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आरटीई: उम्र के हिसाब से मिलेगा कक्षाओं में एडमिशन
Mon, 19 Jan 2026 01:37 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 19 Jan 2026 01:37 AM IST
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बदायूं। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए जल्द ही आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन इस बार एडमिशन को लेकर कई बदलाव किए गए हैं। इसमें अहम बदलाव आयु को लेकर किया गया है। अब कक्षा बार उम्र निर्धारित की गई है। पहले ऐसा नहीं था।
आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों का दाखिला दिलाया जाता है। इसमें पढ़ाई से लेकर किताबों का खर्च भी सरकार उठाती है। अभिभावकों को कोर्स, ड्रेस, बैग के अलावा स्टेशनरी खरीदने के लिए हर साल आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है। इतना ही नहीं स्कूल संचालकों को भी एक निश्चित धनराशि दी जाती है। इस बार शासन ने इसमें कई बदलाव कर दिए हैं। इसके चलते अब बच्चों का दाखिला उनकी उम्र के अनुसार कक्षाओं में किया जाएगा।
इसके तहत एलकेजी के लिए चार साल, यूकेजी पांच साल, कक्षा एक के लिए छह साल की आयु तय की गई है। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि एक बच्चा के लिए 10 स्कूलों को विकल्प दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार स्कूल संचालक इस योजना के तहत बच्चों का प्रवेश लेने में किसी तरह की कोई परेशानी न खड़ी करें, इसके लिए हर महीने शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए 450 रुपये दिए जाते हैं। यानी प्रतिवर्ष 5400 रुपये स्कूल संचालकों को मिलते हैं।
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बच्चों के प्रवेश न लेने पर स्कूल संचालकाें को बताना होगा कारण
-योजना में पात्र पाए जाने के बाद भी यदि कोई स्कूल संचालक विद्यार्थी का प्रवेश नहीं लेता है तो इसके लिए निजी विद्यालयों को कारण बताना होगा। सही कारण नहीं बता पाने पर विद्यालय संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। यदि कोई विद्यालय आवंटित छात्र को प्रवेश नहीं देता है तो उसे अपने लॉग इन आईडी से स्पष्ट कारण आरटीई पोर्टल पर दर्ज करना होगा। योजना को लेकर इस बार कई तरह के बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इस योजना का लाभ मिल सके।
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वर्जन--
शासन की ओर से आरटीई के नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं। इस बदलाव के कारण एडमिशन प्रक्रिया में कुछ विलंब हुआ था। अब जल्द ही एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
-वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए
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आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों का दाखिला दिलाया जाता है। इसमें पढ़ाई से लेकर किताबों का खर्च भी सरकार उठाती है। अभिभावकों को कोर्स, ड्रेस, बैग के अलावा स्टेशनरी खरीदने के लिए हर साल आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है। इतना ही नहीं स्कूल संचालकों को भी एक निश्चित धनराशि दी जाती है। इस बार शासन ने इसमें कई बदलाव कर दिए हैं। इसके चलते अब बच्चों का दाखिला उनकी उम्र के अनुसार कक्षाओं में किया जाएगा।
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इसके तहत एलकेजी के लिए चार साल, यूकेजी पांच साल, कक्षा एक के लिए छह साल की आयु तय की गई है। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि एक बच्चा के लिए 10 स्कूलों को विकल्प दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार स्कूल संचालक इस योजना के तहत बच्चों का प्रवेश लेने में किसी तरह की कोई परेशानी न खड़ी करें, इसके लिए हर महीने शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए 450 रुपये दिए जाते हैं। यानी प्रतिवर्ष 5400 रुपये स्कूल संचालकों को मिलते हैं।
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बच्चों के प्रवेश न लेने पर स्कूल संचालकाें को बताना होगा कारण
-योजना में पात्र पाए जाने के बाद भी यदि कोई स्कूल संचालक विद्यार्थी का प्रवेश नहीं लेता है तो इसके लिए निजी विद्यालयों को कारण बताना होगा। सही कारण नहीं बता पाने पर विद्यालय संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। यदि कोई विद्यालय आवंटित छात्र को प्रवेश नहीं देता है तो उसे अपने लॉग इन आईडी से स्पष्ट कारण आरटीई पोर्टल पर दर्ज करना होगा। योजना को लेकर इस बार कई तरह के बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इस योजना का लाभ मिल सके।
वर्जन
शासन की ओर से आरटीई के नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं। इस बदलाव के कारण एडमिशन प्रक्रिया में कुछ विलंब हुआ था। अब जल्द ही एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
-वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए