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जहां लिखा थूकना मना है, वहीं पर पीक मारते हैं लोग
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बदायूं। सरकार भले ही स्वच्छता अभियान चला कर सफाई के दावे और प्रयास करे लेकिन सच्चाई तो यह है कि सरकार के नुमाइंदे ही इस अभियान को पलीता लगाने से नहीं चूक रहे। रही सही कसर कुछ लोग पूरी कर देते हैं जो सफाई का मतलब ही नहीं समझते। सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता अभियान का पालन कितना और किस प्रकार होता है, इसकी हकीकत यहां लगे चेतावनी नोटिस और वहां की दीवारों और शौचालयों से लगाया जा सकता है। अधिकतर सरकारी दफ्तरों की दीवारें और शौचालय पान, गुटका और पान मसाले की पीक से लाल हो चुकी हैं। विभागीय अधिकारी रोजाना अपने दफ्तर में जाते समय इन दीवारों को देखते हैं, लेकिन इन दीवारों की सफाई कराना शायद उन्हें उचित नहीं लगता। सबसे अधिक खराब स्थिति यहां सीएमओ कार्यालय की है। यहां जीने से लेकर कार्यालय की दीवारें गुटका, पान आदि की पीक से लाल हो गई हैं। परिसर में शराब और वीयर की खाली बोतलें भी यहां की व्यवस्था पर सवाल खड़ेे कर रही हैं। विकास भवन और पावर कारपोरेशन कार्यालय की भी हालत ऐसी ही है। मंगलवार को भी इन सरकारी विभागों के कार्यालयों के हाल कुछ ऐसे ही दिखाई दिए।
- कहने को इसका नाम विकास भवन है, जहां से सरकार की ज्यादातर जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित होती हैं, लेकिन इसकी स्थिति देखकर नहीं लगता कि यहां स्वच्छता अभियान का कोई असर दिखाई देता हो। यहां की सीढ़ियों के कोने पान और गुटके की पीक से लाल पड़ चुके हैं। गंदगी इतनी, कि देखकर उल्टी आ जाए। लगता है कि तभी शायद विकास भवन की दीवारों के नीचे का हिस्सा लाल रंग से रंगा है, ताकि गुटखों की पीक ज्यादा दिखाई न दे। एक जगह पर लिखा है दीवार पर थूकना मना है, लेकिन इसे मानता कौन है।
कार्यालय परिसर को साफ रखने के लिए समय-समय पर सफाई के साथ ही रंगाई पुताई कराई जाती है। पान, गुटका खाने वालों को नोटिस के माध्यम से सचेत किया गया हैे। इसके बाद भी लोग पीक मारने से बाज नहीं आ रहे हैं। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता हैं। इसको दिखवाकर साफ कराते हैं।
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- चंद्रशेखर, डीडीओ
- अलापुर रोड स्थित पावर कारपोरेशन के कार्यालय की स्थिति भी ऐसी ही है। यहां भी दीवारों और जीने में जमकर गुटखा थूका गया है, जिसकी वजह से दीवार और जमीन लाल हो गई है। यहां स्थित एक कार्यालय के अंदर कोने में तो इतनी गंदगी है कि वहां खड़ बऌा होना मुश्किल है। अधिकारियों और कर्मचारियों को मानों, इसकी परवाह ही नहीं है। शौचालय की हालत भी यहां सही नहीं है। वहां भी लोगों ने थूक दिया है। अधिकारियों का तर्क होता है कि यहां आने वाले लोग नहीं मानते।
- सीएमओ कार्यालय महिला अस्पताल परिसर में स्थित है। अस्पताल, यानी वह जगह जहां आने वाले मरीजों की बीमारियां सही होती हैं, लेकिन सीएमओ कार्यालय का हाल ये है कि यदि यहां कोई व्यक्ति आ जाए तो गंदगी देखकर ही उसका जी मिचला जाए। यहां जाने वाले हर रास्ते पर गुटखे की पीक से दीवारें रंगी हैं। शौचालय और वॉशवेसिन में गंदगी भरी है, जिसकी वजह से यहां बदबू भी आती रहती हैं। यहां जमीन और दीवार दोनों पीक से रंगी हैं। जीने में जगह-जगह कोनों में लोगों ने गुटखा थूका हुआ था। हालांकि यहां जीने में कई जगह कूड़ेदान भी रखे हैँ, लेकिन उसका प्रयोग शायद ही होता हो।
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- कहने को इसका नाम विकास भवन है, जहां से सरकार की ज्यादातर जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित होती हैं, लेकिन इसकी स्थिति देखकर नहीं लगता कि यहां स्वच्छता अभियान का कोई असर दिखाई देता हो। यहां की सीढ़ियों के कोने पान और गुटके की पीक से लाल पड़ चुके हैं। गंदगी इतनी, कि देखकर उल्टी आ जाए। लगता है कि तभी शायद विकास भवन की दीवारों के नीचे का हिस्सा लाल रंग से रंगा है, ताकि गुटखों की पीक ज्यादा दिखाई न दे। एक जगह पर लिखा है दीवार पर थूकना मना है, लेकिन इसे मानता कौन है।
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कार्यालय परिसर को साफ रखने के लिए समय-समय पर सफाई के साथ ही रंगाई पुताई कराई जाती है। पान, गुटका खाने वालों को नोटिस के माध्यम से सचेत किया गया हैे। इसके बाद भी लोग पीक मारने से बाज नहीं आ रहे हैं। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता हैं। इसको दिखवाकर साफ कराते हैं।
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- चंद्रशेखर, डीडीओ
- अलापुर रोड स्थित पावर कारपोरेशन के कार्यालय की स्थिति भी ऐसी ही है। यहां भी दीवारों और जीने में जमकर गुटखा थूका गया है, जिसकी वजह से दीवार और जमीन लाल हो गई है। यहां स्थित एक कार्यालय के अंदर कोने में तो इतनी गंदगी है कि वहां खड़ बऌा होना मुश्किल है। अधिकारियों और कर्मचारियों को मानों, इसकी परवाह ही नहीं है। शौचालय की हालत भी यहां सही नहीं है। वहां भी लोगों ने थूक दिया है। अधिकारियों का तर्क होता है कि यहां आने वाले लोग नहीं मानते।
- सीएमओ कार्यालय महिला अस्पताल परिसर में स्थित है। अस्पताल, यानी वह जगह जहां आने वाले मरीजों की बीमारियां सही होती हैं, लेकिन सीएमओ कार्यालय का हाल ये है कि यदि यहां कोई व्यक्ति आ जाए तो गंदगी देखकर ही उसका जी मिचला जाए। यहां जाने वाले हर रास्ते पर गुटखे की पीक से दीवारें रंगी हैं। शौचालय और वॉशवेसिन में गंदगी भरी है, जिसकी वजह से यहां बदबू भी आती रहती हैं। यहां जमीन और दीवार दोनों पीक से रंगी हैं। जीने में जगह-जगह कोनों में लोगों ने गुटखा थूका हुआ था। हालांकि यहां जीने में कई जगह कूड़ेदान भी रखे हैँ, लेकिन उसका प्रयोग शायद ही होता हो।