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कछला इलाके में सड़कें और स्कूल जलमग्न कई घरों में घुसा बाढ़ का पानी

Sat, 23 Oct 2021 01:26 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 23 Oct 2021 01:26 AM IST
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Roads and schools in Kachla area, flood water entered many houses submerged
दातागंज के गांव में घुसा बाढ़ का पानी। संवाद - फोटो : BADAUN
उझानी/कछला। पिछले दिनों पहाड़ी इलाकों में झमाझम बारिश ने मैदानी क्षेत्र को भी चपेट में ले लिया है। इसका असर सबसे ज्यादा कछला के आसपास इलाके में नजर आया। गंगाघाट पर जहां प्रसाद विक्रेताओं को सामान समेट निकालना मुश्किल हो गया, वहीं आसपास के गांवों के लोगों की दिक्कत बढ़ गई है। सैकड़ों बीघा में फसलें चौपट हो गईं हैं। शुक्रवार सुबह कछला-कादरचौक रोड पर भी बाढ़ का पानी बहा और पड़ोस का प्राथमिक विद्यालय जलमग्न हो गया।
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खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा के जलस्तर का तलहटी के पास के गांव ढकनगला, डिलौर, खजुरारा आदि पर ज्यादा असर पड़ा है। बृहस्पतिवार रात खजुराजा प्राथमिक विद्यालय में बाढ़ का पानी घुस गया। शौचालय से लेकर खेल का मैदान भी जलमग्न हो गया। डिलौर, बहोरानगला और खजुरारा के पास सड़क भी पानी के चपेट में आने से डूब गई। सुबह स्कूल खुलने पर बच्चों को भी पानी में होकर कक्षा तक पहुंचना पड़ा। ग्रामीणों में नेत्रपाल ने बताया कि रात को स्थिति काफी खराब नजर आने लगी थी लेकिन शुक्रवार दोपहर जलस्तर कम होने के बाद सड़क किनारे मिट्टी का कटान बाढ़ के निशान छोड़ गया। दिक्कत में गंगाघाट के पास के दुकानदार भी हैं। एक दिन पहले जलस्तर तेजी से बढ़ा तो उन्हें दुकानों का सामान समेटना मुश्किल हो गया। घाट के पास तीन-चार झोपड़ियां बह गईं। डूब क्षेत्र में फसलों को भी बाढ़ के पानी ने जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है।
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कृषि वैज्ञानिक बोले- सरसों, धान और उड़द का सर्वाधिक नुकसान
उझानी। कृषि विज्ञान के प्रभारी अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि करीब 30 फीसदी रकबा में धान की फसल कटने के बाद उसकी गहाई का काम शुरू हो चुका है। बाकी में कहीं फसल कटी पड़ी तो कहीं कटाई को तैयार है। खेत में जहां भी धान कटा पड़ा है, उस खेत में बाढ़ का पानी भर जाने से ज्यादा नुकसान हुआ है। सरसों और लहटा भी चपेट में आकर बर्बाद हो गया है। किसान अगर सरसों और लहटा की दोबारा बोआई करते हैं तो वह पिछैती हो जाएगा। पके हुए उड़द का भी नुकसान हुआ है। उड़द और धान की फसल को डूब क्षेत्र से दूर ले जाकर सुखाने से नुकसान को कम किया जा सकता है।
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