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घटतौली : तराजू में चुंबक व नकली वजन का खेल... जरा चूके तो कट जाएगी जेब

Sat, 22 Nov 2025 01:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:52 AM IST
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Shortage: The game of magnets and fake weights in the scales... If you miss even a bit, your pocket will be cut.
दिनेश कुमार गुप्ता
बदायूं। जिले में वजन-तौल की गड़बड़ी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। तराजू में चुंबक लगाकर वजन बढ़ाने या घटाने जैसा फर्जीवाड़ा, नकली बाटों का इस्तेमाल और ईंट-गारे से तौलने वाली तरकीबें बाजारों में खुलेआम चल रहीं हैं।
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बाट-माप विभाग की सख्ती के बावजूद कई दुकानदार गलत तरीके अपना ग्राहकों को लूट रहे हैं। विभाग ने एक साल में 98 केस दर्ज किए हैं, जिनमें प्रमाणपत्र नहीं होना, समय पर सत्यापन न कराना, नकली बाटों का उपयोग और चुंबक लगे तराजू से घटतौली प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनमें 65 व्यापारियों से 3.75 लाख रुपये जुर्माना भी वसूला जा चुका है।
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बाट-माप विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में लगभग 5500 व्यापारी पंजीकृत हैं। सदर, बिल्सी और सहसवान, दातागंज, बिसौली पांच तहसीलों में हजारों दुकानदार हैं, जो तौल में बाट-माप का इस्तेमाल करते हैं। जिले में दातागंज, सदर व बिसौली में बाट-माप विभाग के कार्यालय हैं। यहां तैनात निरीक्षक समय-समय पर विभाग की टीमों के साथ चेकिंग अभियान चलाते हैं। इसके अलावा विभाग लगातार पंजीकरण बढ़ाने और नियमित सत्यापन को अनिवार्य करने की दिशा में काम कर रहा है।
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कुछ मिष्ठान भंडारों पर 50 से 100 ग्राम तक मिली घटतौली
विभाग की निरीक्षण टीमों की छापा मारी में सामने आया कि घटतौली के 13 मामले सीधे पकड़ में आए, जिनमें अधिकांश मिष्ठान की दुकानों के थे। त्योहारों और समारोहों में बढ़ी मांग के समय इस तरह की गड़बड़ी और बढ़ जाती है। टीम ने पाया कि कुछ दुकानों में 50 से 100 ग्राम तक वजन कम निकला। कई जगह चुंबक लगे तराजू, कहीं असत्यापित इलेक्ट्रॉनिक मशीन तो कहीं नकली बाट उपयोग में लाए जा रहे थे। ऐसे मामलों में 2000 से 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है, जिसे विभाग सख्ती से लागू कर रहा है।

बाटों का हर दो साल में सत्यापन होता है जरूरी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि मैनुअल तराजू (बाट वाले) हर 2 साल में सत्यापन जरूरी, बाट (वजन मापने वाले भारी उपकरण) हर 2 साल, इलेक्ट्रॉनिक तराजू का हर साल सत्यापन अनिवार्य है। व्यापारी स्वयं www.legalmetrology-up.gov.in पर ट्रेडर रजिस्ट्रेशन में जाकर आवेदन कर सकते हैं।


व्यापारी बोले- घटतौली करता है कोई, परेशानी होती है पूरे वर्ग को को



हर दुकान गलत नहीं होती, लेकिन कुछ लोग चुंबक या नकली वजन से जो खेल करते हैं, उसका नुकसान पूरे व्यापारी वर्ग को भुगतना पड़ता है। ग्राहक का भरोसा टूटता है, विभाग की सख्ती एक दम सही है। - दिनेश कुमार गुप्ता, किराना व्यापारी


ऑनलाइन पंजीकरण और सत्यापन ने हमारे काम को आसान किया है। कई छोटे व्यापारी अब भी इस प्रक्रिया से अनजान हैं। उन्हें जागरूक करना जरूरी है। जो गलत तराजू रखते हैं, वे खुद व्यापार की छवि खराब करते हैं। - प्रमोद गुप्ता, व्यापारी


बाजारों में कुछ ठेलेवाले चुंबक लगे कट्टे का इस्तेमाल कर ग्राहकों को ठगते हैं। इससे हमें भी बदनाम होना पड़ता है। विभाग अगर मोहल्लों तक निरीक्षण बढ़ाए तो ये खेल बंद हो सकता है। - संजय शर्मा, व्यापारी


नियम स्पष्ट हैं, लेकिन कई व्यापारी लापरवाही कर देते हैं। एक बार सत्यापन नहीं कराया और केस दर्ज हो गया। विभाग अगर समय-समय पर वर्कशॉप करे तो समस्या कम होगी। घटतौली करने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। - राजेश गुप्ता, व्यापारी


ग्राहकों की चुप्पी बढ़ावा देते है घटतौली को
जिले के बाजारों में खरीददारी करने आने वाले कई ग्राहक तराजू पर सत्यापन स्टिकर या हॉलमार्क चिह्न देखना ही भूल जाते हैं। विभाग के अनुसार, बहुत कम लोग शिकायत दर्ज कराते हैं। कुछ ग्राहक तराजू में हेरफेर को पहचान नहीं पाते। वजन कम होने पर भी कई लोग विवाद से बचने के लिए चुप रहते हैं। यह स्थिति घटतौली के धंधे को और बढ़ावा देती है।


ग्राहकों से अपील- सतर्क रहें, गड़बड़ी की करें शिकायत
विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि सनद (स्टिकर) वाले तराजू से ही सामान तौलें, भुगतान से पहले वजन अवश्य जांचें। संदिग्ध तराजू या चुंबक दिखे तो तुरंत शिकायत करें, रसीद लेना न भूलें। विभाग का मानना है कि जब ग्राहक जागरूक होगा, तभी बाज़ार में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत काम करने वालों पर लगाम लगेगी।


पेट्रोल पंप, गन्ना तौल, धर्मकांटों की भी होती है
जांच जिले के सभी पेट्रोल पंप, गन्ना तौल केंद्र, चीनी व राइस, फ्लोर मिल, कोल्ड स्टोर से लेकर अन्य सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान के धर्मकांटों पर भी जांच होती है। हालांकि अभी किसी बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान से घटतौली के मामले बीते एक साल से सामने नहीं आए हैं। इसका बड़ा कारण ग्राहकों की खामोशी भी हो सकती है।



लगातार की जाती कार्रवाई
जिले में विभाग की टीमों के स्तर से लगातार चेकिंग अभियान चलाया जाता है। एक साल की कार्रवाई पर नजर डालें तो 98 व्यापारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ 3.75 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया है। सभी व्यापारियों से अपील है कि वह समय पर अपने कांटा, बाट का सत्यापन जरूर कराएं। इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी है। विभाग के स्तर से समय-समय पर कैंप भी लगाए जाते हैं। - विनीत कुमार पांडेय, वरिष्ठ बाट-माप निरीक्षक, बदायूं

दिनेश कुमार गुप्ता

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