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मौर्य-शाक्य समाज की प्रतिभाएं सम्मानित
बिल्सी।
Updated Mon, 16 Feb 2015 12:03 AM IST
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अशोक महान सेवा संघ के तत्वावधान में तहसील क्षेत्र के गांव लहरा असदुल्लापुर में चल रहे त्रिदिवसीय बुद्ध अशोक महोत्सव का रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन हो गया।
इस मौके पर मौर्य-शाक्य समाज के मेधावी रहे छात्र जोगराज, रामवीर, मुन्नालाल, सरनाम, इंद्रपाल, कृष्णपाल, लल्लू सिंह, राजेंद्र, श्याम बाबू, हरीशंकर, रामसिंह, पप्पू शाक्य, बाबूराम, मनोहर लाल, किशन लाल, भूप सिंह आदि को पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य ने सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक के शासन में सभी लोग शांति से रहते थे। घरों में लोग ताले नहीं लगाते थे। तभी सम्राट अशोक के युग को स्वर्ण युग काल कहा गया। मगर अब सब कुछ विपरीत है। इसलिए लोगों को चाहिए वह सम्राट अशोक के बताए मार्ग पर चले। गेंदन लाल मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक के शासन काल में भारत की सीमा तुर्क, अफगानिस्तान, नेपाल, तिब्बत तक विस्तार था। अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए अपने पुत्र-पुत्री को पीपल का पौधा लेकर श्रीलंका भेजा था।
इसी क्रम में डा.बीपी मौर्य ने शराब, गुटका से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी। साथ ही लोगों से नशा छोड़ने का आह्वान किया। इसके अलावा नोएडा से आए सत्यपाल सिंह, कासगंज से आए डा.गंगादयाल शाक्य, जयवीर सिंह शाक्य ने भी अपने विचार रखे। महोत्सव में ज्ञान चंद्र शाक्य, डा.अरविंद शाक्य, केदारी लाल सैनी, चंद्रपाल शाक्य, अंजलि शाक्य, रामस्वरूप शाक्य, कालीचरन, इंद्रपाल बौद्ध, नेत्रपाल कुशवाह आदि का विशेष सहयोग रहा।
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इस मौके पर मौर्य-शाक्य समाज के मेधावी रहे छात्र जोगराज, रामवीर, मुन्नालाल, सरनाम, इंद्रपाल, कृष्णपाल, लल्लू सिंह, राजेंद्र, श्याम बाबू, हरीशंकर, रामसिंह, पप्पू शाक्य, बाबूराम, मनोहर लाल, किशन लाल, भूप सिंह आदि को पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य ने सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक के शासन में सभी लोग शांति से रहते थे। घरों में लोग ताले नहीं लगाते थे। तभी सम्राट अशोक के युग को स्वर्ण युग काल कहा गया। मगर अब सब कुछ विपरीत है। इसलिए लोगों को चाहिए वह सम्राट अशोक के बताए मार्ग पर चले। गेंदन लाल मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक के शासन काल में भारत की सीमा तुर्क, अफगानिस्तान, नेपाल, तिब्बत तक विस्तार था। अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए अपने पुत्र-पुत्री को पीपल का पौधा लेकर श्रीलंका भेजा था।
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इसी क्रम में डा.बीपी मौर्य ने शराब, गुटका से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी। साथ ही लोगों से नशा छोड़ने का आह्वान किया। इसके अलावा नोएडा से आए सत्यपाल सिंह, कासगंज से आए डा.गंगादयाल शाक्य, जयवीर सिंह शाक्य ने भी अपने विचार रखे। महोत्सव में ज्ञान चंद्र शाक्य, डा.अरविंद शाक्य, केदारी लाल सैनी, चंद्रपाल शाक्य, अंजलि शाक्य, रामस्वरूप शाक्य, कालीचरन, इंद्रपाल बौद्ध, नेत्रपाल कुशवाह आदि का विशेष सहयोग रहा।
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