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आध्यात्मिक, नैतिक संस्कृति को भूलना हमारी सबसे बड़ी भूल
ब्यूरो/बदायूं
Updated Sat, 17 Dec 2016 11:58 PM IST
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आध्यात्मिक, नैतिक संस्कृति को भूलना हमारी सबसे बड़ी भूल
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भारत दुनिया का विशाल लोकतंत्र है। इसकी जलवायु व संस्कृति विविधता पूर्ण है। इन विशेषताओं के बल पर भारत सदैव विकास के पथ पर अग्रसर होता रहा है लेकिन चुनौतियां, समस्याएं और विकृतियां हमें हमारा अभीष्ट प्राप्त होने नहीं देती। ये विचार राजकीय महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन ने रखे।
स्वतंत्र भारत का सिंहावलोकन और भावी संभावनाएं विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कुलपति प्रोफेसर हुसैन ने नैनो टेक्नोलॉजी के विकास, पर्यावरण संरक्षण और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के विजन 2020 के सिद्धांत की व्याख्या की। समाधान की दिशा में युवाओं को आगे आने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता शिक्षाविद डॉ. एनएल शर्मा ने कहा कि स्वतंत्र भारत में हम महाशक्ति के रूप में स्थापित हों, इसके लिए ज्ञान-विज्ञान तकनीकी पर शोध कार्य अनवरत चलते रहने चाहिए। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. आरपी यादव ने भारत की भावी संभावनाओं के लिए संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की बात कहीं। उन्होंने स्वयं की शोध की गई शिक्षा प्रणाली का मॉडल भी प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि एमएचपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में मानव और मशीन में संघर्ष चल रहा है। भारत में भौतिक संस्कृति को स्वीकार करते हुए आध्यात्मिक व नैतिक संस्कृति को भूलना हमारी सबसे बड़ी भूल होगी। रुद्रपुर राजकीय डिग्री कॉलेज के डॉ. एमसी पांडेय ने भारतीय सभ्यता व संस्कृति पर प्रकाश डाला। पीजी कॉलेज बीसलपुर की पूर्व प्राचार्या डॉ. शीला रानी खरे ने भी विचार रखे। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. एसपी खरे ने कहा कि जब तक भारत शिक्षा नीति विकास परक और भारत केंद्रित नहीं होगी, तब तक समस्याएं आती रहेंगी। इस मौके पर सेमिनार की स्मारिका का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पीके वार्ष्णेय, डॉ. एसके श्रीवास्तव, बरेली कॉलेज की डॉ. चारू मेहरोत्रा, डॉ. पीके गर्ग, डॉ. बसुधा, डॉ. मोहम्मद असलम, डॉ. एपी सिंह, डॉ. विशाल दुबे, डॉ. साधना अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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स्वतंत्र भारत का सिंहावलोकन और भावी संभावनाएं विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कुलपति प्रोफेसर हुसैन ने नैनो टेक्नोलॉजी के विकास, पर्यावरण संरक्षण और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के विजन 2020 के सिद्धांत की व्याख्या की। समाधान की दिशा में युवाओं को आगे आने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता शिक्षाविद डॉ. एनएल शर्मा ने कहा कि स्वतंत्र भारत में हम महाशक्ति के रूप में स्थापित हों, इसके लिए ज्ञान-विज्ञान तकनीकी पर शोध कार्य अनवरत चलते रहने चाहिए। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. आरपी यादव ने भारत की भावी संभावनाओं के लिए संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की बात कहीं। उन्होंने स्वयं की शोध की गई शिक्षा प्रणाली का मॉडल भी प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि एमएचपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में मानव और मशीन में संघर्ष चल रहा है। भारत में भौतिक संस्कृति को स्वीकार करते हुए आध्यात्मिक व नैतिक संस्कृति को भूलना हमारी सबसे बड़ी भूल होगी। रुद्रपुर राजकीय डिग्री कॉलेज के डॉ. एमसी पांडेय ने भारतीय सभ्यता व संस्कृति पर प्रकाश डाला। पीजी कॉलेज बीसलपुर की पूर्व प्राचार्या डॉ. शीला रानी खरे ने भी विचार रखे। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. एसपी खरे ने कहा कि जब तक भारत शिक्षा नीति विकास परक और भारत केंद्रित नहीं होगी, तब तक समस्याएं आती रहेंगी। इस मौके पर सेमिनार की स्मारिका का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पीके वार्ष्णेय, डॉ. एसके श्रीवास्तव, बरेली कॉलेज की डॉ. चारू मेहरोत्रा, डॉ. पीके गर्ग, डॉ. बसुधा, डॉ. मोहम्मद असलम, डॉ. एपी सिंह, डॉ. विशाल दुबे, डॉ. साधना अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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