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रामवती और साथी तैयार कर रहीं गन्ने का बीज
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गन्ने की पौध दिखाती जैतपुर पुख्ता गनियाई की महिलाएं। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। आधी आबादी जो ठान ले वे करके ही दम लेती है। दूसरे क्षेत्रों में शिखर पर पहुंची महिलाएं अब वैज्ञानिक तरीके से खेती के मामले में भी आगे आ रहीं हैं। कादरचौक के गांव जैतपुर पुख्ता गनियाई गांव की रामवती का ‘गंगाजल समूह’ वैज्ञानिक तरीके से गन्ने का बीज उगाने का काम कर रहा है।
समूह की 15 महिलाओं ने पड़ोसी जिला कासगंज की न्योली शुगर मिल के निर्देशन में ट्रे में पॉलीबैग के जरिये गन्ने की पौध उगानी शुरू की है। इसे खेत में पानी भरकर धान की तरह रोपा जाएगा। परंपरागत बुआई से इतर इस तरह से गन्ने की खेती करने पर ज्यादा पैदावार का दावा किया जा रहा है। इसमें जैविक खाद का उपयोग किया जा रहा है।
‘गंगाजल स्वयं सहायता समूह’ ने गन्ना की प्रजाति 060 नंबर की पौध तैयार की है। वह पचास खाने वाली ट्रे में पौध तैयार कर नया प्रयोग कर रहीं हैं। गन्ने की एक आंख यानि एक इंच का बीज काटकर ट्रे में पौध तैयार की जा रही है। समूह प्रमुख रामवती के अनुसार एक बीघा खेत में एक हजार पौधे लगेंगे। इस पौध को धान की तरह रोपा जाएगा। खेत में पानी भरकर पौध लगाई जाएगी। यह गन्ने की परंपरागत खेती से अलग है। अब तक किसान गन्ने को काटकर जोतते हुए बोते हैं जिसमें गन्ने में अधिक बीज पड़ता है। पौध विधि से गन्ने का अधिक उत्पादन होगा। पौध में रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया गया है। गोबर की खाद व अन्य जैविक तत्व इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
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रामवती बताती हैं कि उनके क्षेत्र का गन्ना न्योली (कासगंज) जिले की शुगर मिल को जाता है। मिल के अधिकारियों ने उन्हें इस बारे में प्रोत्साहित किया है। उनके परिवार की महिलाओं समेत समूह में करीब 15 महिलाएं हैं जो पौध को तैयार करने में मदद कर रहीं हैं। इससे जो आमदनी होगी उसे समूह से जुड़ी सदस्यों का विकास करने में लगाया जाएगा।
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समूह की 15 महिलाओं ने पड़ोसी जिला कासगंज की न्योली शुगर मिल के निर्देशन में ट्रे में पॉलीबैग के जरिये गन्ने की पौध उगानी शुरू की है। इसे खेत में पानी भरकर धान की तरह रोपा जाएगा। परंपरागत बुआई से इतर इस तरह से गन्ने की खेती करने पर ज्यादा पैदावार का दावा किया जा रहा है। इसमें जैविक खाद का उपयोग किया जा रहा है।
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‘गंगाजल स्वयं सहायता समूह’ ने गन्ना की प्रजाति 060 नंबर की पौध तैयार की है। वह पचास खाने वाली ट्रे में पौध तैयार कर नया प्रयोग कर रहीं हैं। गन्ने की एक आंख यानि एक इंच का बीज काटकर ट्रे में पौध तैयार की जा रही है। समूह प्रमुख रामवती के अनुसार एक बीघा खेत में एक हजार पौधे लगेंगे। इस पौध को धान की तरह रोपा जाएगा। खेत में पानी भरकर पौध लगाई जाएगी। यह गन्ने की परंपरागत खेती से अलग है। अब तक किसान गन्ने को काटकर जोतते हुए बोते हैं जिसमें गन्ने में अधिक बीज पड़ता है। पौध विधि से गन्ने का अधिक उत्पादन होगा। पौध में रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया गया है। गोबर की खाद व अन्य जैविक तत्व इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
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रामवती बताती हैं कि उनके क्षेत्र का गन्ना न्योली (कासगंज) जिले की शुगर मिल को जाता है। मिल के अधिकारियों ने उन्हें इस बारे में प्रोत्साहित किया है। उनके परिवार की महिलाओं समेत समूह में करीब 15 महिलाएं हैं जो पौध को तैयार करने में मदद कर रहीं हैं। इससे जो आमदनी होगी उसे समूह से जुड़ी सदस्यों का विकास करने में लगाया जाएगा।
इस तरह एक आंख वाले गन्ने का बीज तैयार कर खेती में प्रयोग किया जा सकता है। जैविक खेती में यह तकनीक ज्यादा कारगर है। इसमें रासायनिक खाद का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाता। इस गन्ने से जैविक गुड़ भी तैयार किया जा सकता है जिसकी काफी मांग है। - डॉ. संजय कुमार, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र