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सियासी सरगर्मी : वरुण गांधी की राह पर संघमित्रा, न इस्तीफा देंगी न छोड़ेंगी पार्टी
Fri, 04 Mar 2022 02:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 04 Mar 2022 02:41 AM IST
सार
इस्तीफा देने और पार्टी छोड़ने की उड़ाई जा रही अफवाहें, सांसद कर रहीं इनकार। दस मार्च के बाद और साफ होगी तस्वीर, हमले तेज होंगे या बंद होगा सोशल वार।
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सांसद संघमित्रा मौर्य और स्वामी प्रसाद
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
फाजिलनगर में पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के काफिले पर हमले के बाद तेवर में आईं भाजपा सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं हैं। वह अपनी पार्टी के लोगों पर निशाना साध रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर पार्टी पर कटाक्ष किया था। ऐसा माना जा रहा है कि सांसद वरुण गांधी की तर्ज पर उन्होंने भी ऐसे सुर अपना लिए हैं, जो भाजपा के खिलाफ जा रहे हैं। हालांकि सांसद ऐसी बातों से इनकार कर रही हैं।
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सांसद संघमित्रा का प्रदेश नेतृत्व के प्रति व्यवहार लखनऊ में हुए घटनाक्रम के बाद से बदला हुआ है, जब उन्हें मंच पर बोलने से टोक दिया गया था। इसकी नाराजगी वह समय समय पर जाहिर करती रहीं हैं। इसके बाद उनके पिता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा छोड़कर सपा ज्वाइन कर ली तो भी वह सोशल मीडिया के जरिये निशाने पर आईं। अब फाजिलनगर की घटना के बाद उनका मौके पर पहुंचकर लाठी लेकर घूमना और भाजपा पर ही तीखा प्रहार चर्चा में है।
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हालांकि तीखे बोल के घंटेभर बाद ही उन्होंने फेसबुक पर लाइव वीडियो डालकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में अपनी आस्था जताई। लेकिन पहले विरोध फिर नेतृत्व में आस्था जताने की उनकी बात पर लोग उनके अगले राजनीतिक कदम पर कयास लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर पक्ष-विपक्ष में कमेंट आ रहे हैं। कोई पार्टी छोड़ने की तो कोई इस्तीफा देने की बात कह रहा है। सांसद ने सोशल मीडिया पर ही इस तरह की बातों का खंडन किया है। वह सोशल मीडिया पर बयान दे रही हैं कि वह न पार्टी छोड़ेंगी और न इस्तीफा देंगी।
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संघमित्रा बता रही हैं कि वह तीन साल तक राजनीति के हमले झोलती रही हैं। पिता की नसीहत की वजह से आज तक पार्टी के ऐसे लोगों का काला चिट्ठा नहीं खोला, जो उन्हें परेशान करते रहे। अब अपने कार्यकाल के शेष दो साल तक वह पार्टी के उन लोगों को दिखाएंगी कि राजनीति कैसे की जाती है। इस यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि जैसे सांसद वरुण गांधी पार्टी में रहते हुए तमाम मुद्दों पर मुखर है, वही रुख संघमित्रा ने भी अपना लिया है। वह पार्टी में रहकर ही अपने सियासी दुश्मनों को सबक सिखाने का काम करेंगी। जाहिर है कि इसमें कई बार पार्टी नेतृत्व के सामने असहज स्थिति आ सकती है। सूत्र बताते हैं कि सांसद के हमलों का रुख दस मार्च के नतीजों पर भी निर्भर करेगा।