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Budaun News: गंभीर मरीज कहीं और जाएं, महज नाम का है जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर यूनिट। संवाद
बदायूं। जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज मात्र नाम के हैं। अगर कहीं कोई हादसा हो जाए या मरीज को तत्काल ऑपरेशन की नौबत पड़ जाए तो तुरंत ही परिजनों को रेफर स्लिप थमा दी जाती है। ऐसे में कई बार गंभीर रूप से घायलों की जान भी चली जाती है।
जरूरतमंदों को बेहतर इलाज मिल सके इसलिए स्वास्थ्य विभाग हर साल करोड़ों रुपये जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज पर खर्च करता है। बावजूद इसके यहां इलाज के नाम पर महज खानापूर्ति ही की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, दस दिन में 300 से ज्यादा मरीज रेफर किए गए हैं।
रमनगरा निवासी रामकिशोर ने बताया कि वह चाचा उमेश को लेकर रविवार लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो इमरजेंसी में तैनात स्टाफ ने सर्जन न होने की बात कहकर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां रात भर मरीज को देखने कोई डॉक्टर ही नहीं पहुंचा। सोमवार को जब मरीज देखने के लिए कहा तो सैफई मेडिकल कॉलेज ले जाने की बात कहकर रेफर स्लिप दे दी।
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बिसौली के रवि मौर्य रविवार को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें रात में जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां उपचार नहीं मिला। उन्हें बरेली ले जाने के लिए स्लिप थमा दी गई। ले जाते समय रास्ते में रवि की मौत हो गई।
जिला अस्पताल में कोई नहीं, मेडिकल कॉलेज में सीएमएस ही हैं सर्जन
रेफर करने के पीछे वजह यह है कि जिला अस्पताल में कोई सर्जन नहीं है। वहीं मेडिकल कॉलेज में एक मात्र सर्जन डॉ. विपिन हैं। वह सीएमएस भी हैं। ऐसे में सर्जरी के अलावा उन्हें अन्य काम भी देकने पड़ते हैं। इसलिए यहां भी ऑपरेशन बेहद कम हो गए हैं। यही कारण है कि रोजाना आठ से 10 मरीजों को रेफर किया जा रहा है। रेफर किए जाने वाले सभी मरीजों की स्थिति गंभीर होती है। वक्त पर इलाज न मिलने से इनमें से कई रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
70 सैफई तो 35 मरीजों को अलीगढ़ किया गया रेफर
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एक से नौ फरवरी तक 105 व जिला अस्पताल से दो सौ से अधिक मरीजों को गंभीर हालत में रेफर किया गया है। इमरजेंसी में पहुंचने वाले इन मरीजों को ठीक से प्रारंभिक इलाज तक नहीं दिया गया। 70 मरीज सैफई तो 35 मरीजों को अलीगढ़ भेजा गया। सैफई भेजे गए मरीजों में से दो और अलीगढ़ भेजे गए मरीजों में से एक की रास्ते में ही मौत हो गई।
सीसीयू का काम महज साठ फीसदी ही पूरा
मेडिकल कॉलेज में सौ बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) बनाई जा रही है। इसे दिसंबर 2024 तक बनकर तैयार होना था, लेकिन अब तक यह महज 60 प्रतिशत ही बन सकी है। यही वजह है कि यहां भी अब तक गंभीर मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सवाल यह भी है कि अगर क्रिटिकल केयर यूनिट बन भी जाती है तो डॉक्टर व अन्य स्टाफ के बगैर इसका संचालन कैसे होगा।
सर्जन हैं नहीं बना रहे 86 लाख से ऑपरेशन थियेटर
जिला अस्पताल में सर्जन नहीं हैं, लेकिन यहां 86 लाख रुपये से मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर बनाया जा रहा है। सवाल यह है कि जब डाॅक्टर ही उपलब्ध नहीं तो ओटी बनाकर क्या करेंगे। सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह ने बताया कि हड्डी के सर्जन हमारे पास हैं। जनरल सर्जन के अलावा मॉडयूलर ओटी में हड्डी के मरीजों को भी सुविधा मिल सकेगी। जनरल सर्जन आने के बाद ओटी का लाभ अन्य बीमारी से पीड़ित मरीजों को भी मिलेगा।
क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण कार्य चल रहा है। संचालित होने के बाद सभी प्रकार की समस्या का समाधान हो जाएगा। डॉक्टरों की कमी चल रही है। शासन से डॉक्टर मिलें तो समस्या का समाधान हो सके। - डॉ. विपिन कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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जरूरतमंदों को बेहतर इलाज मिल सके इसलिए स्वास्थ्य विभाग हर साल करोड़ों रुपये जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज पर खर्च करता है। बावजूद इसके यहां इलाज के नाम पर महज खानापूर्ति ही की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, दस दिन में 300 से ज्यादा मरीज रेफर किए गए हैं।
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रमनगरा निवासी रामकिशोर ने बताया कि वह चाचा उमेश को लेकर रविवार लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो इमरजेंसी में तैनात स्टाफ ने सर्जन न होने की बात कहकर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां रात भर मरीज को देखने कोई डॉक्टर ही नहीं पहुंचा। सोमवार को जब मरीज देखने के लिए कहा तो सैफई मेडिकल कॉलेज ले जाने की बात कहकर रेफर स्लिप दे दी।
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बिसौली के रवि मौर्य रविवार को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें रात में जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां उपचार नहीं मिला। उन्हें बरेली ले जाने के लिए स्लिप थमा दी गई। ले जाते समय रास्ते में रवि की मौत हो गई।
जिला अस्पताल में कोई नहीं, मेडिकल कॉलेज में सीएमएस ही हैं सर्जन
रेफर करने के पीछे वजह यह है कि जिला अस्पताल में कोई सर्जन नहीं है। वहीं मेडिकल कॉलेज में एक मात्र सर्जन डॉ. विपिन हैं। वह सीएमएस भी हैं। ऐसे में सर्जरी के अलावा उन्हें अन्य काम भी देकने पड़ते हैं। इसलिए यहां भी ऑपरेशन बेहद कम हो गए हैं। यही कारण है कि रोजाना आठ से 10 मरीजों को रेफर किया जा रहा है। रेफर किए जाने वाले सभी मरीजों की स्थिति गंभीर होती है। वक्त पर इलाज न मिलने से इनमें से कई रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
70 सैफई तो 35 मरीजों को अलीगढ़ किया गया रेफर
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एक से नौ फरवरी तक 105 व जिला अस्पताल से दो सौ से अधिक मरीजों को गंभीर हालत में रेफर किया गया है। इमरजेंसी में पहुंचने वाले इन मरीजों को ठीक से प्रारंभिक इलाज तक नहीं दिया गया। 70 मरीज सैफई तो 35 मरीजों को अलीगढ़ भेजा गया। सैफई भेजे गए मरीजों में से दो और अलीगढ़ भेजे गए मरीजों में से एक की रास्ते में ही मौत हो गई।
सीसीयू का काम महज साठ फीसदी ही पूरा
मेडिकल कॉलेज में सौ बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) बनाई जा रही है। इसे दिसंबर 2024 तक बनकर तैयार होना था, लेकिन अब तक यह महज 60 प्रतिशत ही बन सकी है। यही वजह है कि यहां भी अब तक गंभीर मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सवाल यह भी है कि अगर क्रिटिकल केयर यूनिट बन भी जाती है तो डॉक्टर व अन्य स्टाफ के बगैर इसका संचालन कैसे होगा।
सर्जन हैं नहीं बना रहे 86 लाख से ऑपरेशन थियेटर
जिला अस्पताल में सर्जन नहीं हैं, लेकिन यहां 86 लाख रुपये से मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर बनाया जा रहा है। सवाल यह है कि जब डाॅक्टर ही उपलब्ध नहीं तो ओटी बनाकर क्या करेंगे। सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह ने बताया कि हड्डी के सर्जन हमारे पास हैं। जनरल सर्जन के अलावा मॉडयूलर ओटी में हड्डी के मरीजों को भी सुविधा मिल सकेगी। जनरल सर्जन आने के बाद ओटी का लाभ अन्य बीमारी से पीड़ित मरीजों को भी मिलेगा।
क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण कार्य चल रहा है। संचालित होने के बाद सभी प्रकार की समस्या का समाधान हो जाएगा। डॉक्टरों की कमी चल रही है। शासन से डॉक्टर मिलें तो समस्या का समाधान हो सके। - डॉ. विपिन कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज