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Budaun News: गंभीर दिव्यांगों को घर पर पढ़ाने जाएंगे विशेष शिक्षक
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बदायूं। गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों की अब घर पर ही पढ़ाई कराई जाएगी। इन बच्चों को शिक्षण सामग्री भी घर पर ही उपलब्ध कराई जाएगी। इसका लाभ उन बच्चों को ही मिल सकेगा, जो दिव्यांगता के कारण विद्यालय आने में असमर्थ हैं। जिले में तैनात विशेष प्रशिक्षक (स्पेशल एजूकेटर्स) उनके घर जाकर बच्चों को शिक्षित कराने का काम करेंगे।
जिले में 1300 ऐसे दिव्यांग बच्चों की पहचान की जानी है जिनके स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है। इनमें 300 ऐसे बच्चे चयनित किए जाने हैं जो अति गंभीर दिव्यांगता की श्रेणी में आते हों। जो बच्चे विद्यालय पहुंचने में असमर्थ हों, साथ ही सही से बैठ भी नहीं पाते हों। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन बच्चों को होमबेस्ड एजुकेशन देने का इंतजाम किया है। इसके लिए उपयोगी उपकरणों की खरीद भी की गई है। ये उपकरण उनको घर पर ही मुहैया कराए जाएंगे। उनको पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षक लगाए गए हैं, जो उन्हें उनके घर पढ़ाने जाएंगे, साथ ही परिवार के सदस्यों को बताएंगे कि वह किस प्रकार बच्चों को अपने आप भी शिक्षित करें।
प्रति बच्चा 3500 रुपये किए जाएंगे खर्च
उपकरणों पर प्रति बच्चा 3500 रुपये खर्च किया जाएगा। लकड़ी व प्लास्टिक के विभिन्न मॉडल, अल्फाबेटिकल हिंदी-अंग्रेजी, नंबर आकार, आकृति, म्यूजिकल उपकरण, शरीर के अंग, किचन व डॉक्टर सेट, फल, सब्जियां, यातायात के साधन, विभिन्न प्रकार के पैग बोर्ड के अलावा पिक्टोरियल चादर्स, हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती, पहाड़ा, पशु-पक्षियों के चार्ट और दैनिक जीवन से संबंधित क्रियाकलाप से अन्य उपयोगी उपकरण मुहैया कराए जाएंगे।
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शासन से 300 दिव्यांग बच्चों का चिह्नांकन किया जाना है, जो स्कूल आने और यहां पर बैठने के लिए सक्षम नहीं हैं। अब तक 170 बच्चों का चिह्नांकन किया जा चुका है। जल्द ही अन्य बच्चों का चिह्नांकन कर लिया जाएगा। - जितेंद्र कुमार, जिला समन्वयक समेकित शिक्षा
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जिले में 1300 ऐसे दिव्यांग बच्चों की पहचान की जानी है जिनके स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है। इनमें 300 ऐसे बच्चे चयनित किए जाने हैं जो अति गंभीर दिव्यांगता की श्रेणी में आते हों। जो बच्चे विद्यालय पहुंचने में असमर्थ हों, साथ ही सही से बैठ भी नहीं पाते हों। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन बच्चों को होमबेस्ड एजुकेशन देने का इंतजाम किया है। इसके लिए उपयोगी उपकरणों की खरीद भी की गई है। ये उपकरण उनको घर पर ही मुहैया कराए जाएंगे। उनको पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षक लगाए गए हैं, जो उन्हें उनके घर पढ़ाने जाएंगे, साथ ही परिवार के सदस्यों को बताएंगे कि वह किस प्रकार बच्चों को अपने आप भी शिक्षित करें।
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प्रति बच्चा 3500 रुपये किए जाएंगे खर्च
उपकरणों पर प्रति बच्चा 3500 रुपये खर्च किया जाएगा। लकड़ी व प्लास्टिक के विभिन्न मॉडल, अल्फाबेटिकल हिंदी-अंग्रेजी, नंबर आकार, आकृति, म्यूजिकल उपकरण, शरीर के अंग, किचन व डॉक्टर सेट, फल, सब्जियां, यातायात के साधन, विभिन्न प्रकार के पैग बोर्ड के अलावा पिक्टोरियल चादर्स, हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती, पहाड़ा, पशु-पक्षियों के चार्ट और दैनिक जीवन से संबंधित क्रियाकलाप से अन्य उपयोगी उपकरण मुहैया कराए जाएंगे।
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शासन से 300 दिव्यांग बच्चों का चिह्नांकन किया जाना है, जो स्कूल आने और यहां पर बैठने के लिए सक्षम नहीं हैं। अब तक 170 बच्चों का चिह्नांकन किया जा चुका है। जल्द ही अन्य बच्चों का चिह्नांकन कर लिया जाएगा। - जितेंद्र कुमार, जिला समन्वयक समेकित शिक्षा