बदायूं: सपा से शहर सीट पर काजी रिजवान को टिकट, धर्मेंद्र यादव से तल्खी ने बिगाड़ा आबिद का खेल
काजी मोहम्मद रिजवान को सपा ने शहर सीट से प्रत्याशी बनाया है। वहीं टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल आबिद को धर्मेंद्र यादव से तल्खी भारी पड़ गई है। 2016 में आबिद रजा का धर्मेंद्र यादव से विवाद हो गया था।
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बदायूं शहर सीट से सपा के टिकट को लेकर बना संशय सोमवार को पूरी तरह से दूर हो गया। हाल ही में बसपा छोड़कर सपा में शामिल होने वाले काजी मोहम्मद रिजवान को सपा ने शहर सीट से प्रत्याशी बनाया है। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव से आबिद की तल्खी के चलते पार्टी ने आबिद को किनारे कर दिया। इसके बाद अब शहर सीट पर घमासान ज्यादा होने के आसार बढ़ गए हैं।
काजी मोहम्मद रिजवान ने 2017 का चुनाव बसपा के टिकट पर शेखूपुर विधानसभा से लड़ा था। पिछले दिनों वह पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव के नजदीक आए और बाद में लखनऊ में सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव की मौजूदगी में सपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि शहर सीट पर सपा की ओर से रिजवान को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इधर, आबिद रजा 2012 में शहर सीट से सपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। 2016 में आबिद रजा का धर्मेंद्र यादव से विवाद हो गया था। अंडरग्राउंड बिजली केबल को लेकर आबिद रजा ने धर्मेंद्र यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सपा में न होने के बावजूद आबिद की आजम खां से नजदीकी बनी रही।
आबिद रजा ने कई बार जेल में बंद आजम खां से मुलाकात की
पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम शेरवानी के सपा में शामिल होने के बाद अक्तूबर 2021 में बदायूं आए तो पहले आबिद रजा के आवास पर गए। यहां शेरवानी ने यह भी कहा कि वह आबिद रजा के टिकट के लिए लड़ेंगे। इसके बाद राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गईं थीं। आबिद रजा ने कई बार सीतापुर जेल में बंद आजम खां से भी मुलाकात की। पिछले दिनों आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम ने लखनऊ में अखिलेश यादव से मिलकर आबिद के नाम की पैरवी की।
मूल रूप से अलापुर के निवासी काजी मोहम्मद रिजवान का एक घर शहर में चक्कर वाली सड़क पर भी है। वर्ष 2017 में शेखूपुर सीट से उन्होंने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भाजपा के धर्मेंद्र शाक्य विधायक चुने गए। उनको 93 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। सपा के आशीष यादव 70 हजार से ज्यादा वोट पाकर दूसरे और काजी रिजवान 64 हजार से ज्यादा वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। काजी रिजवान के परिवार का राजनीति में दखल रहा है। उनकी मां नाज बी अलापुर नगर पंचायत की मौजूदा चेयरमैन हैं। उनके चाचा मोहम्मद अली हमजा भी दो बाद चेयरमैन रह चुके हैं। रिजवान के साथ अली हमजा भी पिछले दिनों पूर्व सांसद धर्मेंद्र की पैरवी पर सपा में शामिल हुए थे।
वक्फ विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष आबिद रजा के पीआरओ सरताज खान ने मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से आबिद रजा की सोमवार को मुलाकात हुई है। उन्होंने मंगलवार को फिर बुलाया है। उनसे मुलाकात के बाद आबिद रजा अपने भविष्य को लेकर फैसला लेंगे। बता दें कि 2012 के विधानसभा चुनाव में शहर सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक महेश गुप्ता और बिनावर सीट से मौजूदा विधायक राम सेवक सिंह पटेल को हरा कर शहर सीट पर आबिद ने कब्जा किया था।
आबिद रजा ने सपा से विधायक रहते हुए 2016 में सांसद धर्मेंद्र यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। लोगों को लगा था कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा आबिद रजा से किनारा कर सकती है। इसके बाद भी वह 2017 के चुनाव में सपा से टिकट हासिल करने में कामयाब हो गए थे। इस चुनाव में भाजपा के महेश गुप्ता ने आबिद रजा को शिकस्त दे दी। चुनाव हारने के बाद आबिद और धर्मेंद्र यादव के बीच दूरियां बढ़ती गईं। आबिद रजा मुस्लिम चेहरा होने के नाते आजम खां और सलीम शेरवानी के सहारे थे, लेकिन धर्मेंद्र यादव की नाराजगी के कारण सपा ने आबिद रजा से किनारा कर लिया। संवाद