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बच्चों, माफिया की है नजर, ....अपनी दो यूनिफॉर्म की रखना पूरी खबर
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बदायूं। शासन ने इस बार परिषदीय स्कूलों में बच्चों की यूनिफार्म के लिए दो सौ रुपये की बढ़ोतरी की है। अब तक यूनिफार्म के दो सेट के लिए चार सौ रुपये थे, जबकि इस बार इसकी कीमत छह सौ रुपये कर दी गई है, ताकि गुणवत्तायुक्त ड्रेस बच्चों को मिल सके, लेकिन जैसे ही शासन ने यूनिफार्म की कीमतों में इजाफा किया, वैसे ही ड्रेस माफिया ने स्कूलों में संपर्क बनाना शुरू कर दिया है। इन माफिया ने अफसरों से सेटिंग और सफेदपोश नेताओं का नाम लेकर स्कूलों में पहुंचकर प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। चूंकि इस दफा शासन के तेवर भी यूनिफार्म की गुणवत्ता को लेकर काफी आक्रामक हैं, इसलिए प्रधानाध्यापक ड्रेस लेने में जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं।
हर साल परिषदीय स्कूलों के बच्चों को शासन की ओर से यूनिफार्म के दो सेट दिए जाते हैं। इस सत्र से पहले तक इन दो सेट को शासन से प्रति छात्र दो सौ रुपये के हिसाब से चार सौ रुपये एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) को दिए जाते थे, जो ड्रेस की खरीदारी कर बच्चों को निशुल्क यूनिफार्म वितरित करती थी, लेकिन दो सौ रुपये में यूनिफार्म की वो गुणवत्ता नहीं मिल पाती थी, जो होनी चाहिए। ऐसे में सत्र समाप्त होते-होते यूनिफार्म पूरी तरह से खराब हो जाती थी। इसे देखते हुए योगी सरकार ने प्रति छात्र के दो सेट के लिए दो सौ रुपये की वृद्धि कर दी। ऐसे में अब छह सौ रुपये के हिसाब से ही यूनिफार्म को बजट जारी किया गया है।
हर साल यूनिफार्म का बजट जारी होते ही ड्रेस माफिया भी सक्रिय हो जाते हैं। चूंकि इन माफिया को सफेदपोशों का साथ रहता है, ऐसे में अधिकारियों से सेटिंग करने के बाद यह स्कूलों में जबरन यूनिफार्म डालना शुरू कर देते हैं। प्रधानाध्यापकों से एक ही बात कही जाती है कि ‘नेताजी’ ने भेजा है, इसलिए आप किसी तरह की चिंता न करें। बाकी हम सब देख लेंगे। यदि कहीं प्रधानाध्यापक किसी तरह की आनाकानी करता है तो ट्रांसफर से लेकर अनेक तरह की धमकी दी जाती है।
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कई गाड़ियां पहले भी रहीं हैं चर्चाओं में
-यूनिफार्म के धंधे से जुड़े माफिया की कई गाड़ियां पहले भी काफी चर्चाओं में रहीं हैं, जो सुबह होते ही स्कूलों में पहुंच जाती हैं और जबरन यूनिफार्म के बंडल उतार आती हैं। यूनिफार्म माफिया के तार विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों से कितने जुड़े हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानाध्यापकों से पहले उन्हें इस बात की सूची मिल जाती है कि किस स्कूल को कितनी धनराशि दी गई है। बाकायदा उनमें बच्चों की संख्या का भी जिक्र किया जाता है।
फूंक-फूंककर कदम उठा रहे हैं प्रधानाध्यापक
-यूनिफार्म की गुणवत्ता को लेकर शासन स्पष्ट कह चुका है कि गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। निर्धारित कपड़े की ही यूनिफार्म खरीदी और बनवायी जाए। इससे इतर होने पर संबंधित प्रधानाध्यापक पर रिपोर्ट दर्ज करायी जाएगी। ऐसे में शासन के सख्त कदम से प्रधानाध्यापक भी यूनिफार्म के मसले पर फूंक-फूंककर ही कदम उठा रहे हैं।
पिछली बार आया था 11 करोड़ रुपये के करीब बजट
-जिले से पिछली बार दो लाख 94 हजार छात्र-छात्राओ के लिए चार सौ रुपये के हिसाब से 11 करोड़ 76 हजार रुपये विभाग को प्राप्त हुआ था, जो एसएमसी के खातों में भेज दिया गया था। एसएमसी की ओर से स्कूलों में ड्रेस की खरीदारी की गई।
9.51 लाख रुपये अभी मिले हैं विभाग को
-बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इस बार भी दो लाख 94 हजार विद्यार्थियों की सूची शासन को भेजी गई है। उसके आधार पर अभी तक विभाग को 9 करोड़ 51 लाख रुपये मिले हैं, जिसे एसएमसी के खातों में भेज दिया गया है। बाकी धनराशि शासन द्वारा आगे भेजी जानी है। हालांकि अभी स्कूलों में नामांकन चल रहा है, ऐसे में बढ़े हुए छात्रों की लिस्ट बाद में शासन को भेजी जाएगी।
सप्लाई में हेराफेरी करके आकड़ें किए जा रहे थे कागजों में पूरे
- हालात ये है परिषदीय स्कूलों में पिछले सालों में ड्रेस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती रही है। विद्यालय स्टाफ से लेकर जिला स्तरीय अधिकारी तक कमीशन बंधा हुआ था। ऐसे में जो सप्लायर स्कूलों में ड्रेस की सप्लाई करता था, वह सभी को कमीशन के रूप में धनराशि देता था और आंकड़े कागजों में पूरे कर लिए जाते थे, पर इस बार ऐसी उम्मीद कम है।
सभी बीईओ को निर्देशित किया है कि वह अपने स्तर से सभी प्रधानाध्यापकों को बता दें कि वह किसी के दवाब में आकर ड्रेस न खरीदें, अपने स्तर से देख लें कि कपड़े की क्वालिटी कैसी है। इसमें किसी भी प्रकार को समझौता नहीं चलेेगा।
-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
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हर साल परिषदीय स्कूलों के बच्चों को शासन की ओर से यूनिफार्म के दो सेट दिए जाते हैं। इस सत्र से पहले तक इन दो सेट को शासन से प्रति छात्र दो सौ रुपये के हिसाब से चार सौ रुपये एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) को दिए जाते थे, जो ड्रेस की खरीदारी कर बच्चों को निशुल्क यूनिफार्म वितरित करती थी, लेकिन दो सौ रुपये में यूनिफार्म की वो गुणवत्ता नहीं मिल पाती थी, जो होनी चाहिए। ऐसे में सत्र समाप्त होते-होते यूनिफार्म पूरी तरह से खराब हो जाती थी। इसे देखते हुए योगी सरकार ने प्रति छात्र के दो सेट के लिए दो सौ रुपये की वृद्धि कर दी। ऐसे में अब छह सौ रुपये के हिसाब से ही यूनिफार्म को बजट जारी किया गया है।
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हर साल यूनिफार्म का बजट जारी होते ही ड्रेस माफिया भी सक्रिय हो जाते हैं। चूंकि इन माफिया को सफेदपोशों का साथ रहता है, ऐसे में अधिकारियों से सेटिंग करने के बाद यह स्कूलों में जबरन यूनिफार्म डालना शुरू कर देते हैं। प्रधानाध्यापकों से एक ही बात कही जाती है कि ‘नेताजी’ ने भेजा है, इसलिए आप किसी तरह की चिंता न करें। बाकी हम सब देख लेंगे। यदि कहीं प्रधानाध्यापक किसी तरह की आनाकानी करता है तो ट्रांसफर से लेकर अनेक तरह की धमकी दी जाती है।
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कई गाड़ियां पहले भी रहीं हैं चर्चाओं में
-यूनिफार्म के धंधे से जुड़े माफिया की कई गाड़ियां पहले भी काफी चर्चाओं में रहीं हैं, जो सुबह होते ही स्कूलों में पहुंच जाती हैं और जबरन यूनिफार्म के बंडल उतार आती हैं। यूनिफार्म माफिया के तार विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों से कितने जुड़े हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानाध्यापकों से पहले उन्हें इस बात की सूची मिल जाती है कि किस स्कूल को कितनी धनराशि दी गई है। बाकायदा उनमें बच्चों की संख्या का भी जिक्र किया जाता है।
फूंक-फूंककर कदम उठा रहे हैं प्रधानाध्यापक
-यूनिफार्म की गुणवत्ता को लेकर शासन स्पष्ट कह चुका है कि गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। निर्धारित कपड़े की ही यूनिफार्म खरीदी और बनवायी जाए। इससे इतर होने पर संबंधित प्रधानाध्यापक पर रिपोर्ट दर्ज करायी जाएगी। ऐसे में शासन के सख्त कदम से प्रधानाध्यापक भी यूनिफार्म के मसले पर फूंक-फूंककर ही कदम उठा रहे हैं।
पिछली बार आया था 11 करोड़ रुपये के करीब बजट
-जिले से पिछली बार दो लाख 94 हजार छात्र-छात्राओ के लिए चार सौ रुपये के हिसाब से 11 करोड़ 76 हजार रुपये विभाग को प्राप्त हुआ था, जो एसएमसी के खातों में भेज दिया गया था। एसएमसी की ओर से स्कूलों में ड्रेस की खरीदारी की गई।
9.51 लाख रुपये अभी मिले हैं विभाग को
-बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इस बार भी दो लाख 94 हजार विद्यार्थियों की सूची शासन को भेजी गई है। उसके आधार पर अभी तक विभाग को 9 करोड़ 51 लाख रुपये मिले हैं, जिसे एसएमसी के खातों में भेज दिया गया है। बाकी धनराशि शासन द्वारा आगे भेजी जानी है। हालांकि अभी स्कूलों में नामांकन चल रहा है, ऐसे में बढ़े हुए छात्रों की लिस्ट बाद में शासन को भेजी जाएगी।
सप्लाई में हेराफेरी करके आकड़ें किए जा रहे थे कागजों में पूरे
- हालात ये है परिषदीय स्कूलों में पिछले सालों में ड्रेस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती रही है। विद्यालय स्टाफ से लेकर जिला स्तरीय अधिकारी तक कमीशन बंधा हुआ था। ऐसे में जो सप्लायर स्कूलों में ड्रेस की सप्लाई करता था, वह सभी को कमीशन के रूप में धनराशि देता था और आंकड़े कागजों में पूरे कर लिए जाते थे, पर इस बार ऐसी उम्मीद कम है।
सभी बीईओ को निर्देशित किया है कि वह अपने स्तर से सभी प्रधानाध्यापकों को बता दें कि वह किसी के दवाब में आकर ड्रेस न खरीदें, अपने स्तर से देख लें कि कपड़े की क्वालिटी कैसी है। इसमें किसी भी प्रकार को समझौता नहीं चलेेगा।
-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए