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संवाद : बेरोजगारी दूर करा दो नेताजी, बस आपकी ही जिंदाबाद करेंगे
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ऑनलाइन संवाद के दौरान बोलते युवा। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। चुनाव के माहौल में सियासी दावों और खींचतान के बीच युवा वर्ग को हर कोई साथ लेना चाहता है। कोई उनके वोट तो कोई सपोर्ट चाहता है। ऐसे में युवाओं की अपेक्षाएं भी राजनीतिक दलों और दावेदारों से बढ़ गईं हैं। उनके अपने दावे और इरादे भी हैं। अमर उजाला ने शहर समेत जिले भर के युवाओं से ऑनलाइन संवाद किया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के युवा जुड़े जिनमें प्राइवेट शिक्षक, वकील, व्यापारी से लेकर अन्य वर्गों के लोग शामिल थे। अंडरग्राउंड लाइन से लेकर सीवर लाइन तक के स्थानीय मुददों पर युवाओं ने बेबाकी से बात रखी। कहा कि बड़ी समस्या बेरोजगारी ही है। इसे जो नेता दूर कर दे वे उम्र भर उनके चुनाव में जिंदाबाद करने को तैयार हैं।
शहर निवासी पार्ट टाइम जॉब करने वाले कमल मिश्रा का कहना है कि डिग्री लेने के बाद वेकेंसी नहीं निकलती। निकलती है तो कोई न कोई पलीता लग जाता है। नेता चाहते हैं कि उनके चुनाव के वक्त युवाओं की भीड़ इकट्ठी होकर उनके लिए जिंदाबाद करे पर चुनाव जीतकर युवाओं से कन्नी काटते हैं। नेता अगर रोजगार का इंतजाम करा दें तो पूरी जिंदगी जिंदाबाद करने को तैयार हैं।
डांस कोचिंग चलाने वाले पुष्पेंद्र का कहना था कि सामान्य पढ़ाई से हटकर डांस, सिंगिंग जैसी गतिविधियों से भी रोजगार मिलता है पर यहां तो ऑडीटोरियम बनाने का काम ही पूरा नहीं हो पा रहा। नेता बड़े काम नहीं करा सकते तो शासन से प्रस्तावित कामों में तेजी तो ला ही सकते हैं।
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आरटीआई एक्टीविस्ट कौशल गुप्ता ने कहा कि अंडरग्राउंड केबल को ही देख लीजिए। वह सही है तो उससे लोग और बेजुबान क्यों मर रहे हैं और गलत है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। दो सरकारें और उनके नुमाइंदे मिलकर भी इस गुत्थी को नहीं सुलझा सके क्योंकि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।
विशाल ठाकुर ने रोजगार के साधनों की कमी बताकर ही बात खत्म कर दी। कहा कि बड़ी संख्या में जिले के युवा दूसरे प्रांतों में इसलिए काम कर रहे हैं क्योंकि यहां फैक्टरी नहीं लगाई जा सकीं।
युवा मंच संगठन के ध्रुवदेव गुप्ता ने कहा कि युवाओं को नौकरी से लेकर सांस्कृतिक मंच देने तक में राजनीति हावी है। आखिर युवाओं का भला कैसे हो सकता है। धर्म क्षेत्र से जुड़े आचार्य मुमुक्ष कृष्ण शास्त्री ने कहा कि कोई हिंदुत्व तो कोई जात बिरादरी के नाम पर वोट मांग रहा है। जब तक राजनेता सामूहिक उत्थान की बात नहीं करेंगे, किसी जाति धर्म का भला नहीं होने वाला। व्यापार से जुड़े हामिद रसूल ने पते की बात की। कहा कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा नुकसान व्यापारी वर्ग का हुआ। सरकार ने उन्हें आसान व सस्ती दरों पर लोन देने का रास्ता भी साफ किया। मुद्रा लोन व अन्य तरह के ऋणों को संबंधित विभाग भी आसानी से पास कर देते हैं पर बैंकों के चक्कर लगाते हुए हम लोग दुखी हैं। वहां बिना कमीशन और सेटिंग के कुछ नहीं होता है।
दातागंज के मनकापुर कौर निवासी अमन गुप्ता ने बताया कि उनकी कपड़े की दुकान है। कोरोना ने काम पूरा चौपट कर दिया। परिवार पालना मुश्किल है, सब दावे खोखले होते हैं। रिजौला गांव के शिक्षित युवा रीतेश चौहान ने कहा कि सरकार कोई रहे। नीतियां अच्छी बनती हैं फिर दलाल ही व्यवस्था में घुन लगाने का काम करते हैं।
खेड़ा नवादा के सुशील मौर्य ने कहा कि बाजारों में पार्किंग की जगह नहीं है। रोज जाम लगता है पर नेता अफसरों को नहीं दिखता। कोई जाम से निजात दिलाए तो शहरवाले उसका अहसान उम्र भर मानेंगे। जिया अंसारी ने भ्रष्ट राशन वितरण व्यवस्था का मुद्दा उठाया। कहा कि उप राष्ट्रपति कार्यालय के संज्ञान पर भी कार्रवाई न होना शर्मनाक है। उझानी के दिव्यांशु गुप्ता ने कहा कि सब्जी मंडी रोड का बुरा हाल है। नगर पालिका से लेकर प्रशासन तक कार्रवाई नहीं करता। रेलवे कॉलोनी के रामबाबू तिवारी ने महंगाई की बात की। कहा कि अगड़े वर्ग को कोई योजना नहीं है पर महंगाई काबू आ जाए तो भी हमें चैन मिलेगा। संवाद
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शहर निवासी पार्ट टाइम जॉब करने वाले कमल मिश्रा का कहना है कि डिग्री लेने के बाद वेकेंसी नहीं निकलती। निकलती है तो कोई न कोई पलीता लग जाता है। नेता चाहते हैं कि उनके चुनाव के वक्त युवाओं की भीड़ इकट्ठी होकर उनके लिए जिंदाबाद करे पर चुनाव जीतकर युवाओं से कन्नी काटते हैं। नेता अगर रोजगार का इंतजाम करा दें तो पूरी जिंदगी जिंदाबाद करने को तैयार हैं।
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डांस कोचिंग चलाने वाले पुष्पेंद्र का कहना था कि सामान्य पढ़ाई से हटकर डांस, सिंगिंग जैसी गतिविधियों से भी रोजगार मिलता है पर यहां तो ऑडीटोरियम बनाने का काम ही पूरा नहीं हो पा रहा। नेता बड़े काम नहीं करा सकते तो शासन से प्रस्तावित कामों में तेजी तो ला ही सकते हैं।
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आरटीआई एक्टीविस्ट कौशल गुप्ता ने कहा कि अंडरग्राउंड केबल को ही देख लीजिए। वह सही है तो उससे लोग और बेजुबान क्यों मर रहे हैं और गलत है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। दो सरकारें और उनके नुमाइंदे मिलकर भी इस गुत्थी को नहीं सुलझा सके क्योंकि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।
विशाल ठाकुर ने रोजगार के साधनों की कमी बताकर ही बात खत्म कर दी। कहा कि बड़ी संख्या में जिले के युवा दूसरे प्रांतों में इसलिए काम कर रहे हैं क्योंकि यहां फैक्टरी नहीं लगाई जा सकीं।
युवा मंच संगठन के ध्रुवदेव गुप्ता ने कहा कि युवाओं को नौकरी से लेकर सांस्कृतिक मंच देने तक में राजनीति हावी है। आखिर युवाओं का भला कैसे हो सकता है। धर्म क्षेत्र से जुड़े आचार्य मुमुक्ष कृष्ण शास्त्री ने कहा कि कोई हिंदुत्व तो कोई जात बिरादरी के नाम पर वोट मांग रहा है। जब तक राजनेता सामूहिक उत्थान की बात नहीं करेंगे, किसी जाति धर्म का भला नहीं होने वाला। व्यापार से जुड़े हामिद रसूल ने पते की बात की। कहा कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा नुकसान व्यापारी वर्ग का हुआ। सरकार ने उन्हें आसान व सस्ती दरों पर लोन देने का रास्ता भी साफ किया। मुद्रा लोन व अन्य तरह के ऋणों को संबंधित विभाग भी आसानी से पास कर देते हैं पर बैंकों के चक्कर लगाते हुए हम लोग दुखी हैं। वहां बिना कमीशन और सेटिंग के कुछ नहीं होता है।
दातागंज के मनकापुर कौर निवासी अमन गुप्ता ने बताया कि उनकी कपड़े की दुकान है। कोरोना ने काम पूरा चौपट कर दिया। परिवार पालना मुश्किल है, सब दावे खोखले होते हैं। रिजौला गांव के शिक्षित युवा रीतेश चौहान ने कहा कि सरकार कोई रहे। नीतियां अच्छी बनती हैं फिर दलाल ही व्यवस्था में घुन लगाने का काम करते हैं।
खेड़ा नवादा के सुशील मौर्य ने कहा कि बाजारों में पार्किंग की जगह नहीं है। रोज जाम लगता है पर नेता अफसरों को नहीं दिखता। कोई जाम से निजात दिलाए तो शहरवाले उसका अहसान उम्र भर मानेंगे। जिया अंसारी ने भ्रष्ट राशन वितरण व्यवस्था का मुद्दा उठाया। कहा कि उप राष्ट्रपति कार्यालय के संज्ञान पर भी कार्रवाई न होना शर्मनाक है। उझानी के दिव्यांशु गुप्ता ने कहा कि सब्जी मंडी रोड का बुरा हाल है। नगर पालिका से लेकर प्रशासन तक कार्रवाई नहीं करता। रेलवे कॉलोनी के रामबाबू तिवारी ने महंगाई की बात की। कहा कि अगड़े वर्ग को कोई योजना नहीं है पर महंगाई काबू आ जाए तो भी हमें चैन मिलेगा। संवाद