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सरकारी अस्पतालों में नहीं मिलती एआरवी, मरीज परेशान

Tue, 01 Aug 2017 04:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं Updated Tue, 01 Aug 2017 04:49 PM IST
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Shortage of ARV in hospitals
- फोटो : demo pic
गांव-देहात में कुत्ता और बंदर काटे लोगों की दिक्कतें दूर होने का नाम नहीं ले रहीं। जिले में किसी भी पीएचसी और सीएचसी पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं है। ऐसे में लोगों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिला अस्पताल में भी लोगों को टरका दिया जाता है। गौर करने वाली बात यह है कि चार महीने से स्वास्थ्य विभाग ने एआरवी की खरीद ही नहीं की है।        
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एंटी रैबीज वैक्सीन कुत्ता और बंदर के काटने पर काम में आती है। एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की खरीद पर पूरी तरह से रोक है। दवाओं की खरीद के लिए स्वास्थ्य विभाग को जीएसटी कोड की जरूरत है। यह कोड अब तक नहीं मिल सका है। करीब पांच महीने पहले सहायक निदेशक ने सीएमओ को खत लिखकर दवाओं के पर्याप्त स्टॉक के लिए भी लिखा था। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं की खरीद नहीं की। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। एंटी रैबीज वैक्सीन के साथ स्वास्थ्य विभाग के पास एंटीबायोटिक दवाइयां भी नहीं हैं, जबकि बिना एंटीबायोटिक दवाओं के एलोपैथिक चिकित्सा का कोई आचित्य ही नहीं माना जाता। खासकर एंटीबायोटिक दवाएं न होने की वजह से गांव-देहात के लोगों को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है। दवाइयों की किल्लत के बारे में चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी कुछ बताने में कतरा रहे हैं।    
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