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कांवड़ लो या फिर भोले का शृंगार.. रुपये देने होंगे दो हजार
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कांवड़ियों की टोली में थिकरते पीलीभीत जिले के कलाकार। संवाद
- फोटो : BADAUN
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उझानी (बदायूं)। बरेली-मथुरा हाईवे पर मंडी के पास लगे बाजार में भोले के शृंगार से लेकर कांवड़ की बिक्री तक में इजाफा होने लगा है। बाजार में ऐसा कोई दुकानदार नहीं है, जो 10-15 हजार रुपये से कम की दुकानदारी करता हो। कांवड़ या फिर भोले के शृंगार के लिए रेट निर्धारित हैं, कम से कम दो हजार में पैकेज उपलब्ध है। सावन के तीसरे सोमवार से पहले ही दुकानदारों ने स्टाक बढ़ाना शुरू कर दिया है।
सावन शुरू होने से पहले ही मंडी समिति के पास हाईवे किनारे जो अस्थायी दुकानें लगीं थीं, धीरे-धीरे उनकी संख्या में इजाफा होने लगा है। यही नहीं ऐसा ही बाजार कछला गंगाघाट के पास भी सज गया है। जो लोग कांवड़ बनाना नहीं जानते, उनके लिए रेडीमेड कांवड़ हैं। कांवड़ पर चुटीले, फीता, शीशा, शंकर-पार्वती के फोटो युक्त फ्रेम के अलावा नेकर-बनियान, कमरबंद पर्स आदि भी शामिल हैं। टोपी और स्टाइलिश बनियान हैं।
बता दें कि शुरू के दिनों में बिक्री भले ही कम रही हो लेकिन कुछेक दिनों से जिस तरह कांवड़ियों की संख्या में इजाफा हुआ है, इससे बिक्री भी बढ़ी है। रमेश ने बताया कि जिन दुकानों पर हर तरह का सामान है, वहां एक दिन में 15 हजार रुपये तक की बिक्री होजाती है। मुनाफा भले ही कम हो लेकिन टर्नओवर बना हुआ है।
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हरीओम के मुताबिक- भोले के शृंगार के सामान का हर रह का रेट है। क्वालिटी के अनुरूप दाम तय किए गए हैं।
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ये भोले का जादू है.. सिर चढ़के बोलेगा
गंगाघाट से कांवड़ियों की टोलियों में एक टोली पीलीभीत जिले के जहानाबाद थाना क्षेत्र के गांव कल्यानपुर के श्रद्धालुओं की मिली। छतुइया रेल फाटक के पास ट्रैक्टर से जुड़ी एक ट्रॉली पर सवार शंकर-पार्वती बने कलाकारों ने कांवड़ियों को अपने नृत्य से मस्त कर दिया। शंकर की भूमिका में किशनपाल तो पार्वती के रूप में संदीप जहानाबाद के रहने वाले हैं। ‘ये भोले का जादू है, सिर चढ़के बोलेगा’ भजन पर नृत्य करते समय दोनों मस्त नजर आए। टोली में शामिल कांवड़िये भी उनके साथ थिरकते हुए आगे बढ़ते गए।
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जुबां पर भोले का नाम, सहारा बैसाखी का
कछला से कांवड़ यात्रा पर निकले पीलीभीत जिले में बरखेड़ा के सथरापुर निवासी तेजपाल पर रास्ते में जिस किसी की नजर पड़ी, वह उसके जज्बे को सलाम करता चला गया। दोनों पैर से अशक्त तेजपाल बुधवार तड़के गंगाघाट पर पहुंचे। आस्था की डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की। बैसाखी के सहारे आंवला के गौरीशंकर मंदिर में जलाभिषेक का संकल्प ले चुके तेजपाल ने बताया कि तीन साल पहले उसने अपने परिचित की बाइक पर सवार होकर कांवड़ यात्रा पूरी की थी। इसके बाद उसे लगा कि भले ही धीरे-धीरे लेकिन यात्रा पैदल ही जरूर पूरी कर लेगा तो घर से निकल पड़ा। बैसाखी ही उसे पार लगा देगी। हालांकि उसके गांव की टोली भी पैदल यात्रा कर रही है।
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सावन शुरू होने से पहले ही मंडी समिति के पास हाईवे किनारे जो अस्थायी दुकानें लगीं थीं, धीरे-धीरे उनकी संख्या में इजाफा होने लगा है। यही नहीं ऐसा ही बाजार कछला गंगाघाट के पास भी सज गया है। जो लोग कांवड़ बनाना नहीं जानते, उनके लिए रेडीमेड कांवड़ हैं। कांवड़ पर चुटीले, फीता, शीशा, शंकर-पार्वती के फोटो युक्त फ्रेम के अलावा नेकर-बनियान, कमरबंद पर्स आदि भी शामिल हैं। टोपी और स्टाइलिश बनियान हैं।
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बता दें कि शुरू के दिनों में बिक्री भले ही कम रही हो लेकिन कुछेक दिनों से जिस तरह कांवड़ियों की संख्या में इजाफा हुआ है, इससे बिक्री भी बढ़ी है। रमेश ने बताया कि जिन दुकानों पर हर तरह का सामान है, वहां एक दिन में 15 हजार रुपये तक की बिक्री होजाती है। मुनाफा भले ही कम हो लेकिन टर्नओवर बना हुआ है।
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हरीओम के मुताबिक- भोले के शृंगार के सामान का हर रह का रेट है। क्वालिटी के अनुरूप दाम तय किए गए हैं।
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ये भोले का जादू है.. सिर चढ़के बोलेगा
गंगाघाट से कांवड़ियों की टोलियों में एक टोली पीलीभीत जिले के जहानाबाद थाना क्षेत्र के गांव कल्यानपुर के श्रद्धालुओं की मिली। छतुइया रेल फाटक के पास ट्रैक्टर से जुड़ी एक ट्रॉली पर सवार शंकर-पार्वती बने कलाकारों ने कांवड़ियों को अपने नृत्य से मस्त कर दिया। शंकर की भूमिका में किशनपाल तो पार्वती के रूप में संदीप जहानाबाद के रहने वाले हैं। ‘ये भोले का जादू है, सिर चढ़के बोलेगा’ भजन पर नृत्य करते समय दोनों मस्त नजर आए। टोली में शामिल कांवड़िये भी उनके साथ थिरकते हुए आगे बढ़ते गए।
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जुबां पर भोले का नाम, सहारा बैसाखी का
कछला से कांवड़ यात्रा पर निकले पीलीभीत जिले में बरखेड़ा के सथरापुर निवासी तेजपाल पर रास्ते में जिस किसी की नजर पड़ी, वह उसके जज्बे को सलाम करता चला गया। दोनों पैर से अशक्त तेजपाल बुधवार तड़के गंगाघाट पर पहुंचे। आस्था की डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की। बैसाखी के सहारे आंवला के गौरीशंकर मंदिर में जलाभिषेक का संकल्प ले चुके तेजपाल ने बताया कि तीन साल पहले उसने अपने परिचित की बाइक पर सवार होकर कांवड़ यात्रा पूरी की थी। इसके बाद उसे लगा कि भले ही धीरे-धीरे लेकिन यात्रा पैदल ही जरूर पूरी कर लेगा तो घर से निकल पड़ा। बैसाखी ही उसे पार लगा देगी। हालांकि उसके गांव की टोली भी पैदल यात्रा कर रही है।

उझानी में भोले के श्रंगार के बाजार में सजी दुकानें। संवाद- फोटो : BADAUN