखे की मार... जेब खाली, कर्ज में किसान

Sat, 03 Sep 2022 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 03 Sep 2022 12:48 AM IST
विज्ञापन
Sukha
उझानी एक खेत में बोई गई धान की फसल। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं / उझानी। कम बारिश होने का असर खरीफ की फसलों पर दिखने लगा है। अन्य स्रोत से सिंचाई के कारण किसानों की जेबें खाली हो गईं और वे कर्जदार हो गए हैं।
विज्ञापन

धान की फसल बिना बारिश के बढ़ नहीं सकती, सो किसानों ने नलकूपों या फिर डीजल इंजनों का सहारा लिया लेकिन बिजली की किल्लत के बीच एक-दो बार डीजल की जुगाड़ करने में ही जेब खाली हो गई। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों ने ब्याज पर भी रुपये लिए हैं।
विज्ञापन

धान की फसल काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहती है। बारिश अगर कम हो तो कुल लागत का 60 फीसदी खर्च उसकी सिंचाई पर हो जाता है। यूरिया और कीटनाशक का इस्तेमाल भी होता है, लेकिन सिंचाई के लिए निजी नलकूप या फिर डीजल इंजन ही सहारा बनते हैं। धान उत्पादकों में गांव वरी का नगला निवासी नेत्रपाल कहते हैं कि पिछले महीने बिजली की किल्लत की वजह से डीजल इंजनों के जरिये ही सिंचाई करनी पड़ी। डीजल महंगा है। उसका बंदोबस्त करने के लिए छोटे किसानों को सूदखोरों से ब्याज पर भी रुपये लेने पड़े। फिर भी धान बढ़वार नहीं पकड़ पा पाया। उन्होंने कहा कि अगर आगे भी यही स्थिति रही तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसी क्रम में उड़द और बाजरा के लिए भी मौसम का मिजाज विपरीत रहा। पिछले महीने जो समय दोनों फसलों की बुआई का था, तब बारिश नहीं हुई। किसान खेतों की जुताई भी नहीं कर पाए। थोड़े-बहुत किसानों ने पलेवा करके उड़द-बाजरा की बुआई की भी लेकिन पांच-छह दिनों के दौरान ही हल्की बूंदाबांदी ने दानों में कल्ले नहीं फूटने दिए। इसके चलते कुछेक खेतों में दो बार बुआई करनी पड़ी। बाजरा और उड़द की दो बार बुआई करने में किसानों को अतिरिक्त खर्चा भी उठना पड़ा। बताते हैं कि इस बार धान की तरह उड़द और बाजरा के रकबे में गिरावट आई है तो मक्का की फसल पनपने के बाद भी हरियाली नहीं पकड़ पाई है।
-
सब्जी फसलों की रोपाई को लेकर किसान पसोपेश में
फूल गोभी की अगेती फसल बाजार में आ चुकी है। सामान्य दिनों में पकने वाली फूल गोभी की फसल के लिए इसी पखवाड़े पौध की रोपाई का काम करीब 60 फीसदी रकबा में पूरा हो चुका है लेकिन बाकी बचे रकबे में फूल और पत्ता गोभी की रोपाई को लेकर किसान पसोपेश में हैं। फूल गोभी की डिमांड अधिक रहती है तो सब्जी उत्पादक उसी तरफ ज्यादा गौर कर रहे हैं। खेतों में शिमला मिर्च की रोपाई का काम भी शुरू हो चुका है। जिले में शिमला मिर्च उत्पादकों की संख्या में निरंतर इजाफा भी देखने को मिल रहा है।

-
बारिश : साल-दर-साल
वर्ष बारिश
2010-11 889.70 मिमी
2011-12 765.60
2012-13 560.75
2013-14 785.50
2014-15 470.25
2015-16 635.75
2016-17 683.25
2017-18 582.25
2018-19 729.50
2019-20 577.50
2020-21 536.00
2021-22 618.50
(आंकड़े एक जून से 31 मई तक के है। औसतन 836.20 मिमी बरसात हर साल होनी चाहिए। )
-
जनवरी से लेकर अब तक के आंकड़े
माह 2022 औसत बरसात हुई बरसात
जनवरी 19.60 35.00
फरवरी 18.00 27.00
मार्च 13.50 00.00
अप्रैल 05.30 00.00
मई 14.50 49.25
जून 81.30 00.25
जुलाई 268.50 111
अगस्त 228.7 161.75
(मिमी में)
-------------------
जिले में खरीफ की खेती
-बाजरा-एक लाख हेक्टेयर
-धान-82 हजार हेक्टेयर
-उड़द-53 हजार हेक्टयेर
-मक्का-साढ़े सात हजार हेक्टयेर
-
जिले में बरसात औसतन बहुत कम हुई है। इसी वजह से खेती प्रभावित हो रही है, हालांकि किसान नलकूपों के माध्यम से फसलों में पानी लगा रहे हैं। हाल के दिनों में थोड़ी बहुत वर्षा से स्थिति सामान्य है।
-डीके सिंह, जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed