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मौका मिले तो बदायूं की बेटियां भी लगा सकती हैं मिताली की तरह चौके-छक्के
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बदायूं। बांग्लादेश पर जीत के साथ ही महिला वर्ल्ड कप में भारत के सेमीफाइनल में पहुंचने की संभावना बरकार है। बदायूं की बात करें तो यहां महिला क्रिकेट टीम की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। ऐसा नहीं है कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक की बेटियों में कुशल क्रिकेटर बनने का हौसला या जुनून कम है, पर संसाधनों की कमी और स्टेडियम की शहर से दूरी इसमें आड़े आ जाती है। अगर यहां की बेटियों को सभी सुविधाएं मिल जाएं तो वे भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज की तरह मैदान पर चौके-छक्के लगा सकती हैं।
स्पोर्ट्स स्टेडियम शहर से करीब तीन किमी दूर बिल्सी रोड पर बहेड़ी गांव के पास बना है। यहां जिला क्रीड़ाधिकारी अमित रिछारिया खुद टेनिस के कोच के तौर पर सेवा देते हैं तो दूसरे कोच देशकांत त्यागी हैं जो एथलेटिक्स के कोच के रूप में काम कर रहे हैं। बाकी किसी खेल के लिए यहां कोच का अभाव है। फिलहाल तो दो साल से कोरोना के चलते खेल गतिविधियां ही ठप पड़ी हैं। ऐसे में कुछ खिलाड़ी यहां सीखने आते भी हैं तो उन खेलों के सीनियर खिलाड़ी ही उन्हें गाइड करते हैं। क्रिकेटर भी इस लिहाज से उपेक्षित ही हैं। कोच न होने की वजह से स्टेडियम से खेल संबंधी सामान भी जारी नहीं हो पाता। नए क्रिकेटर यहां अपनी ही किट लेकर आते हैं और वरिष्ठों के साथ खेलते या सीखते हैं।
महिला क्रिकेट को लेकर स्टेडियम में आज तक कोई कवायद नहीं हो सकी है। न तो कभी लड़कियों की ओर से इस बारे में स्टेडियम या अधिकारियों को आवेदन दिया गया और न ही अधिकारियों ने ही कभी कॉलेज स्तर पर बात करके टीम बनाने या खेल कराने की जरूरत समझी है। कॉलेज स्तर से भी प्रयास का अभाव रहा है।
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खिलाड़ियों की राह के रोड़े
- शहर से स्टेडियम की दूरी
- क्रिकेट कोच न होना
- स्कूल व कॉलेज स्तर पर खेल मैदान व कोच का अभाव
- विद्यालयों में खेल संसाधन कम होना
- ग्रामीण क्षेत्र में महिला क्रिकेट को लेकर अभिभावकों की बंदिशें
- समय-समय पर क्रिकेट टूर्नामेंट न होना
- अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के स्तर पर खेल को लेकर उदासीनता
-
अप्रैल में भेजेंगे क्रिकेट कोच का प्रस्ताव
स्टेडियम में काफी समय से क्रिकेट के कोच नहीं हैं। पुराने खिलाड़ी ही नए लोगों को क्रिकेट सिखा रहे हैं। महिला क्रिकेट को लेकर तो कभी किसी खिलाड़ी ने भी मांग नहीं की। हालांकि मौजूदा दौर में क्रिकेट का क्रेज सर्वाधिक है। अप्रैल में हमारे यहां से प्रस्ताव जाने हैं। इस बार क्रिकेट कोच का प्रस्ताव जरूर भेजेंगे। खेल निदेशालय से स्वीकृति मिली तो इससे जिले के खिलाड़ियों को काफी लाभ होगा।
- अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ाधिकारी
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मैं छह साल से जिले में हूं। पहले खेल व खिलाड़ियों को लेकर स्थिति ज्यादा चिंताजनक थी पर अब ऐसा नहीं है। मेरे सिखाए हुए खिलाड़ी भी एथलेटिक्स में नाम कर रहे हैं। क्रिकेट को लेकर लोगों में रोमांच है। महिला क्रिकेटरों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है पर कई लड़के स्टेडियम में सुबह मैच खेलने व सीखने आते हैं। उन्हीं के वरिष्ठ खिलाड़ी उन्हें क्रिकेट के गुर सिखाते हैं। क्रिकेट के कोच मिलने की स्थिति में खिलाड़ी जरूर आगे बढ़ेंगे।
- देशकांत त्यागी, एथलेटिक्स कोच
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क्रिकेट में कमाल करने को तैयार हो रहीं बदायूं की बेटियां
बदायूं। बदायूं में भी महिला क्रिकेट को लेकर चेतना जागृत हो रही है। महिला क्रिकेट का यहां पुराना इतिहास नहीं रहा पर नए दौर में डिग्री कॉलेज स्तर पर टीम बनाकर आंतरिक मैच जरूर कराए जा रहे हैं। कोरोना की वजह से दो साल से महिला क्रिकेट मैच कायदे से हो भी नहीं सके हैं पर अब वक्त के साथ माहौल बदलने की तैयारी है। सब-कुछ ठीक रहा तो महिला क्रिकेटरों की टीम जल्द ही मैदान में चौके छक्के मारती नजर आएगी। टीम की कुछ खिलाड़ियों से हमने उनके क्रिकेट के प्रति लगाव व भविष्य को लेकर बात की तो उन्होंने खुलकर मन की बात साझा की।
-
क्रिकेट को लेकर शुरू से मन में रोमांच था। टीवी पर मैच देखकर खेल के प्रति लगाव बढ़ा फिर भदवार गर्ल्स इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सहेलियों ने इंटरवेल में क्रिकेट खेलना शुरू किया तो कॉलेज प्रशासन ने हमारे लिए अलग से कोच की व्यवस्था कर दी। वहां से कुछ सीखकर यहां आए तो हम लोगों ने टीम बना ली है। इसे कॉलेज स्तर से आगे ले जाने का प्रयास है।
- प्रगति शाक्य, टीम कैप्टन
-
मुझे क्रिकेट शुरू से पसंद था। पहले छोटी थी तो गली में भाई लोगों के साथ क्रिकेट खेला। बाद में जब राजकीय डिग्री कॉलेज में एडमिशन कराया तो यहां आकर टीम के साथ खेलने का मौका मिला। परिवार ने कभी मुझ पर खेलने की बंदिश नहीं लगाई। आगे इस क्षेत्र में जाना है या नहीं, यह मेरी इच्छा पर ही निर्भर करेगा।
- रूपल मान, उझानी
-
मुझे क्रिकेट शुरू से अच्छा लगता है। पहले क्रिकेट मैच देखने का जुनून था तो अब मैदान में सहेलियों के साथ मैच खेलने में मचा आता है। इस खेल की सबसे अच्छी बात है कि हम लोगों में टीम भावना विकसित हुई है। भविष्य को लेकर अभी कुछ नहीं सोचा है कि क्रिकेट में क्या करना है। फिलहाल हम लोग अपने कॉलेज स्तर पर ही खेल रहे हैं।
- सुषमा, बिल्सी
-
मैं इस टीम की नई खिलाड़ी हूं। करीब छह महीने पहले मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया है। अभी उतना ज्ञान नहीं है जितना पहले से इस टीम में शामिल खिलाड़ियों को है। मैं निरंतर नया सीखने का प्रयास करती हूं। परिवार की ओर से कभी खेलने पर नहीं टोका गया। आगे सफल हुई तो इस खेल में कॅरियर के बारे में सोचूंगी। - पारुल तोमर, बदायूं
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स्पोर्ट्स स्टेडियम शहर से करीब तीन किमी दूर बिल्सी रोड पर बहेड़ी गांव के पास बना है। यहां जिला क्रीड़ाधिकारी अमित रिछारिया खुद टेनिस के कोच के तौर पर सेवा देते हैं तो दूसरे कोच देशकांत त्यागी हैं जो एथलेटिक्स के कोच के रूप में काम कर रहे हैं। बाकी किसी खेल के लिए यहां कोच का अभाव है। फिलहाल तो दो साल से कोरोना के चलते खेल गतिविधियां ही ठप पड़ी हैं। ऐसे में कुछ खिलाड़ी यहां सीखने आते भी हैं तो उन खेलों के सीनियर खिलाड़ी ही उन्हें गाइड करते हैं। क्रिकेटर भी इस लिहाज से उपेक्षित ही हैं। कोच न होने की वजह से स्टेडियम से खेल संबंधी सामान भी जारी नहीं हो पाता। नए क्रिकेटर यहां अपनी ही किट लेकर आते हैं और वरिष्ठों के साथ खेलते या सीखते हैं।
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महिला क्रिकेट को लेकर स्टेडियम में आज तक कोई कवायद नहीं हो सकी है। न तो कभी लड़कियों की ओर से इस बारे में स्टेडियम या अधिकारियों को आवेदन दिया गया और न ही अधिकारियों ने ही कभी कॉलेज स्तर पर बात करके टीम बनाने या खेल कराने की जरूरत समझी है। कॉलेज स्तर से भी प्रयास का अभाव रहा है।
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खिलाड़ियों की राह के रोड़े
- शहर से स्टेडियम की दूरी
- क्रिकेट कोच न होना
- स्कूल व कॉलेज स्तर पर खेल मैदान व कोच का अभाव
- विद्यालयों में खेल संसाधन कम होना
- ग्रामीण क्षेत्र में महिला क्रिकेट को लेकर अभिभावकों की बंदिशें
- समय-समय पर क्रिकेट टूर्नामेंट न होना
- अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के स्तर पर खेल को लेकर उदासीनता
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अप्रैल में भेजेंगे क्रिकेट कोच का प्रस्ताव
स्टेडियम में काफी समय से क्रिकेट के कोच नहीं हैं। पुराने खिलाड़ी ही नए लोगों को क्रिकेट सिखा रहे हैं। महिला क्रिकेट को लेकर तो कभी किसी खिलाड़ी ने भी मांग नहीं की। हालांकि मौजूदा दौर में क्रिकेट का क्रेज सर्वाधिक है। अप्रैल में हमारे यहां से प्रस्ताव जाने हैं। इस बार क्रिकेट कोच का प्रस्ताव जरूर भेजेंगे। खेल निदेशालय से स्वीकृति मिली तो इससे जिले के खिलाड़ियों को काफी लाभ होगा।
- अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ाधिकारी
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मैं छह साल से जिले में हूं। पहले खेल व खिलाड़ियों को लेकर स्थिति ज्यादा चिंताजनक थी पर अब ऐसा नहीं है। मेरे सिखाए हुए खिलाड़ी भी एथलेटिक्स में नाम कर रहे हैं। क्रिकेट को लेकर लोगों में रोमांच है। महिला क्रिकेटरों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है पर कई लड़के स्टेडियम में सुबह मैच खेलने व सीखने आते हैं। उन्हीं के वरिष्ठ खिलाड़ी उन्हें क्रिकेट के गुर सिखाते हैं। क्रिकेट के कोच मिलने की स्थिति में खिलाड़ी जरूर आगे बढ़ेंगे।
- देशकांत त्यागी, एथलेटिक्स कोच
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क्रिकेट में कमाल करने को तैयार हो रहीं बदायूं की बेटियां
बदायूं। बदायूं में भी महिला क्रिकेट को लेकर चेतना जागृत हो रही है। महिला क्रिकेट का यहां पुराना इतिहास नहीं रहा पर नए दौर में डिग्री कॉलेज स्तर पर टीम बनाकर आंतरिक मैच जरूर कराए जा रहे हैं। कोरोना की वजह से दो साल से महिला क्रिकेट मैच कायदे से हो भी नहीं सके हैं पर अब वक्त के साथ माहौल बदलने की तैयारी है। सब-कुछ ठीक रहा तो महिला क्रिकेटरों की टीम जल्द ही मैदान में चौके छक्के मारती नजर आएगी। टीम की कुछ खिलाड़ियों से हमने उनके क्रिकेट के प्रति लगाव व भविष्य को लेकर बात की तो उन्होंने खुलकर मन की बात साझा की।
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क्रिकेट को लेकर शुरू से मन में रोमांच था। टीवी पर मैच देखकर खेल के प्रति लगाव बढ़ा फिर भदवार गर्ल्स इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सहेलियों ने इंटरवेल में क्रिकेट खेलना शुरू किया तो कॉलेज प्रशासन ने हमारे लिए अलग से कोच की व्यवस्था कर दी। वहां से कुछ सीखकर यहां आए तो हम लोगों ने टीम बना ली है। इसे कॉलेज स्तर से आगे ले जाने का प्रयास है।
- प्रगति शाक्य, टीम कैप्टन
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मुझे क्रिकेट शुरू से पसंद था। पहले छोटी थी तो गली में भाई लोगों के साथ क्रिकेट खेला। बाद में जब राजकीय डिग्री कॉलेज में एडमिशन कराया तो यहां आकर टीम के साथ खेलने का मौका मिला। परिवार ने कभी मुझ पर खेलने की बंदिश नहीं लगाई। आगे इस क्षेत्र में जाना है या नहीं, यह मेरी इच्छा पर ही निर्भर करेगा।
- रूपल मान, उझानी
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मुझे क्रिकेट शुरू से अच्छा लगता है। पहले क्रिकेट मैच देखने का जुनून था तो अब मैदान में सहेलियों के साथ मैच खेलने में मचा आता है। इस खेल की सबसे अच्छी बात है कि हम लोगों में टीम भावना विकसित हुई है। भविष्य को लेकर अभी कुछ नहीं सोचा है कि क्रिकेट में क्या करना है। फिलहाल हम लोग अपने कॉलेज स्तर पर ही खेल रहे हैं।
- सुषमा, बिल्सी
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मैं इस टीम की नई खिलाड़ी हूं। करीब छह महीने पहले मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया है। अभी उतना ज्ञान नहीं है जितना पहले से इस टीम में शामिल खिलाड़ियों को है। मैं निरंतर नया सीखने का प्रयास करती हूं। परिवार की ओर से कभी खेलने पर नहीं टोका गया। आगे सफल हुई तो इस खेल में कॅरियर के बारे में सोचूंगी। - पारुल तोमर, बदायूं